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विधानसभा चुनाव 2026 के तहत देश के दो बड़े और राजनीतिक रूप से अत्यंत

प्रकाशित: 23-04-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
महत्वपूर्ण राज्य तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल इस समय लोकतांत्रिक प्रािढया के निर्णायक मोड़ पर खड़े हैं। चुनाव प्रचार का लंबा और तीखा दौर समाप्त हो चुका है और अब पूरा ध्यान मतदान पर केंद्रित हो गया है 23 अप्रैल को दोनों राज्यों में मतदान होना है जहां तमिलनाडु की सभी 234 सीटों पर एक साथ वोट डाले जाएंगे वहीं पश्चिम बंगाल में पहले चरण के तहत 152 सीटों पर मतदान कराया जाएगा। इसके बाद 29 अप्रैल को दूसरे चरण में 142 सीटों पर वोटिंग होगी और चार मई को परिणाम घोषित किए जाएंगे। यह चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन का सवाल नहीं है बल्कि यह क्षेत्रीय बनाम राष्ट्रीय राजनीति नेतृत्व की विश्वसनीयता और जनता के भरोसे की भी बड़ी परीक्षा है। पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल इस बार बेहद गर्म और प्रतिस्पर्धी रहा है। सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच सीधी टक्कर देखने को मिल रही है पिछले चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने लगभग साठ प्रतिशत से अधिक वोट हासिल कर बड़ी जीत दर्ज की थी,जबकि भाजपा ने करीब चालीस प्रतिशत वोट लेकर खुद को मुख्य विपक्ष के रूप में स्थापित किया था। इस बार भी यही दो दल आमने सामने हैं और दोनों ही पूरी ताकत के साथ जीत का दावा कर रहे हैं। भाजपा ने इस बार राज्य में आाढामक प्रचार किया और भ्रष्टाचार घुसपैठ तथा कानून व्यवस्था को मुख्य मुद्दा बनाया वहीं ममता बनर्जी ने क्षेत्रीय अस्मिता विकास और सामाजिक योजनाओं को अपनी ताकत के रूप में पेश किया। उन्होंने भाजपा को बाहरी ताकत बताते हुए बंगाल की पहचान को बचाने की अपील की इस तरह चुनावी मुकाबला केवल नीतियों का नहीं बल्कि पहचान और विचारधारा का भी बन गया है। पश्चिम बंगाल में पहले चरण के लिए करीब डेढ़ हजार उम्मीदवार मैदान में हैं और मतदाताओं की संख्या तीन करोड़ से अधिक है। राज्य में मतदान प्रतिशत पारंपरिक रूप से काफी अधिक रहता है और इस बार भी अस्सी से पचासी प्रतिशत तक मतदान की संभावना जताई जा रही है। अधिक मतदान आमतौर पर राजनीतिक बदलाव का संकेत देता है इसलिए सभी दलों की नजर मतदान प्रतिशत पर भी टिकी हुई है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए चुनाव आयोग ने कई सख्त कदम उठाए हैं,जिनमें मतदान से पहले रात के समय बाइक चलाने पर रोक भी शामिल है,ताकि किसी प्रकार की हिंसा या अव्यवस्था को रोका जा सके।
तमिलनाडु की बात करें तो यहां का चुनावी परिदृश्य अलग होते हुए भी उतना ही रोचक और चुनौतीपूर्ण है। राज्य में लंबे समय से द्रविड़ राजनीति का प्रभाव रहा है और इस बार भी मुख्य मुकाबला द्रविड़ मुनेत्र कषगम और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम के बीच माना जा रहा है। सत्ताधारी द्रमुक अपने शासन के दौरान किए गए विकास कार्यों और सामाजिक योजनाओं के आधार पर जनता से समर्थन मांग रही है जबकि अन्नाद्रमुक सत्ता विरोधी माहौल को भुनाने की कोशिश कर रही है। इसके अलावा भारतीय जनता पार्टी भी राज्य में अपनी स्थिति मजबूत करने के प्रयास में लगी है और इस बार उसने कई सीटों पर गंभीरता से चुनाव लड़ा है। हालांकि तमिलनाडु में भाजपा अभी मुख्य मुकाबले में पूरी तरह स्थापित नहीं हो पाई है, लेकिन उसका प्रभाव लगातार बढ़ रहा है।
-कांतिलाल मांडोत,
सूरत, गुजरात।