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प्लीज...उन्हें रिहा कर दो! 8 ईरानी औरतों की दास्‍तान जिनको ट्रंप भी कराना चाहते हैं आजाद?

प्रकाशित: 22-04-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
प्लीज...उन्हें रिहा कर दो! 8 ईरानी औरतों की दास्‍तान जिनको ट्रंप भी कराना चाहते हैं आजाद?
ईरान और अमेरिका के बीच जारी भारी तनाव बीच एक ऐसा मामला सामने आया है, जिस पर इस वक्त पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं. यह मामला है ईरान की जेल में बंद उन आठ महिलाओं का, जिन्हें वहां की सरकार ने फांसी की सजा सुनाई है. इस मामले में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक चौंकाने वाला और भावुक कदम उठाया है. ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर इन महिलाओं की तस्वीरें शेयर करते हुए ईरानी नेताओं से सीधी अपील की है.
ट्रंप ने लिखा कि प्लीज इन्हें नुकसान मत पहुंचाना. डोनाल्ड ट्रंप के पोस्ट के बाद यह मामला अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बन गया. ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल आ रहा है कि आखिर इन महिलाओं पर क्या आरोप हैं? क्या ये वाकई अपराधी हैं या ईरान अपनी शक्ति दिखाने के लिए इन्हें मोहरा बना रहा है? आइए जानते हैं...
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए उन 8 महिलाओं की फांसी रोकने और उन्हें तुरंत रिहा करने की अपील ईरान से की है, जिन्हें फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है. ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी डेलीगेशन से जल्दी ही बातचीत करने वाले ईरान के नेताओं से कहूंगा कि आप इन महिलाओं को रिहा कर देते हैं तो मैं इसकी बहुत तारीफ करूंगा. उन्होंने कहा कि मुझे भरोसा है कि आप ऐसा ही करेंगे और महिलाएं भी इसका सम्मान करेंगी. प्लीज उन्हें नुकसान न पहुंचाएं. यह हमारी बातचीत की बेहतरीन शुरुआत होगी. हालांकि बीबीसी के मुताबिक ईरान के अटॉर्नी जनरल ने 8 महिलाओं की फांसी की खबरों को खारिज किया है.
अभी तक इन 8 महिलाओं की पहचान और उन पर लगे आरोपों को लेकर पूरी जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन मानवाधिकार संगठनों और कार्यकर्ताओं ने कुछ जानकारी शेयर की हैं.
कौन हैं ये 8 महिलाएं?
कार्यकर्ता इयाल याकोबी और लॉफेयर प्रोजेक्ट की रिपोर्ट के मुताबिक इन महिलाओं की पहचान इस प्रकार की गई है-
बीता हेम्मती
नेशनल काउंसिल ऑफ रेजिस्टेंस ऑफ ईरान के मुताबिक बीता को जनवरी में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान उनके पति के साथ गिरफ्तार किया गया था.
डायना ताहेर अबादी
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, डायना जिनकी उम्र 16 साल है, उन्हें जनवरी में विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने के आरोप में हिरासत में लिया गया था.
महबूबेह शबानी
शबानी जिनकी उम्र 33 साल है, उन पर आरोप है कि उन्होंने प्रदर्शनों के दौरान घायल हुए लोगों की मदद की थी. उन्हें फरवरी में गिरफ्तार किया गया.
एंसियेह नेजाती
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वह एक कुर्द महिला अधिकार कार्यकर्ता और एक छोटे बच्चे की मां हैं. उन्हें 2025 की शुरुआत में मौत की सजा सुनाई गई थी.
गोलनाज नराघी
गोलनाज नराघी पेशे से इमरजेंसी मेडिसिन स्पेशलिस्ट हैं, उन्हें प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तार किया गया था. उनकी उम्र 37 साल है.
वीनस हुसैन नेजाद
बताया जा रहा है कि सुरक्षा बलों ने उन्हें उनके ऑफिस से गिरफ्तार किया था. उन पर सरकारी टीवी पर जबरन कबूलनामा देने का आरोप है.
गजल गलंदरी और पनाह मोवाहेदी
इन दोनों के नाम भी मानवाधिकार समूहों की लिस्ट में है हालांकि इनके बारे में विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है.
क्या है आरोप?
ईरानी प्रशासन की तरफ से आधिकारिक पुष्टि की कमी के बाद भी एक्टिविस्ट समूहों ने कुछ गंभीर आरोपों का जिक्र किया है:
बीता हेम्मती
इन पर विस्फोटक इस्तेमाल करने, कंक्रीट ब्लॉक फेंकने, विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा पहुंचाने जैसे आरोप लगे हैं.
अन्य पर आरोप
ज्यादातर महिलाओं पर सरकार विरोधी प्रदर्शन आयोजित करने या उनमें शामिल होने का आरोप है. महबूबे शबानी पर विशेष रूप से घायलों की सहायता करने का आरोप है.
इस पूरे मामले में अभी भी कई सवाल बने हुए हैं. ईरानी अधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से इन आठों नामों या उनके मामलों को लेकर कुछ नहीं कहा है. ज्यादातर जानकारी कार्यकर्ताओं और मानवाधिकार नेटवर्क के जरिए से आई है, जिसकी पुष्टि होना बाकी है.
इन 8 महिलाओं को लेकर पोस्ट अयाल याकोबी ने की है. याकोबी खुद को ऑनलाइन यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिल्वेनिया का ग्रेजुएट और MIT का आने वाला छात्र बताते हैं. उन्होंने यह दावा किया है कि इस्लामिक रिपब्लिक ईरान इन महिलाओं को फांसी देने की प्लानिंग कर रहा है, और अंतरराष्ट्रीय समुदाय और मानवाधिकार संगठन इस पर चुप हैं. याकोबी की ही पोस्ट में इन आठों महिलाओं की तस्वीर है, जो इस समय जेल में बंद है. इन महिलाएं को जनवरी के प्रदर्शनों में गिरफ्तार किया गया है.