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रक्तदान-महादान अभियान स्वयंसेवी संगठन

प्रकाशित: 24-06-2026 | लेखक: संपादकीय टीम
डॉ. प्रवेश कुमार
भारत का समाज अपने सनातन से ही समाज जीवन के प्रति सह-अस्तित्व और परस्पर पूरकता के भाव के साथ रहता आ रहा है। समाज में प्रत्येक व्यक्ति का कल्याण हो इसी लिए तो सर्वे भवन्तु सुखिना का अहम सन्देश हमारे द्वारा दिया गया। हमारे हिन्दू मानस, हमारे हिन्दुत्व जीवन दर्शन ने समाज की परिभाषा प्रभु राम से ग्रहण की जिसमे वह समाज निर्माण में सहोदर भाव के होने को प्रमुख अहर्ता मानते है। सहोदर कहने मात्र से हम सबके के मध्य मानवकृत भेदों का नाश स्वत हो जाता है।
समाज भारत की दृष्टि में साम और अज के योग से बना है, जिसका अर्थ ही सबके साथ मिलकर चलने से है। इसी प्रकार से हम अगर रक्त को देखे तो यहाँ सम्पूर्ण जगत को एकत्व के साथ जोड़ता है जगत में विद्यमान सभी प्राणियों के रक्त का रंग लाल ही होता है। इसमें महत्वपूर्ण यह भी है की यह मानवकृत आज तक भी नहीं हो पाया है, यह रक्त व्यक्ति के शरीर में परम शक्ति की देन है।
एक व्यक्ति के शरीर में अमूमन 3000 से 5000 मिली तक ही रक्त पाया जाता है। इसी रक्त का दान करके व्यक्ति समाज के प्रति अपने दायित्व का निर्वहन कर सकता है। हम क्या जानते हैं की प्रत्येक दिन कई हज़ार लोगो की मृत्यु रक्त की कमी के कारण से हो जाती है जो वार्षिक रूप कई लाखो में होगी। विश्व स्तर पर प्रत्येक वर्ष लगभग 20 लाख लोगों की मृत्यु रक्त की कमी से होती है। इसलिए विश्व में किसी की भी मृत्यु रक्त की कमी से ना हो इस हेतु जनजागरण अभियान के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा 14 जून को विश्व रक्तदान दिवस के रूप में मनाने का आवाहन किया है। हमारी हिन्दू संस्कृति में दान को बड़े ही पवित्र भाव के साथ देखा गया है महर्षि दधीचि द्वारा विश्व मांगल्य के लिए अपनी अस्थियों तक का दान दिया गया। देश और समाज की सेवा हेतु दान करने की वृत्ति भारत के जनमानस में सदैव से रही है तभी तो संत कहता है “स्वामी इतना दीजिये जामे कुटुम्ब समाय में भी भूखा ना रहु साधु भी भूखा ना जाये''। दान का अर्थ निस्वार्थ भाव से किसी की सहायता करना है।
इसी प्रकार से रक्तदान केवल एक स्वास्थ्य सेवा नहीं है, यह एक सामाजिक जिम्मेदारी भी है। यह मानवता की सच्ची सेवा का उदाहरण है, जो जाति, धर्म, भाषा या क्षेत्र से परे जाकर सिर्फ और सिर्फ मानव जीवन को प्राथमिकता देता है। देश भर में जीते-जीते रक्तदान जाते-जाते नेत्रदान, अंगदान का अहम संदेश देने वाले स्वयंसेवी संस्था दधीचि देहदान संस्था के सचिव पेशे से चिकित्सक डॉ. कीर्तिवर्धन साहनी कहते है “ रक्तदान मानव जीवन का आधार है मनुष्य में रक्त के से ही जीवन शक्ति आती है, ऐसे किसी दान से जिससे मानव को जीवन मिलता है उसे महादान ही कहा जाता है. अगर हम संकल्प ले की प्रत्येक चार महीनों में रक्त दान करेंगे तो इससे एक तो देश में रक्त की रिक्तिता नहीं आएगी वही शुद्ध रक्त बनने से हमारा स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा। इसी प्रकार से देह दान अंग दान ऐसे विषय है जिसके बारे में मानवता के नाते सोचने से हम भी ईश्वरीय कार्य मे एक प्रेरणा बन सकते है।
रक्तदान से किसी को मिलता है जीवन दान इसे मुहिम के रूप में चलाने का कार्य वर्षों से सेवा भारती करती आ रही है सेवा भारती के राष्ट्रीय मंत्री रामकुमार जी के अनुसार रक्त शरीर संचालन का प्रमुख अवयव है, रक्त बनाया नहीं जा सकता एक शरीर से ही दूसरे को दिया जा सकता है. रक्तदान ऐसा दान है जो किसी आवश्यकता वाले व्यक्ति के लिए ही ठीक नहीं बल्कि रक्तदान करने वाले के लिए भी लाभकारी होता है''। सेवा भारती हजारों यूनिट ब्लड प्रत्येक वर्ष एकत्रित करता है यह रक्त दान दो प्रकार का है एक जो कैम्प के माध्यम से होता है वही एक आपातकालीन स्थिति में हेमंत जी दिल्ली स्वास्थ्य आयाम सेवा भारती का कहना है कि प्रत्येक दिन सेवा भारती से जुड़े कार्यकर्ता कहीं ना कहीं रक्तदान करते है वही 2500 यूनिट के लगभग हम वर्ष में ब्लड बैंक बनाते है। इसी प्रकार से अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के द्वारा युवा छात्रो के बीच रक्तदान को जागरूकता अभियान के रूप चलाया जाता है। एबीवीपी रक्तदान केम्पो के माध्यम से केवल दिल्ली में ही प्रत्येक वर्ष 1500-2000 यूनिट ब्लड विभिन्न ब्लड बैंक एकत्रित करने वाले संगठनों को करता है। एबीवीपी के दिल्ली संगठन मंत्री विपिन जी के अनुसार विद्यार्थी परिषद कॉलेज इकाई के अनुसार रक्तदान करने के लिए छात्रो को प्रोत्साहित करता है। इकाई और बस्ती के अनुसर छोटे-बड़े ब्लड डोनेशन कैम्प संगठन आयोजित करता रहता है। हम देखे की देश भर में जिला रक्त बैंक के माध्यम से लाखो लोगो का जीवन बचाने का का कार्य बजरंग दल करता है। बजरंग दल का मानना है कि देश में किसी की भी मृत्यु रक्त की कमी से नहीं होनीचाहिए।
हमे विदित हो बजरंग दल ने वर्ष में एक दिन संपूर्ण देश में रक्तदान करके “लिम्का वर्ल्ड बुक रिकॉर्ड'' में अपना नाम दर्ज किया है। हमे यह भी जानने की आवश्यकता है और इसे लोगो से परिचित भी कराने की आवश्यकता है कि रक्तदान न केवल जरूरतमंद मरीजों की मदद करने की एक पवित्र सेवा है, बल्कि इससे दानकर्ता को भी कई स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं। रक्तदान करने से शरीर में आयरन का संतुलन बना रहता है जिसके कारण से हार्ड अटैक का खतरा कम हो जाता है।
हम देखे की देश में हर पल कोई न कोई दुर्घटना होती ही रहती है. ऐसे में पीड़ित परिवार को अपने रक्त समूह से मेल खाने वाले रक्त की तलाश करनी पड़ती है। वही हाल ही में भारत में महामारी की दूसरी लहर के दौरान कई मामले सामने आए और अस्पतालों में रक्त समूह की उपलब्धता के कारण कई लोग बच गए। इसी के साथ हमे रक्तदान करते रहना चाहिए हम देखे की भारत चीन, पाकिस्तान युद्ध के दौरान अचानक रक्त की आवश्यकता के लिए उस समय की सरकार ने विश्व सबसे बड़े संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संगठन से रक्त दान के लिए आग्रह किया। जिसका परिणाम था कि लाखो की संख्या में संघ स्वयंसेवक अपने सैनिकों को रक्तदान के लिए दौड़ पड़े। इस लिए रक्तदान महादान है हम सभी ने इसे करना चाहिए, औरो के लिए नहीं तो अपने स्वास्थ्य को अच्छा बनाने के लिए ही रक्तदान अवश्य करे।
(लेखक तुलनात्मक अध्ययन एवं राजनीतिक सिद्धांत अंतर्राष्ट्रीय अध्ययन केंद्र, जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली हैं।)