वर्षों से राष्ट्र की सेवा में समर्पित Virarjun अर्जुनस्य प्रतिज्ञे द्वे, न दैन्यं, न पलायनम् ।

झूठ की खुली पोल

प्रकाशित: 24-06-2026 | लेखक: सदानंद पांडे
झूठ की खुली पोल
अमेरिकी लेखक मार्क ट्वेन का यह कथन कि “जब तक सच अपने जूते पहन रहा होता है तब तक झूठ दुनिया की एक परिक्रमा पूरी कर लेता है'' ऑपरेशन सिन्दूर के वक्त राफेल युद्धक विमानों को पाकिस्तान द्वारा मार गिराए जाने के झूठे दावे की पोल इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट ने खोल दी है।
दरअसल पाकिस्तान ऑपरेशन सिन्दूर के दौरान जब बुरी तरह पिट गया तो अपनी जनता के बीच झूठ फैलाने के लिए उसने दावा करना शुरू कर दिया कि उसके चीनी फाइटर जेटों ने भारत के राफेल विमानों को मार गिराया। उन्होंने बकायदा संख्या भी बताई। किन्तु भारतीय वायुसेना के अधिकारियों ने उस वक्त पाकिस्तान के दावों की खिल्लियां उड़ाईं और इतना ही कहा कि पाकिस्तान को चाहिए कि वह मलवा दिखाए। कुल मिलाकर वायुसेना ने चुप्पी साधने की रणनीति अपना ली क्योंकि भारतीय वायुसेना को पता था कि चीन की सलाह पर पाकिस्तान ने यह झूठ प्रचारित किया है। चीन जानता है कि राफेल के मुकाबले उसके जे-35 के खरीददारों की संख्या बहुत कम है इसलिए उसने पाकिस्तान के हवाले से इस झूठ को प्रचारित करने का अभियान चलाया। फ्रांस की कंपनी दसां जो जा राफेल की निर्माता इकाई है, उसने चीन और पाकिस्तान की जमकर खिंचाई की थी किन्तु उस वक्त चीन निर्देशित पाक के इस झूठ को सच माना गया कि भारतीय राफेल विमानों को मार गिराने के पाकिस्तान के दावे में दम तो है। हैरानी तो तब हुई जब भारत के बुद्धिजीवी, रणनीतिकार और विश्लेषकों ने भी देशी-विदेशी यू-ट्यूबरों द्वारा फैलाए गए इस झूठ को सच मानने की भावनात्मक भूल की थी। कारण कि जिन लोगों को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से चिढ़ थी उन्होंने पाकिस्तान और चीन के इस आरोप को सच मान कर लिखना-पढ़ना शुरू कर दिया। लेकिन इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक वास्तविकता यह है कि भारतीय वायुसेना ने एक टेण्डर जारी करके भारत और फ्रांस के बीच हुए समझौते के तहत खरीदे गए सभी 36 राफेल विमानों के रखरखाव और तकनीकी सहायता एवं संचालन के लिए पैकेज तैयार किया है।
असल में भारतीय वायुसेना ने जून 2026 में जारी एक रिक्वेस्ट फार प्रपोजल यानि आरएफपी में स्पष्ट कर दिया है कि भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल सभी 36 राफेल विमान न सिर्फ सुरक्षित हैं बल्कि पूरी तरह ऑपरेशनल भी हैं। भारतीय वायुसेना ने यदि 36 राफेल विमानों के ‘ब्रिज सपोर्ट' यानि रखरखाव तथा तकनीकी सहायता की मांग की है तो सवाल उठता है कि यदि पाकिस्तान ने राफेल विमान गिराए थे तो अब भारत में सभी 36 विमान सुरक्षित क्यों हैं? राफेल विमानों की संख्या 2016 में भी 36 थी और आज भी। रिक्वेस्ट फार प्रपोजल में सितम्बर 2026 के बाद भी बेड़े को चालू रखने के लिए रखरखाव और लाजिस्टिक्स और तकनीकी सहायता की मांग की गई है, जिसमें पांच महीने की सहायता अवधि के दौरान अनुमानित 2250 उड़ान घंटों की की योजना है। असल में ब्रिज सपोर्ट व्यवस्था का उद्देश्य ही यह सुनिश्चित करना है कि जब तक दीर्घकालिक सहायता अनुबन्ध को अन्तिम रूप नहीं दिया जाता तब तक संचालन बिना रुकावट के जारी रहे।
बहरहाल वायुसेना के रिक्वेस्ट फार प्रपोजल ने पाकिस्तान के झूठ की वास्तविकता सामने ला दी किन्तु दुखद सत्य यह है कि भारतीय मीडिया में एक वर्ग ऐसा है जिसे भारतीय वायुसेना के सच से ज्यादा पाकिस्तान के झूठ की मशीन सैन्य जनसंपर्क यानि आईएसपीआर पर भरोसा हो गया था। भारतीय वायुसेना ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद राफेल गिराए जाने के झूठ पर ज्यादा बोलने से परहेज किया। वायुसेना को पता था कि एक न एक दिन पाकिस्तान और चीन के झूठ की धज्जियां तो उड़नी ही हैं।