वर्षों से राष्ट्र की सेवा में समर्पित Virarjun अर्जुनस्य प्रतिज्ञे द्वे, न दैन्यं, न पलायनम् ।

उबाल मार रहा है कच्चा तेल! US-ईरान युद्ध के बीच सप्लाई की चिंताओं के कारण कीमतें 3% और बढ़ीं, आगे क्या होगा?

प्रकाशित: 05-03-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
उबाल मार रहा है कच्चा तेल! US-ईरान युद्ध के बीच सप्लाई की चिंताओं के कारण कीमतें 3% और बढ़ीं, आगे क्या होगा?
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब वैश्विक तेल बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। मध्य पूर्व में बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण गुरुवार को कच्चे तेल की कीमतों में 3% से अधिक की तेज बढ़त दर्ज की गई। विशेषज्ञों का कहना है कि संघर्ष के चलते प्रमुख आयातकों तक तेल की आपूर्ति बाधित होने की आशंका ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 2.65 डॉलर यानी 3.26% की बढ़त के साथ 83.99 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। यह लगातार पांचवां कारोबारी सत्र है जब ब्रेंट में तेजी दर्ज की गई है। वहीं यूएस वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी 2.76 डॉलर यानी 3.70% चढ़कर 77.42 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। तेल बाजार में बढ़ती अस्थिरता की बड़ी वजह मध्य पूर्व में जारी सैन्य हमले और खासतौर पर स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज से गुजरने वाली तेल आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंताएं हैं। यह जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है।
क्यों बढ़ीं तेल की कीमतें
रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने गुरुवार तड़के इजरायल पर एक बार फिर मिसाइल हमले किए, जिसके बाद लाखों लोगों को सुरक्षा के लिए बंकरों में शरण लेनी पड़ी। यह हमला ऐसे समय हुआ जब वॉशिंगटन में अमेरिका के हवाई हमलों को रोकने की कोशिशें विफल हो गईं। खबर के मुताबिक, बुधवार को श्रीलंका के तट के पास एक अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरान के एक युद्धपोत को निशाना बनाकर डुबो दिया, जिसमें कम से कम 80 लोगों की मौत हो गई। वहीं नाटो की एयर डिफेंस प्रणाली ने तुर्की की ओर दागी गई ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल को हवा में ही नष्ट कर दिया। इस बीच ईरानी बलों द्वारा स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज के आसपास तेल टैंकरों को निशाना बनाए जाने की खबरें भी सामने आई हैं। यूनाइटेड किंगडम मैरिटाइम ट्रेड ऑपरेशंस के अनुसार, कुवैत के तट के पास एक तेल टैंकर के नजदीक विस्फोट की घटना भी दर्ज की गई है।
वैश्विक आपूर्ति पर बढ़ा दबाव
लगातार बढ़ते तनाव के बीच ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता के बेटे का नाम नए संभावित उत्तराधिकारी के रूप में सामने आया है। इससे संकेत मिलता है कि तेहरान फिलहाल अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे झुकने के मूड में नहीं है। दूसरी ओर, ओपेक (OPEC) के दूसरे सबसे बड़े तेल उत्पादक इराक ने भी अपना उत्पादन लगभग 15 लाख बैरल प्रतिदिन घटा दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, सीमित भंडारण क्षमता और निर्यात मार्गों में बाधा इसके प्रमुख कारण हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन सरकार ने अपने बड़े रिफाइनरों को डीजल और पेट्रोल के निर्यात को अस्थायी रूप से रोकने का निर्देश दिया है, ताकि घरेलू मांग को प्राथमिकता दी जा सके।
इसके अलावा एक बड़े भारतीय रिफाइनर ने भी ग्राहकों को संकेत दिया है कि वह फिलहाल अपने पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात रोक सकता है। वहीं जापान के रिफाइनरों ने अपनी सरकार से रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार से तेल जारी करने का अनुरोध किया है।
आगे क्या रहेगा रुख
ब्रोकरेज फर्म श्रीराम वेल्थ का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में मौजूदा तेज उछाल लंबे समय तक जारी रहना मुश्किल है, खासकर इस साल अमेरिका में होने वाले मिड-टर्म चुनावों को देखते हुए। फर्म के अनुसार, यदि मध्य पूर्व में तनाव धीरे-धीरे कम होता है तो तेल की कीमतें फिर से करीब 70 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक लौट सकती हैं। हालांकि कुछ अन्य ब्रोकरेज हाउस का अनुमान है कि यदि संघर्ष और गहराता है तो कच्चे तेल की कीमतें 90 से 100 डॉलर प्रति बैरल तक भी पहुंच सकती हैं।