लगातार 3 दिनों की गिरावट के बाद गिरा शेयर बाजार, मिनटों में निवेशकों के डूबे 4 लाख करोड़
प्रकाशित: 07-04-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी करीब 1% गिरकर खुले. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली से तीन दिन की तेजी के बाद बाजार का माहौल कमजोर हो गया. शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 1.05% गिरकर 73,326.61 पर आ गया, जबकि निफ्टी 0.9% गिरकर 22,771.75 पर पहुंच गया. बड़े शेयरों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी करीब 1% गिरे, जिससे बाजार में दबाव दिखा. इस दौरान कुछ ही सेकंड में बीएसई में लिस्टेड कंपनियों की कुल वैल्यू 4.24 लाख करोड़ रुपये घट गई. निवेशकों को करीब 4 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हो गया. शेयर बाजार की शुरुआती गिरावट में सबसे ज्यादा नुकसान IndiGo, Zomato की पेरेंट कंपनी Eternal, Mahindra & Mahindra (M&M), State Bank of India (SBI), Axis Bank और Asian Paints को हुआ, जिनमें करीब 2-3% की गिरावट आई. इस ट्रेंड के उलट, Bajaj Finance, TechMahindra, HCL Tech और ITC के शेयर हरे निशान में ट्रेड कर रहे थे, लेकिन उनमें बहुत मामूली बढ़त थी. NSE पर सेक्टोरल इंडेक्स में Nifty Auto को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ. शुरुआती ट्रेडिंग घंटों में यह 2% से ज्यादा गिर गया, जबकि Nifty PSU Bank इंडेक्स में 1.9% की गिरावट आई. इस बीच Nifty Metal में 0.7% की बढ़त हुई, जबकि India Vix में 2% का उछाल आया. NSE पर करीब 1,105 शेयरों में गिरावट आई, जबकि 1,398 शेयरों में बढ़त हुई और 82 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ. आइए जानते हैं कि आखिर आज शेयर बाजार में गिरावट क्यों आई.
इन कारणों से आई गिरावट
1. ईरान पर ट्रंप की नई धमकियां- अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अपनी धमकियां और तेज कर दी हैं. उन्होंने कहा कि अगर ईरान उनकी बात नहीं मानता, तो एक ही रात में देश को भारी नुकसान पहुंचाया जा सकता है. ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान के पावर प्लांट और पुल कुछ ही घंटों में नष्ट किए जा सकते हैं. ईरान ने इन बातों को खारिज कर दिया है. इस बीच, इजराइल और ईरान के बीच हमलों का सिलसिला जारी है और हालात सामान्य होते नहीं दिख रहे हैं. हालांकि, कल बाजार में तेजी आई थी क्योंकि खबर थी कि ईरान और अमेरिका के बीच समझौते की एक योजना बन सकती है, जिससे होर्मुज जलस्ट्रेट फिर से खुल सकता है और व्यापार शुरू हो सकता है.
2. तेल की कीमतें फिर से $110/बैरल के ऊपर- तेल की कीमतें फिर से $110 प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई हैं. इसकी वजह ईरान से जुड़े तनाव और होर्मुज जलस्ट्रेट में रुकावट की आशंका है, जिससे तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है. मंगलवार सुबह के आंकड़ों के अनुसार, ब्रेंट क्रूड लगभग $111 प्रति बैरल और WTI क्रूड करीब $115 प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था. युद्ध शुरू होने के बाद से ही तेल की कीमतों में तेज़ी बनी हुई है और मार्च में यह $100 के पार चला गया था.
3. बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी- अमेरिका के सरकारी बॉन्ड (कर्ज) पर मिलने वाला रिटर्न (यील्ड) थोड़ा बढ़ गया है. जब बॉन्ड यील्ड बढ़ती है, तो इसका मतलब होता है कि निवेशक शेयर बाजार से पैसा निकालकर दूसरी सुरक्षित जगहों पर लगा रहे हैं. इससे शेयर बाज़ार पर दबाव बढ़ता है.
4. FII की बिकवाली का सिलसिला जारी- विदेशी निवेशक लगातार भारतीय शेयर बाज़ार में बिकवाली कर रहे हैं. NSE के आंकड़ों के अनुसार, वे लगातार 24 दिनों से शेयर बेच रहे हैं. सोमवार को उन्होंने करीब 8,167 करोड़ रुपये के शेयर बेचे. इससे बाज़ार का माहौल कमजोर बना हुआ है, भले ही घरेलू निवेशक खरीदारी कर रहे हों.
5. प्रॉफिट बुकिंग- आज की गिरावट की एक वजह यह भी है कि निवेशकों ने पिछले तीन दिनों में हुए मुनाफे को निकालना शुरू कर दिया है. पिछले तीन दिनों में सेंसेक्स और निफ्टी करीब 3% तक बढ़े थे. ऐसे में कुछ निवेशकों ने सही समय देखकर अपने शेयर बेच दिए, जिससे बाजार नीचे आ गया.
इन कारणों से आई गिरावट
1. ईरान पर ट्रंप की नई धमकियां- अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अपनी धमकियां और तेज कर दी हैं. उन्होंने कहा कि अगर ईरान उनकी बात नहीं मानता, तो एक ही रात में देश को भारी नुकसान पहुंचाया जा सकता है. ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान के पावर प्लांट और पुल कुछ ही घंटों में नष्ट किए जा सकते हैं. ईरान ने इन बातों को खारिज कर दिया है. इस बीच, इजराइल और ईरान के बीच हमलों का सिलसिला जारी है और हालात सामान्य होते नहीं दिख रहे हैं. हालांकि, कल बाजार में तेजी आई थी क्योंकि खबर थी कि ईरान और अमेरिका के बीच समझौते की एक योजना बन सकती है, जिससे होर्मुज जलस्ट्रेट फिर से खुल सकता है और व्यापार शुरू हो सकता है.
2. तेल की कीमतें फिर से $110/बैरल के ऊपर- तेल की कीमतें फिर से $110 प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई हैं. इसकी वजह ईरान से जुड़े तनाव और होर्मुज जलस्ट्रेट में रुकावट की आशंका है, जिससे तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है. मंगलवार सुबह के आंकड़ों के अनुसार, ब्रेंट क्रूड लगभग $111 प्रति बैरल और WTI क्रूड करीब $115 प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था. युद्ध शुरू होने के बाद से ही तेल की कीमतों में तेज़ी बनी हुई है और मार्च में यह $100 के पार चला गया था.
3. बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी- अमेरिका के सरकारी बॉन्ड (कर्ज) पर मिलने वाला रिटर्न (यील्ड) थोड़ा बढ़ गया है. जब बॉन्ड यील्ड बढ़ती है, तो इसका मतलब होता है कि निवेशक शेयर बाजार से पैसा निकालकर दूसरी सुरक्षित जगहों पर लगा रहे हैं. इससे शेयर बाज़ार पर दबाव बढ़ता है.
4. FII की बिकवाली का सिलसिला जारी- विदेशी निवेशक लगातार भारतीय शेयर बाज़ार में बिकवाली कर रहे हैं. NSE के आंकड़ों के अनुसार, वे लगातार 24 दिनों से शेयर बेच रहे हैं. सोमवार को उन्होंने करीब 8,167 करोड़ रुपये के शेयर बेचे. इससे बाज़ार का माहौल कमजोर बना हुआ है, भले ही घरेलू निवेशक खरीदारी कर रहे हों.
5. प्रॉफिट बुकिंग- आज की गिरावट की एक वजह यह भी है कि निवेशकों ने पिछले तीन दिनों में हुए मुनाफे को निकालना शुरू कर दिया है. पिछले तीन दिनों में सेंसेक्स और निफ्टी करीब 3% तक बढ़े थे. ऐसे में कुछ निवेशकों ने सही समय देखकर अपने शेयर बेच दिए, जिससे बाजार नीचे आ गया.