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सेबी ने कर्मचारियों के हितों के टकराव नियमों को अधिसूचित किया, निवेश नियम परिवार के सदस्यों पर लागू

प्रकाशित: 14-07-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
नई दिल्ली, (भाषा)। बाजार नियामक सेबी ने हितों के टकराव को लेकर अपने कर्मचारियों के लिए नए नियम जारी किए हैं। इनमें हितों के टकराव से संबंधित एक व्यापक रूपरेखा, निवेश पर कड़े प्रतिबंध और जानकारी देने के सख्त नियम और नियामक की नौकरी छोड़ने के बाद कर्मचारियों के लिए दो साल तक किसी भी मामले में किसी व्यक्ति की ओर से या उसके खिलाफ नियामक के सामने पेश होने की अनुमति नहीं होगी।
इन बदलावों का मकसद सेबी कर्मचारियों के लिए कामकाज, पारदर्शिता और नैतिक मानकों को मजबूत करना है। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने मौजूदा रूपरेखा की समीक्षा के बाद अपने निदेशक मंडल (बोर्ड) के सदस्यों और वरिष्" अधिकारियों के लिए हितों के टकराव से जुड़े संशोधित नियम जारी किए हैं। सेबी की पूर्व चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच पर अब बंद हो चुकी हिंडनबर्ग रिसर्च ने हितों के टकराव के आरोप लगाए थे। उसके बाद यह समीक्षा शुरू की गई थी। बुच ने इन आरोपों से इनकार किया था और बाद में उन्हें आरोपों से मुक्त कर दिया गया था। पिछले महीने सेबी बोर्ड द्वारा मंजूर की गई इस संशोधित रूपरेखा में नियामक के वरिष्" अधिकारियों के लिए स्वेच्छा से आचार संहिता अपनाना भी शामिल है। नए नियमों के तहत, सेवानिवृत्ति, इस्तीफा या किसी अन्य कारण से सेबी छोड़ने वाले कर्मचारियों को नौकरी छोड़ने की तारीख से दो साल तक किसी भी मामले में किसी व्यक्ति की ओर से या उसके खिलाफ नियामक के सामने पेश होने की अनुमति नहीं होगी। सेबी ने सात जुलाई की एक अधिसूचना में कर्मचारियों के परिवार के सदस्यों पर भी निवेश संबंधी प्रतिबंध लागू किए हैं। कर्मचारी के कार्यकाल के दौरान, न तो कर्मचारी और न ही उनके परिवार के सदस्य बिना अनुमति वाले निवेश में नया निवेश कर सकते हैं। इनमें इद्रिटी शेयर, इद्रिटी में बदलने योग्य निवेश उत्पाद और इद्रिटी या जिंस वायदा शामिल हैं। हालांकि, वित्तीय क्षेत्र के नियामक द्वारा नियंत्रित पेशेवर रूप से प्रबंधित पूल्ड इन्वेस्टमेंट व्हीकल्स के साथ-साथ इनविट और रीट में निवेश की अनुमति बनी रहेगी। इसके अलावा, पूल्ड इन्वेस्टमेंट व्हीकल्स का प्रबंधन करने वाली सेबी-नियंत्रित किसी इकाई द्वारा पेश किए गए उत्पादों में कर्मचारी का निवेश, उसके कुल वित्तीय निवेश के 25 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता है। पूल्ड इन्वेस्टमेंट व्हीकल एक वित्तीय संरचना है जिसमें कई निवेशक अपनी पूंजी को मिलाकर एक ही, विविध परिसंपत्ति पोर्टफोलियो खरीदते और प्रबंधित करते हैं। सेबी में शामिल होने वाले जिन कर्मचारियों के पास पहले से ही बिना मंजूरी वाले निवेश हैं, वे उन्हें बेच सकते हैं, अपनी सेवा समाप्त होने तक उन्हें फ्रीज कर सकते हैं, मंजूर योजना के तहत उनका निपटान कर सकते हैं या नैतिकता और अनुपालन कार्यालय (ओईसी) की पूर्व मंजूरी से उन्हें बेच सकते हैं। हालांकि, कर्मचारी के अपने व्यावसायिक उद्यम की इद्रिटी या परिवर्तनीय उत्पादों में किए गए निवेश को केवल बेचा या फ्रीज ही किया जा सकता है।
हितों के टकराव से निपटने के लिए, नियमों के तहत कर्मचारियों को ऐसे मामलों से खुद को अलग करना होगा जिनमें टकराव वाला संबंध शामिल हो। इसमें ऐसी स्थितियां शामिल हैं जहां कर्मचारी का संबंधित संस्था में कोई बड़ा वित्तीय हित हो, जहां पिछले तीन वर्षों का कोई करीबी दोस्त या सहयोगी शामिल हो या जहां पारिवारिक, पेशेवर या संबंध-आधारित हितों से वास्तविक या संभावित पक्षपात पैदा हो सकता हो।
इसके अलावा, कर्मचारियों को किसी भी संभावित हितों के टकराव की जानकारी जल्द से जल्द देनी होगी। सेबी ऐसी जानकारी को रिकॉर्ड करने और खुद को अलग करने की प्रक्रिया को प्रबंधित करने के लिए एक डिजिटल प्रणाली बनाएगा।
इन संशोधनों से जानकारी देने (डिस्क्लोजर) की आवश्यकताएं काफी मजबूत हो जाती हैं। कर्मचारियों को अपने परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों, पिछले तीन वर्षों के पेशेवर हितों, अचल संपत्ति, वित्तीय निवेश और देनदारियों, परिवार के सदस्यों के पास मौजूद विशिष्ट निवेश और अचल संपत्ति किराये पर देने के अनुबंधों का विवरण देना होगा।
कर्मचारियों को भविष्य में नौकरी के लिए किसी भी बातचीत या समझौते की जानकारी भी देनी होगी। यह जानकारी उस महीने के खत्म होने के एक माह के भीतर देनी होगी जिस महीने में ऐसी बातचीत या समझौता हुआ हो।
साथ ही, वित्तीय संपत्तियों में कर्मचारी के मासिक मूल वेतन से दोगुने से अधिक मूल्य का कोई भी लेनदेन होने पर, उस लेनदेन वाले महीने के खत्म होने के एक महीने के भीतर इसकी सूचना देनी होगी।
उपहार नीति के संबंध में, सेबी ने कहा कि हालांकि यादगार वस्तुएं, स्मृति चिन्ह और गुलदस्ते जैसे मामूली उपहार स्वीकार्य रहेंगे, लेकिन कर्मचारियों को किसी एक व्यक्ति से मिले ऐसे उपहारों की जानकारी देनी होगी जिनका मूल्य 50,000 रुपये से अधिक हो।
इन संशोधनों के तहत कर्मचारियों के लिए परिवार के सदस्यों की परिभाषा को भी स्पष्ट किया गया है। इस परिभाषा में अब जीवनसाथी, आश्रित बच्चे, वे लोग जिनके लिए कर्मचारी कानूनी अभिभावक है और जो काफी हद तक कर्मचारी पर निर्भर हैं। साथ ही खून के रिश्ते या ससुराल पक्ष के ऐसे रिश्तेदार जो काफी हद तक कर्मचारी पर निर्भर हैं, इसमें शामिल हैं।