मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने लॉन्च किया एआई-संचालित ‘डस्ट पोर्टल 2.0'
प्रकाशित: 14-07-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
वीर अर्जुन संवाददाता
नई दिल्ली। दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता ने सोमवार को एआई-संचालित ‘डस्ट पोर्टल 2.0' - डस्ट पॉल्यूशन कंट्रोल सेल्फ-असेसमेंट वेब पोर्टल और मोबाइल एप्लिकेशन का शुभारंभ किया। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) की ओर से विकसित यह अत्याधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म एआई की सहायता से निर्माण एवं विध्वंस स्थलों पर धूल नियंत्रण उपायों की वास्तविक समय में निगरानी करेगा। इसके माध्यम से परियोजना संचालकों को स्व-मूल्यांकन की सुविधा मिलेगी और डेटा आधारित निगरानी और एनफोर्समेंट को और अधिक सशक्त बनाया जाएगा।
इस अवसर पर दिल्ली के पर्यावरण मंत्री सरदार मनजिंदर सिंह सिरसा सहित संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। कार्पाम के दौरान डस्ट पोर्टल 2.0 का लाइव प्रदर्शन भी किया गया, जिसमें दिखाया गया कि किस प्रकार एआई निगरानी व्यवस्था को अधिक कुशल, सटीक और प्रभावी बना सकती है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली में वायु प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई केवल सख्त नियमों से नहीं, बल्कि आधुनिक और स्मार्ट प्रशासनिक प्रणालियों से भी लड़ी जाएगी। डस्ट पोर्टल 2.0 निर्माण स्थलों पर धूल प्रदूषण की निगरानी और प्रबंधन की प्रािढया में एक महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आएगा। उन्होंने कहा कि एआई और डिजिटल तकनीक के माध्यम से हमारी सरकार अनुपालन प्रािढया को सरल, निगरानी को अधिक प्रभावी और एनफोर्समेंट को अधिक पारदर्शी बना रहे हैं। यह प्लेटफॉर्म सुनिश्चित करेगा कि प्रत्येक निर्माण एजेंसी स्वच्छ और प्रदूषण-मुक्त दिल्ली के निर्माण में सािढय भागीदार बने। भविष्य में चालान प्रािढया को भी पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है ताकि पोर्टल के माध्यम से सीधे नोटिस और चालान जारी किए जा सकें तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता या असुविधा की संभावना समाप्त हो सके। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार पर्यावरण संरक्षण के लिए नवाचार और तकनीक आधारित समाधानों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार का लक्ष्य दिल्ली को दुनिया की सबसे स्वच्छ, हरित और पर्यावरण के प्रति उत्तरदायी राजधानियों में शामिल करना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जवाबदेही, पारदर्शिता और जनभागीदारी को मजबूत करने वाली प्रत्येक तकनीकी पहल दिल्ली को इस लक्ष्य के और करीब ले जाएगी।
दिल्ली सरकार के आंकड़ों के अनुसार, सड़क, मिट्टी और निर्माण गतिविधियों से उत्पन्न धूल राजधानी के वायु प्रदूषण का एक बड़ा कारण है। ग्रीष्म ऋतु में कुल वायु प्रदूषण में इसकी हिस्सेदारी लगभग 27 प्रतिशत और शीत ऋतु में 15 प्रतिशत तक रहती है। वहीं, पीएम-10 उत्सर्जन में धूल की हिस्सेदारी 66 प्रतिशत और पीएम-2.5 उत्सर्जन में लगभग 38 प्रतिशत है। इसी चुनौती से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए डस्ट पोर्टल 2.0 विकसित किया गया है। डस्ट पोर्टल 2.0 में जीआईएस मैपिंग, लाइव 360 डिग्री पीटीजेड कैमरे, पीएम-10 और पीएम-2.5 सेंसर, रियल-टाइम एनालिटिक्स और एआई आधारित मॉनिटरिंग जैसी अत्याधुनिक तकनीकों को शामिल किया गया है। यह पोर्टल निर्माण स्थलों की सटीक मैपिंग करेगा और धूल नियंत्रण से जुड़े पांच प्रमुख मानकों का स्वत मूल्यांकन करेगा, जिससे निगरानी अधिक निष्पक्ष, पारदर्शी और एकरूप होगी। साथ ही, यह निर्माण स्थलों के निकटतम एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन (एक्यूएमएस) की पहचान कर साइट-स्तरीय डेटा का विश्लेषण करेगा।
प्रदूषण का स्तर बढ़ते ही सिस्टम स्वत येलो, ऑरेंज और रेड अलर्ट जारी करेगा ताकि संबंधित एजेंसियां समय रहते आवश्यक कार्रवाई कर सकें। पोर्टल के माध्यम से अनुपालन प्रमाणपत्र जारी करने और नियमों के उल्लंघन पर एनफोर्समेंट नोटिस स्वत जारी करने की सुविधा भी उपलब्ध होगी, जिससे कागजी कार्यवाही कम होगी और कार्रवाई की गति तेज होगी। इसके अलावा, जिला-वार निगरानी, प्रदूषण के रुझानों और हॉटस्पॉट विश्लेषण के लिए व्यापक डैशबोर्ड उपलब्ध कराया गया है, जिससे सरकार और संबंधित विभाग डेटा-आधारित निर्णय ले सकेंगे। डस्ट पोर्टल 2.0 का एंड्रॉइड और आईओएस आधारित मोबाइल एप्लिकेशन भी विकसित किया गया है, जिससे डीपीसीसी अधिकारियों, शहरी स्थानीय निकायों और परियोजना संचालकों को कहीं से भी निगरानी और अनुपालन सुनिश्चित करने में सुविधा मिलेगी। लाइव कैमरा फीड, सेंसर डेटा और एआई आधारित विश्लेषण के माध्यम से यह पोर्टल पारदर्शिता और जवाबदेही को और अधिक मजबूत बनाएगा। डस्ट पोर्टल 2.0 के जरिए दिल्ली में पंजीकृत सभी निर्माण स्थलों की एक ही मंच से निगरानी की जाएगी। इस पोर्टल पर चल रही और पूरी हो चुकी परियोजनाओं की जानकारी, ऑडिट रिपोर्ट, सेंसर से मिलने वाला डेटा और नियमों के पालन से जुड़ी सभी सूचनाएं उपलब्ध होंगी। इससे निर्माण कार्यों की निगरानी आसान होगी, डेटा का बेहतर प्रबंधन हो सकेगा और पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित किया जा सकेगा। यह एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म दिल्ली को अधिक स्वच्छ और प्रदूषण-मुक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। दिल्ली सरकार वायु प्रदूषण को कम करने के लिए कई स्तरों पर काम कर रही है। इसके तहत निर्माण कार्यों के लिए सख्त नियम लागू किए जा रहे हैं, हरित क्षेत्र बढ़ाए जा रहे हैं, स्वच्छ तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है, वैज्ञानिक तरीके से प्रदूषण की निगरानी की जा रही है और लोगों की भागीदारी के साथ विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया जा रहा है। डस्ट पोर्टल 2.0 इस पूरी व्यवस्था को और मजबूत करेगा तथा दिल्ली को स्वच्छ, हरित और टिकाऊ भविष्य की ओर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस अवसर पर पर्यावरण मंत्री सरदार मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि निर्माण एवं विध्वंस गतिविधियों से उत्पन्न धूल दिल्ली में वायु प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों में से एक है। डस्ट पोर्टल 2.0 के माध्यम से पहली बार 500 वर्ग गज या उससे बड़े सभी निर्माण स्थलों की एआई आधारित निगरानी की जाएगी। यह अत्याधुनिक प्रणाली 360 डिग्री कैमरों, सेंसर, जीआईएस और रियल-टाइम डेटा के माध्यम से धूल नियंत्रण उपायों की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करेगी। अब तक निर्माण स्थलों की निगरानी मुख्यत मैनुअल प्रािढयाओं पर आधारित थी, जिनमें कई कमियां थीं। नई एआई आधारित व्यवस्था से नियमों के पालन की वास्तविक समय में निगरानी होगी, उल्लंघन होने पर तत्काल अलर्ट जारी होंगे और बार-बार नियम तोड़ने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। इससे पूरी प्रािढया अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी बनेगी।
पर्यावरण मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता के मार्गदर्शन में पिछले एक वर्ष से डस्ट पोर्टल 2.0 के विकास पर लगातार कार्य किया गया। यह पोर्टल एआई, रियल-टाइम रिपोर्टिंग और डिजिटल सत्यापन को एकीकृत कर धूल प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था में एक नया मानक स्थापित करेगा और पर्यावरणीय प्रवर्तन प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाएगा। दिल्ली सरकार स्वच्छ हवा और हरित भविष्य के लिए नई ईवी नीति, सार्वजनिक परिवहन को सशक्त बनाने, 70 लाख पौधों के मेगा वृक्षारोपण अभियान तथा अन्य पर्यावरणीय पहलों पर निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि डस्ट पोर्टल 2.0 दिल्ली को स्वच्छ, स्वस्थ और प्रदूषण-मुक्त राजधानी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरगामी कदम सिद्ध होगा।
नई दिल्ली। दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता ने सोमवार को एआई-संचालित ‘डस्ट पोर्टल 2.0' - डस्ट पॉल्यूशन कंट्रोल सेल्फ-असेसमेंट वेब पोर्टल और मोबाइल एप्लिकेशन का शुभारंभ किया। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) की ओर से विकसित यह अत्याधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म एआई की सहायता से निर्माण एवं विध्वंस स्थलों पर धूल नियंत्रण उपायों की वास्तविक समय में निगरानी करेगा। इसके माध्यम से परियोजना संचालकों को स्व-मूल्यांकन की सुविधा मिलेगी और डेटा आधारित निगरानी और एनफोर्समेंट को और अधिक सशक्त बनाया जाएगा।
इस अवसर पर दिल्ली के पर्यावरण मंत्री सरदार मनजिंदर सिंह सिरसा सहित संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। कार्पाम के दौरान डस्ट पोर्टल 2.0 का लाइव प्रदर्शन भी किया गया, जिसमें दिखाया गया कि किस प्रकार एआई निगरानी व्यवस्था को अधिक कुशल, सटीक और प्रभावी बना सकती है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली में वायु प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई केवल सख्त नियमों से नहीं, बल्कि आधुनिक और स्मार्ट प्रशासनिक प्रणालियों से भी लड़ी जाएगी। डस्ट पोर्टल 2.0 निर्माण स्थलों पर धूल प्रदूषण की निगरानी और प्रबंधन की प्रािढया में एक महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आएगा। उन्होंने कहा कि एआई और डिजिटल तकनीक के माध्यम से हमारी सरकार अनुपालन प्रािढया को सरल, निगरानी को अधिक प्रभावी और एनफोर्समेंट को अधिक पारदर्शी बना रहे हैं। यह प्लेटफॉर्म सुनिश्चित करेगा कि प्रत्येक निर्माण एजेंसी स्वच्छ और प्रदूषण-मुक्त दिल्ली के निर्माण में सािढय भागीदार बने। भविष्य में चालान प्रािढया को भी पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है ताकि पोर्टल के माध्यम से सीधे नोटिस और चालान जारी किए जा सकें तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता या असुविधा की संभावना समाप्त हो सके। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार पर्यावरण संरक्षण के लिए नवाचार और तकनीक आधारित समाधानों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार का लक्ष्य दिल्ली को दुनिया की सबसे स्वच्छ, हरित और पर्यावरण के प्रति उत्तरदायी राजधानियों में शामिल करना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जवाबदेही, पारदर्शिता और जनभागीदारी को मजबूत करने वाली प्रत्येक तकनीकी पहल दिल्ली को इस लक्ष्य के और करीब ले जाएगी।
दिल्ली सरकार के आंकड़ों के अनुसार, सड़क, मिट्टी और निर्माण गतिविधियों से उत्पन्न धूल राजधानी के वायु प्रदूषण का एक बड़ा कारण है। ग्रीष्म ऋतु में कुल वायु प्रदूषण में इसकी हिस्सेदारी लगभग 27 प्रतिशत और शीत ऋतु में 15 प्रतिशत तक रहती है। वहीं, पीएम-10 उत्सर्जन में धूल की हिस्सेदारी 66 प्रतिशत और पीएम-2.5 उत्सर्जन में लगभग 38 प्रतिशत है। इसी चुनौती से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए डस्ट पोर्टल 2.0 विकसित किया गया है। डस्ट पोर्टल 2.0 में जीआईएस मैपिंग, लाइव 360 डिग्री पीटीजेड कैमरे, पीएम-10 और पीएम-2.5 सेंसर, रियल-टाइम एनालिटिक्स और एआई आधारित मॉनिटरिंग जैसी अत्याधुनिक तकनीकों को शामिल किया गया है। यह पोर्टल निर्माण स्थलों की सटीक मैपिंग करेगा और धूल नियंत्रण से जुड़े पांच प्रमुख मानकों का स्वत मूल्यांकन करेगा, जिससे निगरानी अधिक निष्पक्ष, पारदर्शी और एकरूप होगी। साथ ही, यह निर्माण स्थलों के निकटतम एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन (एक्यूएमएस) की पहचान कर साइट-स्तरीय डेटा का विश्लेषण करेगा।
प्रदूषण का स्तर बढ़ते ही सिस्टम स्वत येलो, ऑरेंज और रेड अलर्ट जारी करेगा ताकि संबंधित एजेंसियां समय रहते आवश्यक कार्रवाई कर सकें। पोर्टल के माध्यम से अनुपालन प्रमाणपत्र जारी करने और नियमों के उल्लंघन पर एनफोर्समेंट नोटिस स्वत जारी करने की सुविधा भी उपलब्ध होगी, जिससे कागजी कार्यवाही कम होगी और कार्रवाई की गति तेज होगी। इसके अलावा, जिला-वार निगरानी, प्रदूषण के रुझानों और हॉटस्पॉट विश्लेषण के लिए व्यापक डैशबोर्ड उपलब्ध कराया गया है, जिससे सरकार और संबंधित विभाग डेटा-आधारित निर्णय ले सकेंगे। डस्ट पोर्टल 2.0 का एंड्रॉइड और आईओएस आधारित मोबाइल एप्लिकेशन भी विकसित किया गया है, जिससे डीपीसीसी अधिकारियों, शहरी स्थानीय निकायों और परियोजना संचालकों को कहीं से भी निगरानी और अनुपालन सुनिश्चित करने में सुविधा मिलेगी। लाइव कैमरा फीड, सेंसर डेटा और एआई आधारित विश्लेषण के माध्यम से यह पोर्टल पारदर्शिता और जवाबदेही को और अधिक मजबूत बनाएगा। डस्ट पोर्टल 2.0 के जरिए दिल्ली में पंजीकृत सभी निर्माण स्थलों की एक ही मंच से निगरानी की जाएगी। इस पोर्टल पर चल रही और पूरी हो चुकी परियोजनाओं की जानकारी, ऑडिट रिपोर्ट, सेंसर से मिलने वाला डेटा और नियमों के पालन से जुड़ी सभी सूचनाएं उपलब्ध होंगी। इससे निर्माण कार्यों की निगरानी आसान होगी, डेटा का बेहतर प्रबंधन हो सकेगा और पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित किया जा सकेगा। यह एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म दिल्ली को अधिक स्वच्छ और प्रदूषण-मुक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। दिल्ली सरकार वायु प्रदूषण को कम करने के लिए कई स्तरों पर काम कर रही है। इसके तहत निर्माण कार्यों के लिए सख्त नियम लागू किए जा रहे हैं, हरित क्षेत्र बढ़ाए जा रहे हैं, स्वच्छ तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है, वैज्ञानिक तरीके से प्रदूषण की निगरानी की जा रही है और लोगों की भागीदारी के साथ विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया जा रहा है। डस्ट पोर्टल 2.0 इस पूरी व्यवस्था को और मजबूत करेगा तथा दिल्ली को स्वच्छ, हरित और टिकाऊ भविष्य की ओर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस अवसर पर पर्यावरण मंत्री सरदार मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि निर्माण एवं विध्वंस गतिविधियों से उत्पन्न धूल दिल्ली में वायु प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों में से एक है। डस्ट पोर्टल 2.0 के माध्यम से पहली बार 500 वर्ग गज या उससे बड़े सभी निर्माण स्थलों की एआई आधारित निगरानी की जाएगी। यह अत्याधुनिक प्रणाली 360 डिग्री कैमरों, सेंसर, जीआईएस और रियल-टाइम डेटा के माध्यम से धूल नियंत्रण उपायों की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करेगी। अब तक निर्माण स्थलों की निगरानी मुख्यत मैनुअल प्रािढयाओं पर आधारित थी, जिनमें कई कमियां थीं। नई एआई आधारित व्यवस्था से नियमों के पालन की वास्तविक समय में निगरानी होगी, उल्लंघन होने पर तत्काल अलर्ट जारी होंगे और बार-बार नियम तोड़ने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। इससे पूरी प्रािढया अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी बनेगी।
पर्यावरण मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता के मार्गदर्शन में पिछले एक वर्ष से डस्ट पोर्टल 2.0 के विकास पर लगातार कार्य किया गया। यह पोर्टल एआई, रियल-टाइम रिपोर्टिंग और डिजिटल सत्यापन को एकीकृत कर धूल प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था में एक नया मानक स्थापित करेगा और पर्यावरणीय प्रवर्तन प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाएगा। दिल्ली सरकार स्वच्छ हवा और हरित भविष्य के लिए नई ईवी नीति, सार्वजनिक परिवहन को सशक्त बनाने, 70 लाख पौधों के मेगा वृक्षारोपण अभियान तथा अन्य पर्यावरणीय पहलों पर निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि डस्ट पोर्टल 2.0 दिल्ली को स्वच्छ, स्वस्थ और प्रदूषण-मुक्त राजधानी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरगामी कदम सिद्ध होगा।