Oracle में बड़े पैमाने पर छंटनी पर सियासी बवाल, हजारों कर्मचारियों के भविष्य को लेकर केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग
प्रकाशित: 04-04-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
अमेरिकी टेक कंपनी Oracle में हाल ही में हुई बड़े पैमाने की छंटनी अब एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बन गई है। यह मामला अब सीधे केंद्र सरकार तक पहुंच चुका है, जहां श्रमिकों के अधिकार और कॉरपोरेट जिम्मेदारी पर सवाल उठने लगे हैं।
Rajararam Singh ने केंद्रीय श्रम मंत्री Mansukh Mandaviya को पत्र लिखकर इस पूरे मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने बिना पूर्व सूचना हजारों कर्मचारियों को नौकरी से निकालने पर गंभीर चिंता जताई है।
पत्र में कहा गया है कि भारत में काम कर रही विदेशी कंपनियों को सरकार की ओर से टैक्स में छूट, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और नीतिगत समर्थन मिलता है। इसके बदले उनसे रोजगार सृजन की उम्मीद की जाती है। ऐसे में अचानक बड़े स्तर पर छंटनी करना न केवल कर्मचारियों के साथ अन्याय है, बल्कि यह सामाजिक जिम्मेदारी के सिद्धांतों के भी खिलाफ है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, Oracle ने वैश्विक स्तर पर हजारों कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया है, जिसमें भारत में करीब 12,000 कर्मचारी प्रभावित बताए जा रहे हैं। यह संख्या कंपनी के भारत स्थित कुल वर्कफोर्स का एक बड़ा हिस्सा है।
सांसद ने अपने पत्र में यह भी सवाल उठाया है कि अचानक नौकरी खोने वाले इन कर्मचारियों और उनके परिवारों की आजीविका की जिम्मेदारी कौन उठाएगा। उन्होंने इसे श्रमिक अधिकारों और मानवीय गरिमा से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया।
उन्होंने सरकार से मांग की है कि कंपनी से इस छंटनी पर स्पष्ट जवाब लिया जाए, मनमाने तरीके से होने वाली सामूहिक छंटनी पर रोक लगाने के लिए सख्त नियम बनाए जाएं और कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए मजबूत प्रावधान लागू किए जाएं।
इस पूरे घटनाक्रम ने आईटी सेक्टर में नौकरी की स्थिरता को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब देखना होगा कि सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती है और क्या कंपनियों की जवाबदेही तय करने के लिए कोई ठोस नीति सामने आती है।
Rajararam Singh ने केंद्रीय श्रम मंत्री Mansukh Mandaviya को पत्र लिखकर इस पूरे मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने बिना पूर्व सूचना हजारों कर्मचारियों को नौकरी से निकालने पर गंभीर चिंता जताई है।
पत्र में कहा गया है कि भारत में काम कर रही विदेशी कंपनियों को सरकार की ओर से टैक्स में छूट, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और नीतिगत समर्थन मिलता है। इसके बदले उनसे रोजगार सृजन की उम्मीद की जाती है। ऐसे में अचानक बड़े स्तर पर छंटनी करना न केवल कर्मचारियों के साथ अन्याय है, बल्कि यह सामाजिक जिम्मेदारी के सिद्धांतों के भी खिलाफ है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, Oracle ने वैश्विक स्तर पर हजारों कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया है, जिसमें भारत में करीब 12,000 कर्मचारी प्रभावित बताए जा रहे हैं। यह संख्या कंपनी के भारत स्थित कुल वर्कफोर्स का एक बड़ा हिस्सा है।
सांसद ने अपने पत्र में यह भी सवाल उठाया है कि अचानक नौकरी खोने वाले इन कर्मचारियों और उनके परिवारों की आजीविका की जिम्मेदारी कौन उठाएगा। उन्होंने इसे श्रमिक अधिकारों और मानवीय गरिमा से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया।
उन्होंने सरकार से मांग की है कि कंपनी से इस छंटनी पर स्पष्ट जवाब लिया जाए, मनमाने तरीके से होने वाली सामूहिक छंटनी पर रोक लगाने के लिए सख्त नियम बनाए जाएं और कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए मजबूत प्रावधान लागू किए जाएं।
इस पूरे घटनाक्रम ने आईटी सेक्टर में नौकरी की स्थिरता को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब देखना होगा कि सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती है और क्या कंपनियों की जवाबदेही तय करने के लिए कोई ठोस नीति सामने आती है।