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अरविंद केजरीवाल की रिक्यूजल अर्जी खारिज होने पर मुख्यमंत्री ने साधा निशाना, बीजेपी नेताओं ने ली चुटकी

प्रकाशित: 21-04-2026 | लेखक: कृष्ण देव पाठक
अरविंद केजरीवाल की रिक्यूजल अर्जी खारिज होने पर मुख्यमंत्री ने साधा निशाना, बीजेपी नेताओं ने ली चुटकी
नई दिल्ली: मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अरविंद केजरीवाल की रिक्यूजल याचिका पर आए दिल्ली हाई कोर्ट की जज स्वर्ण कांता शर्मा के फैसले का स्वागत किया है.
मुख्यमंत्री ने इस फैसले पर अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट करके लिखा कि दिल्ली हाई कोर्ट का आज का फैसला, जो AAP नेता अरविंद केजरीवाल की उस याचिका पर आया है जिसमें उन्होंने संबंधित जज को केस से हटाने की मांग की थी, एक साफ़ और स्पष्ट संदेश देता है कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता, निष्पक्षता और गरिमा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता.
मुख्यमंत्री ने आगे लिखा है कि जनता समझदार है और वह संस्थागत अखंडता के प्रति अपनी गहरी ज़िम्मेदारी का एहसास करते हुए, इन घटनाक्रमों पर बारीकी से नज़र रखे हुए है. हम इस फ़ैसले का पूरी तरह सम्मान करते हैं और न्यायपालिका में अपने अटूट विश्वास को एक बार फिर दोहराते हैं.
सचदेवा ने केजरीवाल की टिप्पणियों को लिया आड़े हाथ
दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा ने भी न्यायधीश स्वर्णकांता शर्मा द्वारा अरविंद केजरीवाल की उनके समक्ष शराब घोटाले पर सीबीआई की अपील ना सुनने की याचिका को खारिज करने का स्वागत किया. सचदेवा ने कहा कि मैं न्यायधीश स्वर्णकांता के फैसले में कही गई हर टिपण्णी से पूरी तरह सहमत हूं और जिस तरह की निजी टिप्पणियां गत दिनों में अरविंद केजरीवाल ने की वह स्वाभाविक रूप से किसी भी न्यायधीश की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली रही हैं.


वीरेन्द्र सचदेवा ने कहा है कि जिस तरह की टिपण्णीयां अरविंद केजरीवाल ने न्यायधीश एवं उनके परिजनों के प्रति की, मैं दिल्ली वालों की ओर से अरविंद केजरीवाल से पूछना चाहता हूं कि यदि एक न्यायधीश के पुत्रों का सरकारी वकील होना गुनाह है तो क्या हम यह भी माने कि यदि किसी अपराधी का पुत्र सरकारी या निजी वकील है तो क्या उसको भी वकालत छोड़ देनी चाहिए क्योंकि केजरीवाल के तर्क से चलें तो ऐसा वकील भी अपने अपराधी अभिभावक का पक्ष ले सकता है?

वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि अरविंद केजरीवाल की समस्या यह है कि वह अधिक चतुराई वाली श्रेणी से मर्यादाएं लांघ जाते हैं और उन्हें इस बात को समझना चाहिए कि अदालतें इंसाफ का मंदिर होती है, राजनीतिक अखाड़ा नहीं. उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल ने व्यक्तिगत टिपण्णी करके एक नैरेटिव बनाने की कोशिश की जो कि गलत था, क्योंकि न्यायालय के निर्णय फैक्ट और फाइंडिंग पर होते हैं. राजनीतिक चतुराई दिखा रहे अरविंद केजरीवाल को आज न्यायलय ने उन्हें उनकी जगह दिखा दी है.
दबाव या आरोपों के आगे नहीं झुकती न्यायपालिका: सिरसा
वहीं, दिल्ली सरकार के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने भी कोर्ट के फैसले के बाद अपने एक्स हैंडल से पोस्ट कर केजरीवाल पर निशाना साधा. सिरसा ने लिखा कि दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा केजरीवाल की रिक्यूजल याचिका खारिज करना साफ संदेश है कि न्यायपालिका दबाव या आरोपों के आगे नहीं झुकती. इनको लगा कि सोशल मीडिया पर नैरेटिव बनाकर वो अदालती कार्यवाही को प्रभावित कर लेंगे, लेकिन कोर्ट ने आईना दिखा दिया. मैं इस फैसले का स्वागत करता हूँ. अपनी सफाई देने के बजाय हर किसी पर दोष मढ़ना और जज तक पर सवाल उठाना उनकी पुरानी आदत रही है. जज की इज्जत पर हमला यानी न्यायपालिका पर हमला है. सच से भागने की राजनीति ज्यादा दिन नहीं चलती. अब सच सामने आएगा और दूध का दूध, पानी का पानी हो जाएगा.
हमारी न्यायिक व्यवस्था को खराब करने की कोशिश कर रहे केजरीवाल: प्रवेश वर्मा
दिल्ली सरकार में मंत्री प्रवेश वर्मा ने कहा कि हम उच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हैं. ये केजरीवाल से ही अपेक्षा की जा सकती थी कि वे हमारी न्यायपालिका पर सवाल खड़े कर देंगे. जो व्यक्ति सेना पर सवाल खड़े करता था, जो व्यक्ति बच्चों की झूठी की कसम खाता था आज वे व्यक्ति हमारी न्यायपालिका पर सवाल कर पूरी व्यवस्था को खराब करना चाहते हैं. प्रवेश वर्मा ने आगे कहा कि हाई कोर्ट में जिस महिला जज के सामने आबकारी मामले की अपील दायर की गई है, उन्हें सही नहीं माना जा रहा है. सिर्फ इसलिए क्योंकि उन्होंने एक ऐसे कार्यक्रम में शिरकत की थी, जिसके आधार पर केजरीवाल ने उनके बारे में अपनी एक राय बना ली और अब उन्हें लगता है कि उसी राय के आधार पर वह जज उनके खिलाफ फैसला सुनाएंगी.
इसका सीधा सा मतलब यह है कि अगर हाई कोर्ट का फैसला केजरीवाल के पक्ष में आता है, तो वे कहेंगे कि फैसला बिल्कुल सही है और अगर कल हाई कोर्ट का फैसला उनके पक्ष में नहीं आता है, तो वे कहेंगे कि उन्होंने तो पहले ही कह दिया था कि यह जज सही फैसला नहीं सुनाएंगी, क्योंकि वे किसी खास विचारधारा से जुड़ी हुई हैं.