टीईटी विवाद पर शिक्षक महासंघ का देशव्यापी ज्ञापन अभियान
प्रकाशित: 19-06-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
वीर अर्जुन संवाददाता
नई दिल्ली। शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता को लेकर उत्पन्न स्थिति के बीच देश के सबसे बड़े शिक्षक संगठन अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने बुधवार को देशव्यापी ज्ञापन अभियान चलाया। संगठन के आह्वान पर देशभर के जिला मुख्यालयों में जिलाधीशों के माध्यम से प्रधानमंत्री और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की गई। दिल्ली में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की इकाई दिल्ली अध्यापक परिषद ने सभी 13 जिलों में जिलाधीशों को ज्ञापन सौंपा। संगठन का कहना है कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) की 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना तथा 29 मई 2026 को आए सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों की सेवा, वरिष्ठता, पदोन्नति और अन्य वैधानिक अधिकार प्रभावित होने की आशंका पैदा हो गई है। दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार पालीवाल ने कहा कि संगठन प्रभावित शिक्षकों के हितों की रक्षा और उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षक अपनी नियुक्ति के समय लागू नियमों और निर्धारित योग्यताओं के आधार पर सेवा में आए थे, इसलिए उनके अधिकारों को संरक्षित किया जाना चाहिए। प्रदेश महामंत्री डॉ. अजय कुमार सिंह ने बताया कि अभियान में बड़ी संख्या में शिक्षकों और कार्यकर्ताओं ने भाग लेकर अपनी एकजुटता दिखाई। ज्ञापन के माध्यम से केंद्र सरकार से स्थायी और व्यावहारिक समाधान निकालने की मांग की गई है। संगठन ने प्रमुख मांगों में 23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से स्थायी छूट देने, उनकी सेवा एवं पदोन्नति संबंधी सभी अधिकार सुरक्षित रखने तथा आवश्यकता पड़ने पर विधायी संशोधन या विशेष प्रावधान लाकर उन्हें राहत प्रदान करने की मांग की है।
नई दिल्ली। शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता को लेकर उत्पन्न स्थिति के बीच देश के सबसे बड़े शिक्षक संगठन अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने बुधवार को देशव्यापी ज्ञापन अभियान चलाया। संगठन के आह्वान पर देशभर के जिला मुख्यालयों में जिलाधीशों के माध्यम से प्रधानमंत्री और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की गई। दिल्ली में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की इकाई दिल्ली अध्यापक परिषद ने सभी 13 जिलों में जिलाधीशों को ज्ञापन सौंपा। संगठन का कहना है कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) की 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना तथा 29 मई 2026 को आए सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों की सेवा, वरिष्ठता, पदोन्नति और अन्य वैधानिक अधिकार प्रभावित होने की आशंका पैदा हो गई है। दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार पालीवाल ने कहा कि संगठन प्रभावित शिक्षकों के हितों की रक्षा और उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षक अपनी नियुक्ति के समय लागू नियमों और निर्धारित योग्यताओं के आधार पर सेवा में आए थे, इसलिए उनके अधिकारों को संरक्षित किया जाना चाहिए। प्रदेश महामंत्री डॉ. अजय कुमार सिंह ने बताया कि अभियान में बड़ी संख्या में शिक्षकों और कार्यकर्ताओं ने भाग लेकर अपनी एकजुटता दिखाई। ज्ञापन के माध्यम से केंद्र सरकार से स्थायी और व्यावहारिक समाधान निकालने की मांग की गई है। संगठन ने प्रमुख मांगों में 23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से स्थायी छूट देने, उनकी सेवा एवं पदोन्नति संबंधी सभी अधिकार सुरक्षित रखने तथा आवश्यकता पड़ने पर विधायी संशोधन या विशेष प्रावधान लाकर उन्हें राहत प्रदान करने की मांग की है।