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बिजली यूनिट यदि हुई अब 400 से पार तो फिर न करें कोई तकरार

प्रकाशित: 15-06-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
-कृष्ण देव पाठक-
नई दिल्ली। दिल्ली में चल रहे राजनीतिक घटपामों के बीच अब दिल्ली में बिजली के बड़े हुए दाम पर उपभोक्ताओं को बिल देना पड़ सकता है हालांकि सरकार ने साफ कर है की सब्सिडी वाले उपभोक्ताओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि यदि आपकी यूनिट 400 से ऊपर हो गई तो आपको मोटा बिल भुगतने के लिए तैयार रहना पड़ेगा इस मामले में लोगों का कहना है की भीषण गर्मी के मौसम में एयर कंडीशन तो छोड़ो कूलर और पंखे चलाना मजबूरी है और यह चलते हैं तो बिल 400 से ऊपर आएगा उसके बाद सरकार आंकड़ों की हवा बड़ी कुछ भी करती रहे उसका कोई फायदा नहीं है यह अपने में नई सरकार का जनता के साथ धोखा है
यह सारा विवाद उसे बात के बाद शुरू हुआ है जब इस मामले में दिल्ली इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (डीईआरसी) ने बिजली कंपनियों को पावर परचेजिंग एडजस्टमेंट चार्ज (पीपीएसी) में बढ़ोतरी की मंजूरी दे दी है। इसके तहत दरों में औसतन 2.4 फीसदी की वृद्धि की गई है। यह नई दरें 10 जून से लागू हो चुकी हैं, जिसका सीधा असर उपभोक्ताओं को जुलाई में मिलने वाले बिजली बिलों में दिखाई देगा। हालांकि दिल्ली सरकार का कहना है, इस बढ़ोतरी का असर दिल्ली के सभी उपभोक्ताओं पर एक जैसा नहीं पड़ेगा।
दिल्ली में कुल 71.54 लाख उपभोक्ताओं में से 47 लाख से अधिक लोग बिजली सब्सिडी का लाभ उठा रहे हैं। इनमें से करीब 30 से 40 लाख उपभोक्ता ऐसे हैं जो 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली योजना के तहत शून्य बिल पाते हैं। इन उपभोक्ताओं पर इस बढ़ोतरी का कोई असर नहीं होगा। वहीं, 201 से 400 यूनिट तक बिजली खर्च करने वाले लोगों को 50ज्ञ् सब्सिडी मिलती है, इसलिए उन पर भी इसका मामूली असर ही पड़ेगा। इस फैसले से सबसे बड़ा झटका उन 15 से 17 लाख उपभोक्ताओं को लगेगा जो सब्सिडी के दायरे से बाहर हैं। इस तपती गर्मी में जो लोग 400 यूनिट से अधिक बिजली की खपत कर रहे हैं, उन्हें अब भारी-भरकम बिल चुकाना होगा। इस मामले में कहा जा रहा है कि जब 400 पर के बिल आएंगे तब उसे समय आंकड़ा देखने वाला होगा सरकार सिर्फ भ्रमित करने का काम ना करें।
आदेश के मुताबिक, अलग-अलग क्षेत्रों के लिए पीपीएसी को बढ़ाकर 16फीसद, 17.43फीसद और 17.94फीसद किया गया है, जो पहले 14.5ज्ञ् तक सीमित था। ऊर्जा मंत्री आशीष सूद ने बिजली कंपनियों का बचाव करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक कारणों से ईंधन के दाम बढ़े हैं। इस वजह से बिजली खरीद लागत में 31ज्ञ् का उछाल आया है। उन्होंने दावा किया कि सरकार के प्रयासों के कारण इस भारी लागत के बावजूद जनता पर केवल 2.4फीसद का ही बोझ डाला गया है।
सरकार के तमाम तर्कों के बावजूद इस मामले में विभिन्न संगठन खुलकर विरोध कर रहे हैं और वह कह रहे हैं की सब्सिडी के नाम पर आप एक वर्ग को राहत दे सकते हैं लेकिन जो लोग आपको बिल दे रहे हैं उनको 400 के बाद आने पर आप उनके साथ कहीं ना कहीं गलत कर रहे हैं। दिल्ली नगर निगम में महत्वपूर्ण पदों पर रहे दिल्ली की राजनीति में अपनी एक बड़ी पकड़ रखने वाले जगदीश मंमगाई कहते हैं भीषण गर्मी व महंगाई से परेशान दिल्लीवासियों के लिए दिल्ली सरकार का बिजली बिल में बढ़ोतरी कर आर्थिक बोझ डालने से दिल्लीवासी सकते में हैं। लगातार बढ़ते रसोई गैस के दाम, पेट्रोल, सीएनजी, रोजमर्रा की जरुरी वस्तुओं के चलते महंगाई से त्रस्त जनता पर यह एक और बोझ है। डीईआरसी ने बिजली वितरण कंपनियों बीएसईएस राजधानी, बीएसईएस यमुना, टाटा पावर को बिजली अधिभार लगाने की अनुमति दे दी है। दिल्लीवासियों को बिजली के अधिक बिल का भुगतान करना पड़ेगा, वह भी 3 महीने पहले अप्रैल 2026 से बढ़े टैरिफ की दर वसूली जाएगी।
जबकि इससे पहले अरविंद केजरीवाल की सरकार के 10 वर्ष के कार्यकाल में बिजली दरों में बढ़ोतरी नहीं हुई, जबकि वर्ष 2015 में राजघाट बिजली स्टेशन और वर्ष 2018 में बदरपुर संयंत्र का परिचालन बंद हो गया था। यह पहली बार हुआ कि 10 वर्ष तक कोई सरकार रहे और बिजली की दरों में कोई वृद्धि न करे जबकि पूर्ववर्ती दिल्ली सरकारों के कार्यकाल में हर वर्ष बिजली कंपनियां घाटे का राग अलाप, न केवल बिजली की दरों में वृद्धि करती थी बल्कि दिल्ली सरकार से बेलआऊट पैकेज भी वसूलती थी। सीएजी की रिपोर्ट में कहा गया था कि शीला दीक्षित सरकार ने बिजली कंपनियों के साथ मिलीभगत कर उपभोक्ताओं से 8,000 करोड़ रुपये अधिक वसूल किए। केजरीवाल सरकार ने दिल्ली में 200 यूनिट तक बिजली उपयोग करने पर बिल नहीं, 200 से 400 यूनिट तक बिजली की खपत पर 50 प्रतिशत की सब्सिडी दे दिल्लीवासियों को राहत भी दी। लगभग एक दशक बिजली की आपूर्ति काफी हद तक नियमित रही, 10-15 दिन में एक बार, कम समय के लिए बिजली कटौती होती थी। उसके लिए भी केजरीवाल सरकार ने 2 घंटे से अधिक की अनियोजित बिजली कटौती के लिए वितरण कंपनियों द्वारा उपभोक्ताओं को मुआवजा देने का फैसला लिया। इसके तहत, उपभोक्ताओं को अनियोजित बिजली कटौती के पहले दो घंटों के लिए 50 रुपये प्रति घंटा दिया जाएगा। जगदीश कहते हैं
हालांकि पिछले कुछ महीनों में कई-कई घंटे बिना पूर्व घोषणा के 3-4 बार बिजली कटौती हो रही है।
दिल्ली में अचानक बिजली कटौती, अनियमितता गंभीर समस्या क्यों बन गई है जिसका निवासियों के दैनिक जीवन और आराम पर गहरा असर पड़ रहा है। बच्चों की पढ़ाई, परीक्षा और गृहकार्य प्रभावित होते हैं। पानी पहली मंजिल पर भी नहीं चढ़ता, मोटर से चढ़ाना पड़ता है, बिजली न होने से पानी का भी संकट होता है। बिजली संकट बहुत ज्यादा होने लगा है, दिल्ली सरकार बिजली संकट से निपटने में असफल नज़र आ रही है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता सरकार ने जता दिया है कि राजधानी में मुफ्त, सस्ती बिजली के दिन अब ख़त्म हो गए हैं।
दिल्ली की गर्मी पहले से ही चरम पर है, और आपके कूलर, एयर कंडीशनर पूरे जोरों पर चल रहे हैं लिहाजा वृद्धि खासा असर डालेगी। बिजली दर बढ़ने से व्यापारियों, उद्योगों पर असर पड़ेगा जिसका भार दिल्लीवासियों को ही उठाना पड़ेगा। अस्पताल, स्कूल, होटल सहित विभिन्न संस्थानों को दिल्लीवासियों को और अधिक लूटने का मौका मिलेगा। दिल्ली सरकार को उपभोक्ताओं पर प्रभाव को कम करने के लिए बिजली दरों में बढ़ोतरी पर सब्सिडी देनी चाहिए। अगर 60 हजार करोड़ के बजट में आम आदमी पार्टी सरकार मुफ्त बिजली व सब्सडी दे सकती है तो एक लाख करोड़ से अधिक के बजट होते हुए बिजली की दरें बढ़ाने की जगह सब्सिडी क्यों नहीं बढ़ा रही
इस विषय में माना जा रहा है कि यह मामला आने वाले दिनों में दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार के लिए एक बड़ा ही चुनौती वाला विषय बन सकता है क्योंकि इस मामले में सरकार की सफाई लोगों के गले से नहीं उतर रही है ।