तकनीकी से नियंत्रण
प्रकाशित: 24-05-2026 | लेखक: सदानंद पांडे
सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की ओर से आयोजित वार्षिक रुस्तम जी व्याख्यानमाला के दौरान केन्द्राrय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि सरकार तकनीक, ड्रोन, राडार और स्मार्ट कैमरों का इस्तेमाल करके पाकिस्तान और बांग्लादेश की सीमाओं पर एक मजबूत सुरक्षा जाल तैयार करेगी।
दरअसल भारत की पाकिस्तान और बांग्लादेश से 6000 किमी से ज्यादा लम्बी सीमा है जहां से घुसपैठ की संभावना हमेशा बनी रहती है। पाकिस्तान से लगी सीमा पर तो ज्यादातर क्षेत्रों की बाड़बन्दी हो चुकी है लेकिन पाक आतंकी तार के नीचे से लम्बी सुरंग बनाकर भारत की सीमा में घुस जाते हैं। इसी तरह बांग्लादेश से लगी 4096 किमी की सीमा में जंगलों के रास्ते घुसपैठिए घुसपैठ कर असम, पश्चिम बंगाल, मिजोरम, त्रिपुरा, मेघालय में घुस आते हैं। इस तरह के घुसपैठ को रोकने के लिए केन्द्राrय गृह मंत्रालय ने ‘स्मार्ट बार्डर ग्रिड' परियोजना का प्रस्ताव किया जो वर्तमान में चल रही ‘व्यापक एकीकृत बार्डर प्रबंधन प्रणाली' यानि सीआईबीएमएस प्रणाली पर आधारित हो सकता है।
सच तो यह है कि पाकिस्तान और बांग्लादेश के जो भी नागरिक भारत में अवैध रूप से प्रवेश करते हैं उनकी पहले से ही भारत के अन्दर किसी निजी एजेंसी या अवैध गिरोह से संपर्क होता है। ऐसे गिरोह भारत के अन्दर प्रवेश कराने फजी राशन कार्ड, आधार कार्ड और वोटर आईडी कार्ड बनवाने की जिम्मेदारी निभाते हैं। फिर उन्हें सरकारी जमीन पर कब्जा करके अपना ठिकाना बनाने की भी सुविधा मिल जाया करती थी। असम में सीमा की निगरानी में बीएसएफ लगी है। इसके द्वारा निगरानी की सीआईबीएमएस योजना को लागू करने में राज्य सरकार ने पूरा सहयोग किया किन्तु पश्चिम बंगाल सरकार ने इस परियोजना को लागू होने ही नहीं दिया। अब नई सरकार इस परियोजना को पूरी तरह लागू करने के लिए कृतसंकल्प है। पाकिस्तान से लगी 3323 किमी सीमा पर यह प्रणाली गुजरात, राजस्थान, पंजाब और जम्मू-कश्मीर से लगती सीमा पर पूरी तरह लागू है। इन सभी राज्यों में सरकार किसी भी पाटी की हो राज्य सरकारों से बीएसएफ को पूरा सहयोग मिलता है।
बांग्लादेश में घुसपैठ कराने के लिए बहुत सारे निजी कारोबारी सक्रिय हैं और वे अपनी फीस वसूल कर घुसपैठियों को भारत में भेजते रहे हैं। किन्तु जबसे उन्हें पता चला है कि बाड़ लगे तारों में बिजली का सिस्टम लगाने की तैयारी चल रही है, ये घुसपैठ गैंग परेशान है। उन्हें अपना व्यवसाय डूबता हुआ नजर आ रहा है। मजे की बात तो यह है कि पाक के घुसपैठिए भारत में हिंसा फैलाने के लिए आते हैं जिन्हें सैन्य खुफिया एजेंसी आईएसआई के निर्देश पर वहां के आतंकी संगठन भेजते हैं और इसके लिए पूरा खर्च वे आईएसआई और केन्द्र सरकार से वसूलते हैं। जब कि बांग्लादेश के घुसपैठिए रोजी-रोटी कमाने के लिए भारत के सीमा में घुसते हैं। भारत के अन्दर तमाम संगठन ऐसा मानते हैं कि बांग्लादेश से आने वाले जरूरतमंद लोग यदि भारतीय क्षेत्र में आते हैं तो उन्हें रोकना नहीं चाहिए। ऐसे लोगों के दृष्टिकोण भारत के नागरिकों के हितों के सर्वथा प्रतिकूल हैं। बांग्लादेशियों के भारत में घुसपैठ का दबाव हमारी अर्थव्यवस्था पर बहुत ही घातक साबित हुआ है। यही नहीं ये बांग्लादेशी घुसपैठिए भारत के शहरों में लूटपाट, डकैती, हिंसा जैसे अपराधों में वृद्धि करते हैं। यह भी सच है कि बांग्लादेशी घुसपैठिए जनसंख्या विस्फोट के लिए भी कुख्यात हैं।
बहरहाल अब यदि सरकार नवीनतम टेक्नोलॉजी के माध्यम से घुसपैठ को रोकने की तरकीब विकसित कर रही है तो निश्चित रूप से राष्ट्र विरोधी इस गतिविधि पर रोक लगाई जा सकती है। गृहमंत्री अमित शाह ने जरूरत के मुताबिक नक्सलियों के संहार के लिए जो भी सिस्टम विकसित किया उसका लाभ सीआरपीएफ के जवानों को मिला और उन्होंने नक्सल को समाप्त या बहुत हद तक नियंत्रित कर दिया है। इसी तरह यदि घुसपैठ नियंत्रण के लिए गृहमंत्री की परियोजनाएं सफलतापूर्वक लागू कर दी गई तो निश्चित रूप से घुसपैठ करने वाले चाहे पाकिस्तानी हों या फिर बांग्लादेश के, हजार बार सोचेंगे।
दरअसल भारत की पाकिस्तान और बांग्लादेश से 6000 किमी से ज्यादा लम्बी सीमा है जहां से घुसपैठ की संभावना हमेशा बनी रहती है। पाकिस्तान से लगी सीमा पर तो ज्यादातर क्षेत्रों की बाड़बन्दी हो चुकी है लेकिन पाक आतंकी तार के नीचे से लम्बी सुरंग बनाकर भारत की सीमा में घुस जाते हैं। इसी तरह बांग्लादेश से लगी 4096 किमी की सीमा में जंगलों के रास्ते घुसपैठिए घुसपैठ कर असम, पश्चिम बंगाल, मिजोरम, त्रिपुरा, मेघालय में घुस आते हैं। इस तरह के घुसपैठ को रोकने के लिए केन्द्राrय गृह मंत्रालय ने ‘स्मार्ट बार्डर ग्रिड' परियोजना का प्रस्ताव किया जो वर्तमान में चल रही ‘व्यापक एकीकृत बार्डर प्रबंधन प्रणाली' यानि सीआईबीएमएस प्रणाली पर आधारित हो सकता है।
सच तो यह है कि पाकिस्तान और बांग्लादेश के जो भी नागरिक भारत में अवैध रूप से प्रवेश करते हैं उनकी पहले से ही भारत के अन्दर किसी निजी एजेंसी या अवैध गिरोह से संपर्क होता है। ऐसे गिरोह भारत के अन्दर प्रवेश कराने फजी राशन कार्ड, आधार कार्ड और वोटर आईडी कार्ड बनवाने की जिम्मेदारी निभाते हैं। फिर उन्हें सरकारी जमीन पर कब्जा करके अपना ठिकाना बनाने की भी सुविधा मिल जाया करती थी। असम में सीमा की निगरानी में बीएसएफ लगी है। इसके द्वारा निगरानी की सीआईबीएमएस योजना को लागू करने में राज्य सरकार ने पूरा सहयोग किया किन्तु पश्चिम बंगाल सरकार ने इस परियोजना को लागू होने ही नहीं दिया। अब नई सरकार इस परियोजना को पूरी तरह लागू करने के लिए कृतसंकल्प है। पाकिस्तान से लगी 3323 किमी सीमा पर यह प्रणाली गुजरात, राजस्थान, पंजाब और जम्मू-कश्मीर से लगती सीमा पर पूरी तरह लागू है। इन सभी राज्यों में सरकार किसी भी पाटी की हो राज्य सरकारों से बीएसएफ को पूरा सहयोग मिलता है।
बांग्लादेश में घुसपैठ कराने के लिए बहुत सारे निजी कारोबारी सक्रिय हैं और वे अपनी फीस वसूल कर घुसपैठियों को भारत में भेजते रहे हैं। किन्तु जबसे उन्हें पता चला है कि बाड़ लगे तारों में बिजली का सिस्टम लगाने की तैयारी चल रही है, ये घुसपैठ गैंग परेशान है। उन्हें अपना व्यवसाय डूबता हुआ नजर आ रहा है। मजे की बात तो यह है कि पाक के घुसपैठिए भारत में हिंसा फैलाने के लिए आते हैं जिन्हें सैन्य खुफिया एजेंसी आईएसआई के निर्देश पर वहां के आतंकी संगठन भेजते हैं और इसके लिए पूरा खर्च वे आईएसआई और केन्द्र सरकार से वसूलते हैं। जब कि बांग्लादेश के घुसपैठिए रोजी-रोटी कमाने के लिए भारत के सीमा में घुसते हैं। भारत के अन्दर तमाम संगठन ऐसा मानते हैं कि बांग्लादेश से आने वाले जरूरतमंद लोग यदि भारतीय क्षेत्र में आते हैं तो उन्हें रोकना नहीं चाहिए। ऐसे लोगों के दृष्टिकोण भारत के नागरिकों के हितों के सर्वथा प्रतिकूल हैं। बांग्लादेशियों के भारत में घुसपैठ का दबाव हमारी अर्थव्यवस्था पर बहुत ही घातक साबित हुआ है। यही नहीं ये बांग्लादेशी घुसपैठिए भारत के शहरों में लूटपाट, डकैती, हिंसा जैसे अपराधों में वृद्धि करते हैं। यह भी सच है कि बांग्लादेशी घुसपैठिए जनसंख्या विस्फोट के लिए भी कुख्यात हैं।
बहरहाल अब यदि सरकार नवीनतम टेक्नोलॉजी के माध्यम से घुसपैठ को रोकने की तरकीब विकसित कर रही है तो निश्चित रूप से राष्ट्र विरोधी इस गतिविधि पर रोक लगाई जा सकती है। गृहमंत्री अमित शाह ने जरूरत के मुताबिक नक्सलियों के संहार के लिए जो भी सिस्टम विकसित किया उसका लाभ सीआरपीएफ के जवानों को मिला और उन्होंने नक्सल को समाप्त या बहुत हद तक नियंत्रित कर दिया है। इसी तरह यदि घुसपैठ नियंत्रण के लिए गृहमंत्री की परियोजनाएं सफलतापूर्वक लागू कर दी गई तो निश्चित रूप से घुसपैठ करने वाले चाहे पाकिस्तानी हों या फिर बांग्लादेश के, हजार बार सोचेंगे।