पाक की धूर्तता
प्रकाशित: 01-05-2026 | लेखक: सदानंद पांडे
पाक की धूर्तता पाकिस्तान अमेरिका और ईंरान के बीच मध्यस्थता की भूमिका निभाने का अभिनय तो कर ही रहा है साथ ही वह अमेरिका के होर्मुज समुद्री मार्ग में ईंरान की नाकेबंदी से बचने के लिए तेहरान को 6 रास्ते दे दिए हैं ताकि वह अपना कच्चा तेल रूस और चीन को निर्बाध आपूर्ति कर सके। अब यदि ईंरान के टैंकरों को अमेरिका की नाकेबन्दी का विकल्प मिल जाए तो भला ईंरान क्यों झुकेगा। वह तो अमेरिकी दबाव का तमाशा बनाते हुए अपने तेल का निर्यांत करेगा।
दरअसल पाकिस्तान के कपटपूर्ण मैत्री का भण्डाफोड़ अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञ डेरेक जी ग्रासमैन ने किया है। उन्होंने अमेरिका के ट्रंप प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि ईंरान को जमीन के रास्ते मार्ग उपलब्ध कराकर पाकिस्तान ट्रंप की ‘‘अधिकतम दबाव’’ वाली रणनीति को कमजोर कर रहा है।
ग्रासमैन ने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट लिखा ‘‘ट्रंप प्रशासन आपके सामने एक समस्या है। आपका अच्छा दोस्त पाकिस्तान, ऐसा लगता है कि उसने अभी-अभी ईंरान के लिए जमीन के रास्ते 6 मार्ग खोल दिए हैं। इससे ईंरान की सरकार को होर्मुज में आपकी नाकेबंदी से बचने में मदद मिलेगी। इससे ईंरान को अमेरिकी दबाव का सामना करते रहने में मदद मिलेगी। इस्लामाबाद एक बार फिर अमेरिका के साथ दोहरा खेल खेल रहा है।’’ पाकिस्तान को इस बात की कभी कोईं परवाह नहीं रही कि उसे विश्व बिरादरी में किस दृष्टि से देख जा रहा है। एक तरफ वह ईंरान के तेलों को चीन और रूस तक पहुंचाने के लिए अमेरिकी नाकेबन्दी को नाकाम करने मेंे जुटा है तो दूसरी तरफ ईंरान के दशतेस्तान क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले एवं ईंरान के राष्ट्रीय सुरक्षा एवं विदेश नीति आयोग के प्रवक्ता ईंब्राहिम रजाईं ने एक तरफ तो इस्लामाबाद को अच्छा दोस्त बताया है लेकिन साथ ही इस बात पर भी जोर दिया है कि ‘‘वह मध्यस्थ के तौर पर उपयुक्त नहीं है।’’ रजाईं ने यह खुलेआम आरोप लगाया कि पाकिस्तान पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाता है और अमेरिकी हितों को ज्यादा तरजीह देता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सुरक्षा विशेषज्ञ ग्रासमैन पाकिस्तान के इस दोहरे खेल को जान सकते हैं तो क्या अमेरिकी सीव्रेट एजेंसी इस वास्तविकता से अनिभिज्ञ है? कदापि नहीं, अमेरिका को ईंरान एवं खाड़ी देशों में क्या हो रहा है, इसकी जानकारी सीव्रेट एजेंसियां विस्तार से उपलब्ध कराती हैं। इस वक्त तो अमेरिका इतना घबराया हुआ है कि वह अपनी इज्जत बचाने के लिए सब वुछ करने को तैयार है जिसकी उसे कीमत न चुकानी पड़े क्योंकि अमेरिका को इस बात का एहसास हो चुका है कि जो दोस्त उन्होंने पाकिस्तान के रूप में चुना है, वह ‘मक्कारी’ का मास्टर माना जाता है।
उसने अमेरिका से अफगानिस्तान में सोवियत सेना के खिलाफ लड़ने के नाम पर करोड़ों डालर ऐंठ लिया किन्तु उस वक्त उसने तालिबानी संगठनों को यह कहकर हथियार आपूर्ति नहीं की कि पाकिस्तान आमी तो अमेरिकी हथियारों को चलाने में काफी माहिर है। किन्तु तालिबानियों को इसकी कोईं जानकारी नहीं है। पाकिस्तान के राष्ट्रपति जिया उल हक हथियारों के लिए जो अमेरिका से राशि लेता था उससे तो वह अपनी सेना को मजबूत करता था जबकि अमेरिका से भी धन भी ऐंठता था और एहसान भी जताता था कि उसने तो मुस्लिम देश के खिलाफ ही अपनी सेना भेजी है। इस तरह वह अमेरिका के लिए मीठा भी बना रहा तो वहीं दूसरी तरफ उसी को धोखा भी देता रहा। 2016 में ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान की कपटपूर्ण वूटनीति को समझकर उसको दिए जाने वाले सारे अनुदानों को बन्द कर दिया था। किन्तु दोबारा सत्ता में आते ही राष्ट्रपति ट्रंप पर फिर पाकिस्तान प्रेम का बुखार चढ़ा। अब जब खुद उन्हीं के देश को अपनी पूंछ में लगी आग को बुझाने की चुनौती खड़ी है तो वह उस पाकिस्तान पर आंख मूंदकर भरोसा करते दिखे जो आदतन दोहरे चरित्र का देश है और इसके नेता आदतन झूठे और व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए मित्रता की सौदेबाजी करने के लिए वुख्यात हैं।
दरअसल पाकिस्तान के कपटपूर्ण मैत्री का भण्डाफोड़ अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञ डेरेक जी ग्रासमैन ने किया है। उन्होंने अमेरिका के ट्रंप प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि ईंरान को जमीन के रास्ते मार्ग उपलब्ध कराकर पाकिस्तान ट्रंप की ‘‘अधिकतम दबाव’’ वाली रणनीति को कमजोर कर रहा है।
ग्रासमैन ने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट लिखा ‘‘ट्रंप प्रशासन आपके सामने एक समस्या है। आपका अच्छा दोस्त पाकिस्तान, ऐसा लगता है कि उसने अभी-अभी ईंरान के लिए जमीन के रास्ते 6 मार्ग खोल दिए हैं। इससे ईंरान की सरकार को होर्मुज में आपकी नाकेबंदी से बचने में मदद मिलेगी। इससे ईंरान को अमेरिकी दबाव का सामना करते रहने में मदद मिलेगी। इस्लामाबाद एक बार फिर अमेरिका के साथ दोहरा खेल खेल रहा है।’’ पाकिस्तान को इस बात की कभी कोईं परवाह नहीं रही कि उसे विश्व बिरादरी में किस दृष्टि से देख जा रहा है। एक तरफ वह ईंरान के तेलों को चीन और रूस तक पहुंचाने के लिए अमेरिकी नाकेबन्दी को नाकाम करने मेंे जुटा है तो दूसरी तरफ ईंरान के दशतेस्तान क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले एवं ईंरान के राष्ट्रीय सुरक्षा एवं विदेश नीति आयोग के प्रवक्ता ईंब्राहिम रजाईं ने एक तरफ तो इस्लामाबाद को अच्छा दोस्त बताया है लेकिन साथ ही इस बात पर भी जोर दिया है कि ‘‘वह मध्यस्थ के तौर पर उपयुक्त नहीं है।’’ रजाईं ने यह खुलेआम आरोप लगाया कि पाकिस्तान पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाता है और अमेरिकी हितों को ज्यादा तरजीह देता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सुरक्षा विशेषज्ञ ग्रासमैन पाकिस्तान के इस दोहरे खेल को जान सकते हैं तो क्या अमेरिकी सीव्रेट एजेंसी इस वास्तविकता से अनिभिज्ञ है? कदापि नहीं, अमेरिका को ईंरान एवं खाड़ी देशों में क्या हो रहा है, इसकी जानकारी सीव्रेट एजेंसियां विस्तार से उपलब्ध कराती हैं। इस वक्त तो अमेरिका इतना घबराया हुआ है कि वह अपनी इज्जत बचाने के लिए सब वुछ करने को तैयार है जिसकी उसे कीमत न चुकानी पड़े क्योंकि अमेरिका को इस बात का एहसास हो चुका है कि जो दोस्त उन्होंने पाकिस्तान के रूप में चुना है, वह ‘मक्कारी’ का मास्टर माना जाता है।
उसने अमेरिका से अफगानिस्तान में सोवियत सेना के खिलाफ लड़ने के नाम पर करोड़ों डालर ऐंठ लिया किन्तु उस वक्त उसने तालिबानी संगठनों को यह कहकर हथियार आपूर्ति नहीं की कि पाकिस्तान आमी तो अमेरिकी हथियारों को चलाने में काफी माहिर है। किन्तु तालिबानियों को इसकी कोईं जानकारी नहीं है। पाकिस्तान के राष्ट्रपति जिया उल हक हथियारों के लिए जो अमेरिका से राशि लेता था उससे तो वह अपनी सेना को मजबूत करता था जबकि अमेरिका से भी धन भी ऐंठता था और एहसान भी जताता था कि उसने तो मुस्लिम देश के खिलाफ ही अपनी सेना भेजी है। इस तरह वह अमेरिका के लिए मीठा भी बना रहा तो वहीं दूसरी तरफ उसी को धोखा भी देता रहा। 2016 में ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान की कपटपूर्ण वूटनीति को समझकर उसको दिए जाने वाले सारे अनुदानों को बन्द कर दिया था। किन्तु दोबारा सत्ता में आते ही राष्ट्रपति ट्रंप पर फिर पाकिस्तान प्रेम का बुखार चढ़ा। अब जब खुद उन्हीं के देश को अपनी पूंछ में लगी आग को बुझाने की चुनौती खड़ी है तो वह उस पाकिस्तान पर आंख मूंदकर भरोसा करते दिखे जो आदतन दोहरे चरित्र का देश है और इसके नेता आदतन झूठे और व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए मित्रता की सौदेबाजी करने के लिए वुख्यात हैं।