अमेरिका ने 24 घंटे में 6500 टन हथियार इजरायल भेजे, ईरान पर दोबारा हमले की तैयारी पूरी?
प्रकाशित: 01-05-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
क्या अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पीछे नहीं हटने की कसम खा रखे ईरान को घुटनों पर लाने की तैयारी कर ली है? क्या ईरान पर निर्णायक प्रहार का वक्त आ गया है. एक साथ अमेरिका में कई ऐसी चीजें हुई हैं जो इस ओर संकेत दे रही हैं. मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य अभियानों को हैंडल करने वाले और अभी ईरान के बंदरगाहों पर नाकाबंदी करने वाले यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने राष्ट्रपति ट्रंप के सामने ईरान पर संभावित हमले का पूरा प्लान रख दिया है. यह 45 मिनट की ब्रीफिंग थी, जिसमें जॉइंट चीफ्स के चेयरमैन भी शामिल थे. यह ब्रीफिंग उस समय हुई जब खबरें आईं कि अमेरिका ने हाल ही में 6,000 टन से ज्यादा हथियार और सैन्य सामान इजरायल भेजा है.
इससे यह अटकलें बढ़ गई हैं कि ट्रंप ईरान में बड़े स्तर पर फिर से लड़ाई शुरू करने की योजना बना सकते हैं, ताकि समझौते के लिए दोनों देशों के बीच चल रहा गतिरोध खत्म हो सके, ईरान को ट्रंप खुद की शर्तों पर झुका सकें.
इजरायल पहुंचा 6,000 टन से ज्यादा हथियार
इजरायल डिफेंस मिनिस्ट्री के हवाले से द इजरायल टाइम्स और द जेरूसलम पोस्ट ने खबर छापी है कि इस हफ्ते अमेरिका से दो बड़े जहाज और कई विमान इजरायल पहुंचे हैं. इनमें 6,500 टन (6,500,000 किलोग्राम) हवाई और जमीनी हथियार, सैन्य ट्रक, जॉइंट लाइट टैक्टिकल व्हीकल (JLTV) और अन्य सैन्य सामान शामिल था.
रिपोर्ट के मुताबिक, इस ऑपरेशन को इजरायल के रक्षा मंत्रालय के डिफेंस प्रोक्योरमेंट डायरेक्टरेट ने संभाला. इसमें उसकी इंटरनेशनल शिपिंग डिवीजन, अमेरिका में उसका मिशन और आईडीएफ प्लानिंग डायरेक्टरेट ने मिलकर काम किया. बता दें कि ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक इजरायल को लगभग 1,15,600 टन सैन्य सामान मिल चुका है. मंत्रालय ने बयान में कहा, “ऑपरेशन ‘रोरिंग लायन' शुरू होने के बाद से इजरायल को 403 हवाई सप्लाई और 10 समुद्री सप्लाई के जरिए 1,15,600 टन से ज्यादा सैन्य सामान मिला है.”
ट्रंप की टीम ने ईरान फतह के लिए बनाया तीन स्टेज वाला प्लान
1. ईरान पर एक के बाद एक कई छोटे लेकिन ताकतवर हमलों को अंजाम दिया जाएगा. इसमें ईरान के अंदर इंफ्रास्ट्रक्चर (ढांचे) को निशाना बनाया जा सकता है.
2. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर “कब्जा” करना और उसे व्यापारिक जहाजों के लिए खोलना शामिल है.
3. योजना का आखिरी हिस्सा एक स्पेशल फोर्स ऑपरेशन है, जिसमें ईरान के ज्यादा समृद्ध (हाईली एनरिच्ड) यूरेनियम के भंडार को सुरक्षित करना शामिल है.
ईरान को अमेरिका पर भरोसा नहीं
ईरान के राष्ट्रपति मसूूद पेजेशकियन ने भी चेतावनी दी है कि बातचीत के दौरान अमेरिका फिर से तेहरान पर हमला कर सकता है. उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन पर भरोसा पूरी तरह खत्म हो गया है. बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको से फोन पर बात करते हुए पेजेशकियन ने कहा, “ईरान हमेशा बातचीत और कूटनीति के जरिए मतभेद सुलझाने की कोशिश करता रहा है.”
उन्होंने आगे कहा, “लेकिन बातचीत के दौरान ही अमेरिका और जियोनिस्ट शासन (इजरायल) ने ईरान पर दो बार हमला किया. आगे भी ऐसा हो सकता है, इसलिए ईरान का अमेरिका पर भरोसा पूरी तरह खत्म हो गया है.” यह बयान सरकारी चैनल प्रेस टीवी पर दिखाया गया.
इस बीच तस्नीम न्यूज एजेंसी और फार्स न्यूज एजेंसी ने बताया कि ईरान की राजधानी के कुछ हिस्सों में करीब 20 मिनट तक एयर डिफेंस सिस्टम चालू किए गए. ये छोटे विमानों और जासूसी ड्रोन को रोकने के लिए था. बाद में हालात “सामान्य” हो गए.
इससे यह अटकलें बढ़ गई हैं कि ट्रंप ईरान में बड़े स्तर पर फिर से लड़ाई शुरू करने की योजना बना सकते हैं, ताकि समझौते के लिए दोनों देशों के बीच चल रहा गतिरोध खत्म हो सके, ईरान को ट्रंप खुद की शर्तों पर झुका सकें.
इजरायल पहुंचा 6,000 टन से ज्यादा हथियार
इजरायल डिफेंस मिनिस्ट्री के हवाले से द इजरायल टाइम्स और द जेरूसलम पोस्ट ने खबर छापी है कि इस हफ्ते अमेरिका से दो बड़े जहाज और कई विमान इजरायल पहुंचे हैं. इनमें 6,500 टन (6,500,000 किलोग्राम) हवाई और जमीनी हथियार, सैन्य ट्रक, जॉइंट लाइट टैक्टिकल व्हीकल (JLTV) और अन्य सैन्य सामान शामिल था.
रिपोर्ट के मुताबिक, इस ऑपरेशन को इजरायल के रक्षा मंत्रालय के डिफेंस प्रोक्योरमेंट डायरेक्टरेट ने संभाला. इसमें उसकी इंटरनेशनल शिपिंग डिवीजन, अमेरिका में उसका मिशन और आईडीएफ प्लानिंग डायरेक्टरेट ने मिलकर काम किया. बता दें कि ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक इजरायल को लगभग 1,15,600 टन सैन्य सामान मिल चुका है. मंत्रालय ने बयान में कहा, “ऑपरेशन ‘रोरिंग लायन' शुरू होने के बाद से इजरायल को 403 हवाई सप्लाई और 10 समुद्री सप्लाई के जरिए 1,15,600 टन से ज्यादा सैन्य सामान मिला है.”
ट्रंप की टीम ने ईरान फतह के लिए बनाया तीन स्टेज वाला प्लान
1. ईरान पर एक के बाद एक कई छोटे लेकिन ताकतवर हमलों को अंजाम दिया जाएगा. इसमें ईरान के अंदर इंफ्रास्ट्रक्चर (ढांचे) को निशाना बनाया जा सकता है.
2. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर “कब्जा” करना और उसे व्यापारिक जहाजों के लिए खोलना शामिल है.
3. योजना का आखिरी हिस्सा एक स्पेशल फोर्स ऑपरेशन है, जिसमें ईरान के ज्यादा समृद्ध (हाईली एनरिच्ड) यूरेनियम के भंडार को सुरक्षित करना शामिल है.
ईरान को अमेरिका पर भरोसा नहीं
ईरान के राष्ट्रपति मसूूद पेजेशकियन ने भी चेतावनी दी है कि बातचीत के दौरान अमेरिका फिर से तेहरान पर हमला कर सकता है. उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन पर भरोसा पूरी तरह खत्म हो गया है. बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको से फोन पर बात करते हुए पेजेशकियन ने कहा, “ईरान हमेशा बातचीत और कूटनीति के जरिए मतभेद सुलझाने की कोशिश करता रहा है.”
उन्होंने आगे कहा, “लेकिन बातचीत के दौरान ही अमेरिका और जियोनिस्ट शासन (इजरायल) ने ईरान पर दो बार हमला किया. आगे भी ऐसा हो सकता है, इसलिए ईरान का अमेरिका पर भरोसा पूरी तरह खत्म हो गया है.” यह बयान सरकारी चैनल प्रेस टीवी पर दिखाया गया.
इस बीच तस्नीम न्यूज एजेंसी और फार्स न्यूज एजेंसी ने बताया कि ईरान की राजधानी के कुछ हिस्सों में करीब 20 मिनट तक एयर डिफेंस सिस्टम चालू किए गए. ये छोटे विमानों और जासूसी ड्रोन को रोकने के लिए था. बाद में हालात “सामान्य” हो गए.