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ईरान जंग के बीच अब यूरोप में खलबली, सैना की तैनाती पर ट्रंप लेने जा रहे बड़ा फैसला

प्रकाशित: 01-05-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
ईरान जंग के बीच अब यूरोप में खलबली, सैना की तैनाती पर ट्रंप लेने जा रहे बड़ा फैसला
अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगियों के बीच खिंचाव अब खुलकर सामने आने लगा है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इटली और स्पेन से अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाने का संकेत देकर इस दूरी को और गहरा कर दिया है. ईरान के साथ जारी टकराव को लेकर दोनों देशों के रुख पर उन्होंने तीखी नाराजगी जताई है. व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में मीडिया से बात करते हुए ट्रंप ने साफ कहा कि वह इटली और स्पेन में तैनात अमेरिकी सैनिकों की संख्या घटाने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं. जब उनसे पूछा गया कि क्या इन दोनों नाटो देशों से सैनिक कम किए जा सकते हैं, तो उन्होंने बेबाक अंदाज़ में जवाब दिया, 'हां, शायद… मैं ऐसा क्यों नहीं कर सकता हूं?' ट्रंप ने इटली और स्पेन पर सहयोग न करने का आरोप लगाते हुए कहा कि इटली ने कोई खास मदद नहीं की, जबकि स्पेन का रवैया “बहुत खराब” रहा है. दरअसल, ईरान के खिलाफ अमेरिकी नेतृत्व वाले सैन्य अभियान और होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित करने की कोशिशों में कई यूरोपीय देशों ने सीधे तौर पर शामिल होने से इनकार कर दिया है. इस बयान से पहले ही ट्रंप जर्मनी में भी अमेरिकी सैन्य उपस्थिति घटाने की बात कह चुके हैं. इससे साफ संकेत मिल रहा है कि अमेरिका यूरोप में अपनी सैन्य रणनीति की व्यापक समीक्षा कर रहा है.
नाटो देशों पर लगातार ट्रंप उठा रहे सवाल
आंकड़ों के मुताबिक, 2025 के अंत तक इटली में करीब 12,600 से ज्यादा और स्पेन में करीब 3,800 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं, जबकि जर्मनी अब भी सबसे बड़ा केंद्र है, जहां 36,000 से अधिक सैनिक मौजूद हैं. ट्रंप लंबे समय से नाटो देशों पर रक्षा खर्च और जिम्मेदारी साझा करने को लेकर सवाल उठाते रहे हैं. लेकिन ईरान के मुद्दे पर बढ़ते मतभेदों ने इस तनाव को और बढ़ा दिया है. उन्होंने कई बार यूरोपीय देशों की आलोचना की है कि वे अमेरिका-इजरायल अभियान का खुलकर समर्थन नहीं कर रहे और होर्मुज जैसे अहम समुद्री मार्ग को खुलवाने में सक्रिय भूमिका नहीं निभा रहे.
जॉर्जिया मेलोनी पर भी ट्रंप का निशाना
इसी कड़ी में ट्रंप ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उनमें ईरान मुद्दे पर 'हिम्मत की कमी' है. वहीं स्पेन को लेकर तो वॉशिंगटन में इतनी नाराज़गी है कि उसे नाटो से बाहर करने तक के विकल्पों पर चर्चा की खबरें सामने आई हैं, खासकर रक्षा बजट और युद्ध में सहयोग को लेकर. तनाव सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है. जर्मनी भी इस विवाद की चपेट में आ गया है. ट्रंप ने जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज पर सोशल मीडिया के जरिए हमला बोलते हुए कहा कि उन्हें अमेरिका की विदेश नीति में दखल देने के बजाय रूस-यूक्रेन युद्ध और अपने देश की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए.
ईरान पर एक्शन से दुनिया सुरक्षितः ट्रंप
ट्रंप का दावा है कि ईरान के खिलाफ कार्रवाई से दुनिया ज्यादा सुरक्षित हो रही है, भले ही इससे वैश्विक ऊर्जा कीमतों में उछाल आया हो. वहीं जर्मन नेतृत्व ने अमेरिकी रणनीति पर सवाल उठाते हुए इसे अफगानिस्तान और इराक जैसे लंबे संघर्षों से जोड़कर देखा है. इस बीच जर्मनी के विदेश मंत्री योहान वाडेफुल ने संकेत दिया है कि अमेरिका अगर अपने सैनिक कम करता है, तो बर्लिन इसके लिए तैयार है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि नाटो के भीतर बातचीत भरोसे के माहौल में जारी है.
हमास समर्थित काफिले पर इजरायल का एक्शन, US ने किया समर्थन
बढ़ते तनाव के बावजूद जर्मनी ने नाटो और ट्रांस-अटलांटिक साझेदारी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है. लेकिन साफ है कि ईरान को लेकर अमेरिका और उसके सहयोगियों के बीच मतभेद वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजार दोनों पर गहरा असर डाल रहे हैं. स्थिति तब और स्पष्ट हुई जब स्पेन ने गाजा जा रहे एक सहायता काफिले को रोकने की इजरायली कार्रवाई की आलोचना की, जबकि अमेरिका ने इसे 'राजनीतिक दिखावा' करार दिया. यह घटनाक्रम बताता है कि ईरान और मध्य पूर्व को लेकर पश्चिमी देशों के बीच एकजुटता अब पहले जैसी नहीं रही.