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एमईआरआई कॉलेज में एनईपी पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न

प्रकाशित: 02-11-2025 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
 एमईआरआई कॉलेज में एनईपी पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न
वीर अर्जुन संवाददाता
नई दिल्ली। मैनेजमेंट एजुकेशन एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (एमईआरआई) में भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएसएसआर ) के सहयोग से राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020/2025 : विकसित भारत 2047 की ओर एक मार्ग विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल आयोजन किया गया। यह संगोष्ठी भारत को ज्ञान आधारित और नवोन्मेषी समाज के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक सार्थक प्रयास साबित हुई।
दो दिवसीय संगोष्ठी के पहले दिन कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन और देवी सरस्वती की वंदना से हुई। इसके पश्चात राष्ट्रगान और अतिथियों का स्वागत किया गया। उद्घाटन सत्र में प्रमुख वक्ताओं - प्रो. (डॉ.) ललित अग्रवाल (उपाध्यक्ष, एमईआरआई), प्रो. (डॉ.) आर.के. मित्तल (कुलपति, बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय) और जेके दादू (सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी एवं व्यवसायिक नेता) - ने अपने विचार रखे। वक्ताओं ने शिक्षा, नवाचार और समावेशी विकास को विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की प्रमुख नींव बताया।
जेके दादू ने कहा शिक्षकों के लिए लचीलापन, सतत व्यावसायिक विकास और तकनीकी एकीकरण को शिक्षा सुधार का आवश्यक घटक बताया। उन्होंने कहा कि कौशल-आधारित अधिगम और तकनीकी सशक्तिकरण ही भविष्य के भारत की दिशा तय करेंगे।
पहले दिन तकनीकी सत्रों का संचालन प्रो. (डॉ.) दुर्गेश त्रिपाठी और डॉ. आवा शुक्ला ने किया, जिनमें डिजिटल शिक्षा, मीडिया अध्ययन, कृत्रिम तंत्रिका नेटवर्क और कृत्रिम बुद्धिमत्ता अनुसंधान जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
संगोष्ठी के दूसरे दिन प्रो. (डॉ.) प्रवीन चंद्रा और डॉ. सरिता जैन ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार साझा किए। प्रो. चंद्रा ने एनईपी को एक रूपांतरकारी नीति बताते हुए कहा कि यह रचनात्मकता, आलोचनात्मक चिंतन और सामाजिक-भावनात्मक कौशल के विकास पर केंद्रित है। वहीं डॉ. जैन ने दीक्षा (डीआईकेएस एच) और स्वयं (एसडब्लूएवाईएएम) जैसे डिजिटल प्लेटफार्मों के माध्यम से शिक्षक प्रशिक्षण और मिश्रित अधिगम को शिक्षा सुधार का प्रमुख साधन बताया।
कार्यक्रम का समापन समापन सत्र और प्रमाणपत्र वितरण के साथ हुआ। इस अवसर पर प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। संगोष्ठी ने शिक्षा के क्षेत्र में नीतिगत सुधारों और भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को नई दिशा देने का संदेश दिया।