एमईआरआई पीएलआई में थर्ड इंट्रा-कॉलेज क्लाइंट काउंसलिंग क्वेस्ट का ग्रैंड फिनाले संपन्न
प्रकाशित: 02-11-2025 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
वीर अर्जुन संवाददाता
सांपला, (बहादुरगढ़)। एमईआरआई प्रोफेशनल एंड लॉ इंस्टीट्यूट (एमईआरआई पीएलआई), असांदा, बहादुरगढ़ का परिसर एक बार फिर उत्साह, ज्ञान और प्रतिस्पर्धात्मक भावना से सराबोर हो उठा जब इंट्रा-कॉलेज क्लाइंट काउंसलिंग क्वेस्ट 2025 के दूसरे दिन सेमीफाइनल और ग्रैंड फिनाले राउंड का सफल आयोजन किया गया। यह दिन वकालत, सहानुभूति और उत्कृष्टता का उत्सव रहा - जो एमईआरआई पीएलआई की शिक्षा दर्शन क्लासरूम से परे सीखना की सच्ची मिसाल था।
20 काउंसल टीमों और 10 क्लाइंट्स में से 6-6 टीमों ने सेमीफाइनल तक का सफर तय किया, जहाँ प्रतिभागियों ने विधिक ज्ञान, संवाद कौशल, परामर्श क्षमता और नैतिक सोच का उत्कृष्ट समन्वय प्रदर्शित किया। सेमीफाइनल राउंड का मूल्यांकन दो प्रतिष्ठित शिक्षाविदों - डॉ. आशु धीमान, असिस्टेंट प्रोफेसर, वीआईपीएस-टीसी, तथा सुश्री ज्योति कुकरेजा, असिस्टेंट प्रोफेसर, भारती विद्यापीठ यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली - द्वारा किया गया। दोनों निर्णायकों ने प्रतिभागियों की विश्लेषणात्मक स्पष्टता, पेशेवर दृष्टिकोण और सहानुभूतिपूर्ण परामर्श शैली की प्रशंसा की। उन्होंने एमईआरआई पीएलआई के इस प्रयास को सराहा कि संस्था अपने छात्रों को व्यावहारिक अनुभवों के माध्यम से पूर्ण विकसित विधि-विशेषज्ञ के रूप में तैयार कर रही है। कड़ी प्रतिस्पर्धा के बाद तीन काउंसल टीमों और तीन क्लाइंट्स ने ग्रैंड फिनाले में स्थान बनाया, जहाँ बुद्धिमत्ता और नवाचार का उत्कृष्ट संगम देखने को मिला।
फाइनल राउंड का संचालन तीन विशिष्ट व्यक्तित्वों द्वारा किया गया - नवीन कुमार जग्गी, सीईओ, जग्गी, जग्गी एंड जग्गी इंटरनेशनल अटॉर्नीज़ एट लॉ (103 वर्षों की गौरवशाली विरासत वाला प्रतिष्ठित विधि फर्म) एवं ऑटोमोबाइल एसोसिएशन ऑफ अपर इंडिया के अध्यक्ष; प्रो. (डॉ.) प्रीत सिंह, प्रिंसिपल, एमईआरआई प्रोफेशनल एंड लॉ इंस्टीट्यूट; तथा दीपक शर्मा, अधिवक्ता एवं विधिक प्रैक्टिशनर, जिला न्यायालय, रोहतक। फाइनलिस्ट्स ने क्लाइंट काउंसलिंग की कला में अपनी अद्वितीय दक्षता का प्रदर्शन किया। निर्णायकों ने उनकी संतुलित सोच, संवेदनशीलता और व्यावहारिक समझ की भूरि-भूरि प्रशंसा की।
अपने प्रेरक संबोधन में श्री नवीन कुमार जग्गी ने कहा कि क्लाइंट काउंसलिंग ही वकालत की आत्मा है। कानून केवल अधिनियमों और तर्कों तक सीमित नहीं, बल्कि यह लोगों की समस्याओं को समझने और उनके मानवीय समाधान खोजने की प्रािढया है। कानून एक पवित्र पेशा है - इसमें कभी भी प्रलोभन नहीं होना चाहिए। एमईआरआई पीएलआई द्वारा युवा छात्रों में ऐसे मूल्य स्थापित करने का प्रयास सराहनीय है। प्रो. (डॉ.) प्रीत सिंह ने छात्रों के उत्साह और अनुशासन की सराहना करते हुए कहा कि यह प्रतियोगिता केवल एक कार्पाम नहीं, बल्कि एक परिवर्तनकारी अनुभव है जो छात्रों को सहानुभूतिपूर्ण और प्रभावी विधि-व्यवसायी बनने की दिशा में तैयार करती है। एमईआरआई पीएलआई अनुभवात्मक शिक्षा के माध्यम से विधिक शिक्षण की परिभाषा को नया आयाम दे रहा है। कार्पाम के अंत में स्नातक विधि (बैचलर ऑफ लॉ) कला एवं विधि स्नातक (बैचलर ऑफ आर्ट्स एंड बैचलर ऑफ लॉ), कोर्स के छात्रों को काउंसल एवं क्लाइंट श्रेणी में विजेता घोषित किया गया, जिन्हें निर्णायकों, संकाय और सहपाठियों से जोरदार सराहना मिली। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें सभी अतिथियों, निर्णायकों, संकाय सदस्यों और आयोजन समिति के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
प्रो. ललित अग्रवाल, उपाध्यक्ष, एमईआरआई ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के मार्गदर्शन एवं संरक्षकत्व में संपन्न यह आयोजन एक और गौरवपूर्ण उपलब्धि के रूप में दर्ज हुआ - जो एमईआरआई पीएलआई की उस निरंतर यात्रा का प्रतीक है, जिसमें संस्था आत्मविश्वासी, संवेदनशील और नैतिक मूल्यों से युक्त विधि-व्यवसायियों को तैयार कर रही है।
सांपला, (बहादुरगढ़)। एमईआरआई प्रोफेशनल एंड लॉ इंस्टीट्यूट (एमईआरआई पीएलआई), असांदा, बहादुरगढ़ का परिसर एक बार फिर उत्साह, ज्ञान और प्रतिस्पर्धात्मक भावना से सराबोर हो उठा जब इंट्रा-कॉलेज क्लाइंट काउंसलिंग क्वेस्ट 2025 के दूसरे दिन सेमीफाइनल और ग्रैंड फिनाले राउंड का सफल आयोजन किया गया। यह दिन वकालत, सहानुभूति और उत्कृष्टता का उत्सव रहा - जो एमईआरआई पीएलआई की शिक्षा दर्शन क्लासरूम से परे सीखना की सच्ची मिसाल था।
20 काउंसल टीमों और 10 क्लाइंट्स में से 6-6 टीमों ने सेमीफाइनल तक का सफर तय किया, जहाँ प्रतिभागियों ने विधिक ज्ञान, संवाद कौशल, परामर्श क्षमता और नैतिक सोच का उत्कृष्ट समन्वय प्रदर्शित किया। सेमीफाइनल राउंड का मूल्यांकन दो प्रतिष्ठित शिक्षाविदों - डॉ. आशु धीमान, असिस्टेंट प्रोफेसर, वीआईपीएस-टीसी, तथा सुश्री ज्योति कुकरेजा, असिस्टेंट प्रोफेसर, भारती विद्यापीठ यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली - द्वारा किया गया। दोनों निर्णायकों ने प्रतिभागियों की विश्लेषणात्मक स्पष्टता, पेशेवर दृष्टिकोण और सहानुभूतिपूर्ण परामर्श शैली की प्रशंसा की। उन्होंने एमईआरआई पीएलआई के इस प्रयास को सराहा कि संस्था अपने छात्रों को व्यावहारिक अनुभवों के माध्यम से पूर्ण विकसित विधि-विशेषज्ञ के रूप में तैयार कर रही है। कड़ी प्रतिस्पर्धा के बाद तीन काउंसल टीमों और तीन क्लाइंट्स ने ग्रैंड फिनाले में स्थान बनाया, जहाँ बुद्धिमत्ता और नवाचार का उत्कृष्ट संगम देखने को मिला।
फाइनल राउंड का संचालन तीन विशिष्ट व्यक्तित्वों द्वारा किया गया - नवीन कुमार जग्गी, सीईओ, जग्गी, जग्गी एंड जग्गी इंटरनेशनल अटॉर्नीज़ एट लॉ (103 वर्षों की गौरवशाली विरासत वाला प्रतिष्ठित विधि फर्म) एवं ऑटोमोबाइल एसोसिएशन ऑफ अपर इंडिया के अध्यक्ष; प्रो. (डॉ.) प्रीत सिंह, प्रिंसिपल, एमईआरआई प्रोफेशनल एंड लॉ इंस्टीट्यूट; तथा दीपक शर्मा, अधिवक्ता एवं विधिक प्रैक्टिशनर, जिला न्यायालय, रोहतक। फाइनलिस्ट्स ने क्लाइंट काउंसलिंग की कला में अपनी अद्वितीय दक्षता का प्रदर्शन किया। निर्णायकों ने उनकी संतुलित सोच, संवेदनशीलता और व्यावहारिक समझ की भूरि-भूरि प्रशंसा की।
अपने प्रेरक संबोधन में श्री नवीन कुमार जग्गी ने कहा कि क्लाइंट काउंसलिंग ही वकालत की आत्मा है। कानून केवल अधिनियमों और तर्कों तक सीमित नहीं, बल्कि यह लोगों की समस्याओं को समझने और उनके मानवीय समाधान खोजने की प्रािढया है। कानून एक पवित्र पेशा है - इसमें कभी भी प्रलोभन नहीं होना चाहिए। एमईआरआई पीएलआई द्वारा युवा छात्रों में ऐसे मूल्य स्थापित करने का प्रयास सराहनीय है। प्रो. (डॉ.) प्रीत सिंह ने छात्रों के उत्साह और अनुशासन की सराहना करते हुए कहा कि यह प्रतियोगिता केवल एक कार्पाम नहीं, बल्कि एक परिवर्तनकारी अनुभव है जो छात्रों को सहानुभूतिपूर्ण और प्रभावी विधि-व्यवसायी बनने की दिशा में तैयार करती है। एमईआरआई पीएलआई अनुभवात्मक शिक्षा के माध्यम से विधिक शिक्षण की परिभाषा को नया आयाम दे रहा है। कार्पाम के अंत में स्नातक विधि (बैचलर ऑफ लॉ) कला एवं विधि स्नातक (बैचलर ऑफ आर्ट्स एंड बैचलर ऑफ लॉ), कोर्स के छात्रों को काउंसल एवं क्लाइंट श्रेणी में विजेता घोषित किया गया, जिन्हें निर्णायकों, संकाय और सहपाठियों से जोरदार सराहना मिली। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें सभी अतिथियों, निर्णायकों, संकाय सदस्यों और आयोजन समिति के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
प्रो. ललित अग्रवाल, उपाध्यक्ष, एमईआरआई ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के मार्गदर्शन एवं संरक्षकत्व में संपन्न यह आयोजन एक और गौरवपूर्ण उपलब्धि के रूप में दर्ज हुआ - जो एमईआरआई पीएलआई की उस निरंतर यात्रा का प्रतीक है, जिसमें संस्था आत्मविश्वासी, संवेदनशील और नैतिक मूल्यों से युक्त विधि-व्यवसायियों को तैयार कर रही है।