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भारत-सेंट्रल एशिया फाउंडेशन व सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक रिसर्च के बीच एमओयू का हुआ

प्रकाशित: 16-10-2025 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
भारत-सेंट्रल एशिया फाउंडेशन व  सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक रिसर्च के बीच एमओयू का हुआ
नई दिल्ली। भारत-सेंट्रल एशिया फाउंडेशन और ताजिकिस्तान के सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक रिसर्च के बीच एमओयू का हुआ नवीनीकरण वीर अर्जुन समाचार ब्यूरो दुशांबे (ताजिकिस्तान)। भारत के इंडिया सेंट्रल एशिया फाउंडेशन (आईसीएएफ), नई दिल्ली और सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक रिसर्च (सीएसआर), जो ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति के अधीन एक प्रमुख थिंक-टैंक है, के बीच समझौता ज्ञापन का नवीनीकरण 13 अक्टूबर 2025 को दुशांबे में किया गया। एमओयू पर हस्ताक्षर प्रो. (डॉ.) रामकांत द्विवेदी, निदेशक, इंडिया सेंट्रल एशिया फाउंडेशन, और प्रो. उस्मोनजोदा के. उस्मोन, निदेशक, सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक रिसर्च ने अपने-अपने संस्थानों की ओर से किए। इस अवसर पर भारत के ताजिकिस्तान में राजदूत राजेश उइके, ताजिकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रतिनिधि सुब्होन कुरबोनोव तथा अन्य विशिष्ट अतिथि उपस्थित थे। यह एमओयू भारत और ताजिकिस्तान के बीच आपसी समझ और संबंधों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके तहत दोनों संस्थान आपसी हितों से जुड़े अंतरराज्यीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर संयुक्त सेमिनार, सम्मेलन और अन्य कार्पाम आयोजित करेंगे। साथ ही प्रकाशनों, अनुसंधानों और आधिकारिक विश्लेषणात्मक दस्तावेजों का आदान-प्रदान भी किया जाएगा। इस सहयोग के तहत दोनों पक्ष साझा शोध परियोजनाओं को लागू करेंगे और उनके निष्कर्षों को थीमैटिक कॉन्फ्रेंस, राउंड टेबल और अन्य अकादमिक आयोजनों के माध्यम से प्रसारित करेंगे, जिनमें शिक्षाविद्, तकनीकी विशेषज्ञ, राजनयिक, रक्षा विश्लेषक, उद्यमी और नीति निर्धारक शामिल होंगे। इंडिया सेंट्रल एशिया फाउंडेशन (आईससए एफ) की स्थापना मार्च 2005 में नई दिल्ली में एक पंजीकृत सोसाइटी के रूप में की गई थी। यह एक ट्रैक-2 पहल है, जिसका उद्देश्य भारत और मध्य एशियाई देशों के बीच साझा हितों को आगे बढ़ाना है। फाउंडेशन पहले ही मध्य एशिया के प्रमुख अनुसंधान एवं शैक्षणिक संस्थानों और विद्वानों के साथ मजबूत संबंध स्थापित कर चुका है। आज जब दुनिया बहुध्रुवीयता की ओर बढ़ रही है, तब मध्य एशिया अपनी भौगोलिक स्थिति और संसाधनों के कारण एक रणनीतिक केंद्र के रूप में उभर रहा है। भारत अपनी नीतिगत दृष्टि को और परिष्कृत कर स्थायी और विश्वसनीय साझेदारी बनाने की दिशा में अग्रसर है, जिससे परस्पर आर्थिक और सुरक्षा हितों को मजबूती मिले। वैश्विक शक्ति समीकरणों में हो रहे बदलाव के बीच भारत के लिए आवश्यक है कि वह मध्य एशिया में अपनी कूटनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक उपस्थिति को और सुदृढ़ करे। एमओयू के तहत भारत और मध्य एशिया के बीच भौतिक और डिजिटल संपर्क (कनेक्टिविटी) को बेहतर बनाने, स्वास्थ्य, शिक्षा, आपदा प्रबंधन, आतंकवाद निरोध और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाने और क्षेत्रीय विकास के लिए दीर्घकालिक ढांचे तैयार करने पर भी ध्यान दिया जाएगा। सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक रिसर्च के निदेशक प्रो. उस्मोनजोदा उस्मोन ने दोनों संस्थानों के बीच पारस्परिक संवाद और सहयोग को और बढ़ाने पर बल दिया। वहीं भारत के राजदूत राजेश उइके ने प्रो. द्विवेदी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह समझौता दोनों देशों के बीच विशेष रूप से रणनीतिक अध्ययन के क्षेत्र में सहयोग को नई ऊंचाई प्रदान करेगा। उन्होंने आधुनिक समय में भू-राजनीतिक अध्ययन और सूचना प्रौद्योगिकी के महत्व को भी रेखांकित किया।