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कांग्रेस का राजभवन मार्च, राज्यपाल से की जांच की मांग

प्रकाशित: 20-03-2026 | लेखक: पवन आश्री
कांग्रेस का राजभवन मार्च, राज्यपाल से की जांच की मांग
हरियाणा के राज्यसभा चुनाव अब महज एक संसदीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि बड़े सियासी टकराव में बदल चुके हैं। कांग्रेस ने चुनाव में धांधली और सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए बृहस्पतिवार को राजभवन का दरवाजा खटखटाया है। पूर्व सीएम व नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र हुड्डा के नेतृत्व में कांग्रेस विधायक दल ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की।ज्ञापन सौंपने के बाद हुड्डा ने शेरो-शायरी के अंदाज में तंज कसते हुए कहा कि लोकतंत्र की रक्षा का जिम्मा जिन पर था, वही सवालों के घेरे में हैं। उनका आरोप है कि चुनाव प्रक्रिया में निष्पक्षता की बजाय मिलीभगत का खेल चला। हरियाणा विधानसभा के 90 सदस्यों के गणित के मुताबिक, कांग्रेस और भाजपा के खाते में एक-एक सीट आनी तय मानी जा रही थी। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा ने रणनीतिक चाल चलते हुए अपने ही उपाध्यक्ष सतीश नांदल को निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में उतार दिया।
कांग्रेस इसे ‘साम, दाम, दंड, भेद’ की राजनीति करार दे रही है, जिसमें कथित तौर पर दबाव, प्रलोभन और सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल हुआ। कांग्रेस ने सीधे तौर पर रिटर्निंग ऑफिसर पंकज अग्रवाल की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। आरोप है कि उन्होंने कांग्रेस के वैध वोटों को अवैध घोषित किया, जबकि भाजपा और निर्दलीय उम्मीदवार के पक्ष में वोट स्वीकार कर लिए। कांग्रेस का कहना है कि उनके एजेंटों द्वारा दर्ज कराई गई आपत्तियों को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया।
वोटिंग से लेकर गिनती तक, हर चरण पर विवाद
विधायक भारत भूषण बतरा ने आरोप लगाया कि भाजपा ने शुरुआत से ही चुनाव को प्रभावित करने की रणनीति बनाई थी। थानेसर विधायक अशोक अरोड़ा ने वोट कैंसिलेशन को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने दावा किया कि विधायक परमवीर सिंह का वोट सही तरीके से डाला गया था और बैलेट बॉक्स में भी चला गया था, लेकिन उसे दो घंटे बाद रद्द कर दिया गया। अरोड़ा ने कहा कि अगर सीक्रेसी लीक होती है तो वोट अलग रखा जाता है, बाद में वीडियो देखकर फैसला होता है। लेकिन यहां तो डाले गए वोट को ही बाद में खारिज कर दिया गया।
6 बार ऑब्जेक्शन, फिर भी वैलिड और अंत में रद्द!
कांग्रेस का दावा है कि जिन वोटों पर भाजपा और निर्दलीय उम्मीदवारों ने आपत्ति जताई थी, उन्हें शुरुआत में वैध माना गया। लेकिन अंतिम गिनती के वक्त वही वोट रद्द कर दिए गए। कांग्रेस इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ सबसे बड़ा खिलवाड़ बता रही है। ज्ञापन में कांग्रेस ने राज्यपाल से अपील की है कि वे संवैधानिक प्रमुख के रूप में इस पूरे मामले की जांच कराएं, सरकार को लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन करने के निर्देश दें और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करें।
कर्ज में डूबा हरियाणा, प्रबंधन सही नहीं : हुड्डा
इस दौरान मीडिया से बातचीत में हुड्डा ने राज्य की आर्थिक स्थिति पर भी सवाल उठाए। उनका दावा है कि हरियाणा पर कुल कर्ज करीब 5.56 लाख करोड़ रुपये पहुंच चुका है, जिससे विकास कार्यों के लिए संसाधन सीमित हो गए हैं। हुड्डा ने बताया कि पूंजीगत व्यय के लिए सरकार के पास राजस्व है ही नहीं। क्योंकि ऋण चुकाने और तमाम अग्रिम भुगतानों के बाद पूंजीगत व्यय के लिए केवल 21,756 करोड़ रुपये बचते हैं, जो कुल बजट का मात्र 9.7% है। ये नए मेडिकल कॉलेज, सड़कें, पुल और बजट में घोषित अन्य परियोजनाओं के लिए पर्याप्त फंड उपलब्ध नहीं हैं। विधायक रघुवीर सिंह कादियान ने आरोप लगाया कि सरकार ने विधानसभा में भी विपक्ष की आवाज दबाई। उन्होंने कहा कि राज्यसभा चुनाव, एसवाईएल और अंतरराष्ट्रीय ट्रेड जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा से सरकार बचती रही।