होर्मुज स्ट्रेट ब्लॉक करने के खिलाफ एकजुट हुए छह देश, ईरान को सुना डाली खरी-खोटी
प्रकाशित: 20-03-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
ईरान और अमेरिका-इस्राइल के बीच युद्ध जारी है. युद्ध को 20 दिन पूरे हो चुके हैं. आज युद्ध का 21वां दिन है. युद्ध की लपेटे में पूरा मिडिल ईस्ट आ गया है. युद्ध के बीच, ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट ब्लॉक कर दिया है. होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव के बीच जापान और यूरोपीय देशों ने एक बड़ा कदम उठाया है. कुल छह देशों ने एक संयुक्त बयान जारी किया है, जिसमें उन्होेंने साफ कर दिया है कि इस अहम समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए तैयार है.
इन-इन देशों ने की निंदा
जिन देशों ने ज्वाइंट स्टेटमेंट जारी किया है, उनमें जापान, ब्रिटेन, इटली, फ्रांस, नीदरलैंड्स और जर्मनी शामिल हैं. इन देशों ने ईरान के हालिया हमलों की कड़ी निंदा की. उन्होंने कहा कि इन हमलों ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को गंभीर रूप से प्रभावित किया है. बयान में उन्होंने कहा कि सभी देश मिलकर समन्वित प्रयास करेंगे, जिससे ऊर्जा बाजार स्थिर रह सके और होर्मुज स्ट्रेट से आवागमन सामान्य हो सके.
कतर की 17 प्रतिशत एलएनजी निर्यात कैपिसिटी प्रभावित
रायटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, इन देशों ने अपने ज्वाइंट स्टेटमेंट में कतर और सऊदी अरब के तेल और गैस संयंत्रों पर किए गए हमलों की भी निंदा की. कतर की एनर्जी के अनुसार, हमलों से उनकी 17 प्रतिशत एलएनजी निर्यात क्षमता प्रभावित हुई है. इस वजह से कतर को 20 बिलियन डॉलर का नुकसान होने की आशंका है. कतर ने उर्जा का उत्पादन बढ़ाने के लिए और बाजार को स्थिर करने के लिए उत्पादक देशों के साथ काम करने की प्रतिबद्धता जताई है.
दुनिया भर के जहाज होर्मुज स्ट्रेट के बाहर फंसे हुए हैं
बता दें, कच्चे तेल और एलपीजी की वैश्विक आपूर्ति का प्रमुख मार्ग होर्मुज स्ट्रेट, इन दिनों गंभीर संकट से जूझ रहा है. ईरान व्यापारिक जहाजों पर ड्रोन और जहाजों से हमला कर रहा है, जिस वजह से रास्ते से जहाजोें की आवाजाही करीब-करीब ठप हो गई है. भारत सहित दुनिया भर के जहाज होर्मुज स्ट्रेट के बाहर ही फंसे हुए हैं, जिस वजह से विभिन्न देशों की आपूर्ति प्रभावित हो गई है.
कमजोर वर्ग के लोगों पर पड़ेगा असर
इन सभी देशों ने अपने ज्वाइंट स्टेटमेंट में चेतावनी दी कि इन हमलों का प्रभाव बहुत आगे तक महसूस किया जाएगा. ईरान की कार्रवाइयों का असर दुनिया के हर क्षेत्र के लोगों पर पड़ेगा. खासतौर पर कमजोर वर्ग के लोगों के लिए. ईरान ने कहा कि समुद्री रास्ते में दखल देना और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंख्ला में व्यवधान पड़ना इटंरनेशनल शांति और सुरक्षा के लिए सीधा-सीधा खतरा है. इन देशों ने नागरिक ढांचे पर पूर्व बैन लगाने की मांग की है.
इन-इन देशों ने की निंदा
जिन देशों ने ज्वाइंट स्टेटमेंट जारी किया है, उनमें जापान, ब्रिटेन, इटली, फ्रांस, नीदरलैंड्स और जर्मनी शामिल हैं. इन देशों ने ईरान के हालिया हमलों की कड़ी निंदा की. उन्होंने कहा कि इन हमलों ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को गंभीर रूप से प्रभावित किया है. बयान में उन्होंने कहा कि सभी देश मिलकर समन्वित प्रयास करेंगे, जिससे ऊर्जा बाजार स्थिर रह सके और होर्मुज स्ट्रेट से आवागमन सामान्य हो सके.
कतर की 17 प्रतिशत एलएनजी निर्यात कैपिसिटी प्रभावित
रायटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, इन देशों ने अपने ज्वाइंट स्टेटमेंट में कतर और सऊदी अरब के तेल और गैस संयंत्रों पर किए गए हमलों की भी निंदा की. कतर की एनर्जी के अनुसार, हमलों से उनकी 17 प्रतिशत एलएनजी निर्यात क्षमता प्रभावित हुई है. इस वजह से कतर को 20 बिलियन डॉलर का नुकसान होने की आशंका है. कतर ने उर्जा का उत्पादन बढ़ाने के लिए और बाजार को स्थिर करने के लिए उत्पादक देशों के साथ काम करने की प्रतिबद्धता जताई है.
दुनिया भर के जहाज होर्मुज स्ट्रेट के बाहर फंसे हुए हैं
बता दें, कच्चे तेल और एलपीजी की वैश्विक आपूर्ति का प्रमुख मार्ग होर्मुज स्ट्रेट, इन दिनों गंभीर संकट से जूझ रहा है. ईरान व्यापारिक जहाजों पर ड्रोन और जहाजों से हमला कर रहा है, जिस वजह से रास्ते से जहाजोें की आवाजाही करीब-करीब ठप हो गई है. भारत सहित दुनिया भर के जहाज होर्मुज स्ट्रेट के बाहर ही फंसे हुए हैं, जिस वजह से विभिन्न देशों की आपूर्ति प्रभावित हो गई है.
कमजोर वर्ग के लोगों पर पड़ेगा असर
इन सभी देशों ने अपने ज्वाइंट स्टेटमेंट में चेतावनी दी कि इन हमलों का प्रभाव बहुत आगे तक महसूस किया जाएगा. ईरान की कार्रवाइयों का असर दुनिया के हर क्षेत्र के लोगों पर पड़ेगा. खासतौर पर कमजोर वर्ग के लोगों के लिए. ईरान ने कहा कि समुद्री रास्ते में दखल देना और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंख्ला में व्यवधान पड़ना इटंरनेशनल शांति और सुरक्षा के लिए सीधा-सीधा खतरा है. इन देशों ने नागरिक ढांचे पर पूर्व बैन लगाने की मांग की है.