वर्षों से राष्ट्र की सेवा में समर्पित Virarjun अर्जुनस्य प्रतिज्ञे द्वे, न दैन्यं, न पलायनम् ।

परवेज संधू का नया कहानी कलेक्शन ‘पर-हींन परिंदे' राज्यों के बुज़ुर्गों का आईना: प्रो. गुरभजन सिंह गिल

प्रकाशित: 18-06-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
लुधियाना (राजकुमार शर्मा)। वेल्डिंगहैम के काबिल कहानी लेखक परवेज़ संधू का नया कहानी कलेक्शन “पर-हींन परिंदे'' सविना प्रकाशन कैल़िफोर्निया और चेतना प्रकाशन लुधियाना से पब्लिश हुआ है। पंजाबी लोक विरासत अकादमी लुधियाना के चेयरमैन प्रो. गुरभजन सिंह गिल ने कहा है कि परवेज़ का यह नया कहानी कलेक्शन हमें पुराने समय में राज्यों में रहने वाले बुज़ुर्गों की मुश्किलों का आईना दिखाता है। उन्होंने कहा कि परवेज़ ने कहानी कलेक्शन “मुट्ठी भर सपने,'' “टहनियां टूटे,'' “कोड ब्लू,'' “ब्लौरी अख वाला मुंडा'' और गद्य किताब “कंगणी'' के ज़रिए साहित्य की दुनिया में अपनी एक गहरी और गंभीर इमेज बनाई है। प्रो. गुरभजन सिंह गिल की अध्यक्षता में विश्व पंजाब भवन के प्रांगण में आयोजित एक प्रभावशाली समागम में पंजाबी कवि एवं पुस्तक के प्रकाशक सतीश गुलाटी ने कहा कि यदि आप संवेदनशीलता का मानवीय रूप देखना चाहते हैं तो आपको यह पुस्तक पढ़नी चाहिए। पुस्तक को लोगों के समक्ष पेश करने की रस्म पंजाबी कवि मनजिंदर धनोआ, तरलोचन लौची, गुरबीर सिंह बराड़ और विश्व पंजाबी सभा की भारतीय इकाई के अध्यक्ष सिफर सतबीर सिंह ने संयुक्त रूप से निभाई। सुरती पत्रिका के संपादक एवं गुरु नानक कॉलेज बटाला के पंजाबी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. गुरबीर सिंह बराड़ ने कहा कि परवेज संधू की कहानियां सरल व ताजा शैली में छोटी-छोटी घटनाओं से बड़ी भावनात्मक सच्चाईयां रचती हैं। उनकी रोचक व बेहतरीन चरित्र रचना पाठक को अपने साथ ले जाती है।
त्रैलोचन लोछी ने खास तौर पर बताया कि यह किताब अमेरिका में रह रहे पंजाबियों के कल्चरल टकराव, नर्सिंग होम के अकेलेपन, बुढ़ापे की लाचारी, नकली चिट्ठियों के संदर्भ, रिश्तों की गिरावट और औरत के नजरिए से समाज की दोहरी सोच को बहुत ही संवेदनशीलता के साथ सामने लाती है, जबकि ‘देवी' और ‘शाहिनशाह' (डाउन सिंड्रोम वाले बच्चे का संदर्भ) जैसी कहानियों के जरिए दौलत पर सच्चे और निस्वार्थ रूहानी प्यार की अहमियत को खूबसूरती से दिखाया गया है। विश्व पंजाबी सभा के नेशनल प्रधान सिफर सतबीर सिंह ने विश्व पंजाबी भवन अमृतसर के आंगन में आए सभी लेखकों का धन्यवाद किया।
उन्होंने कहा कि विश्व पंजाबी सभा के सरपरस्त प्रो. गुरभजन सिंह गिल का यह दौरा हमारे लिए हौसला बढ़ाने वाला है,क्योंकि उनकी प्रेरणा और डॉ. दलबीर सिंह कथूरिया की लीडरशिप में ही यह भवन बना है। वर्ल्ड पंजाबी सभा की तरफ से आए मेहमान लेखकों को सम्मानित किया गया।