वर्षों से राष्ट्र की सेवा में समर्पित Virarjun अर्जुनस्य प्रतिज्ञे द्वे, न दैन्यं, न पलायनम् ।

खाड़ी में जंग की आहट, वतन की ओर टकटकी

प्रकाशित: 03-03-2026 | लेखक: संपादकीय टीम
पवित्र रमजान के महीने में जब इबादत, सब्र और अमन की दुआएं की जाती हैं, उसी दौर में देश मे होली और धुलण्डी का पर्व है। उसी समय पश्चिम एशिया में तेज होती सैन्य गतिविधियों ने लाखों परिवारों की नींद छीन ली है। अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर हमलों की खबरों के बीच खाड़ी क्षेत्र में असुरक्षा का माहौल गहरा गया है। मीडिया रिपोर्ट्स में इजरायल और ईरान के बीच टकराव का पा है, वहीं क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति को लेकर भी चर्चाएं हैं। इन घटपामों का सीधा असर उन भारतीय प्रवासियों पर पड़ रहा है, जो रोजी-रोटी, कारोबार, कला-संस्कृति या धार्मिक यात्राओं के सिलसिले में दुबई, शारजाह, अबू धाबी, कुवैत और कतर जैसे शहरों में मौजूद हैं।
राजस्थान के बांसवाड़ा, डूंगरपुर, जोधपुर, चित्तौड़गढ़, पाली, बाड़मेर और जयपुर सहित कई जिलों के हजारों लोग खाड़ी देशों में कार्यरत हैं। बांसवाड़ा जिले के करीब 30 हजार प्रवासी कुवैत में काम कर रहे हैं। परिवारों के अनुसार, हवाई मार्ग बाधित होने और उड़ानों के रद्द होने से अनेक लोग बीच रास्ते में अटक गए हैं। कुछ लोग अहमदाबाद से कुवैत जाने वाले थे, पर अचानक फ्लाइटें बंद हो गईं। कई श्रद्धालु और संत अबू धाबी से अहमदाबाद लौटने वाले थे, लेकिन एयरपोर्ट बंद होने की सूचना के बाद उन्हें दुबई डायवर्ट कर दिया गया। फिलहाल वे निजी खर्च पर होटलों में ठहरे हैं और अगली सूचना का इंतजार कर रहे हैं। चित्तौड़गढ़ के कलाकार सांस्कृतिक कार्पाम के लिए दुबई गए थे, जिनकी वापसी 28 फरवरी को तय थी। अचानक हालात बिगड़ने और उड़ान रद्द होने से वे भी वहीं फंस गए। जयपुर के 48 पर्यटकों का दल दुबई-शारजाह भ्रमण पर गया था, उनकी वापसी फ्लाइट भी अचानक रद्द कर दी गई। होटल बुकिंग बढ़ानी पड़ी है, खर्च और अनिश्चितता दोनों बढ़ रहे हैं। जोधपुर के करीब 120 श्रद्धालु, जिनमें दो रामस्नेही संत भी शामिल हैं, दुबई एयरपोर्ट पर फंसने की खबर है।
-कांतिलाल मांडोत,
सूरत, गुजरात।