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दिल्ली एक्साइज पॉलिसी केस में बरी होने के बाद नई बहस

प्रकाशित: 01-03-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को सीबीआई केस में बरी किए जाने के बाद देश की राजनीति में एक नई बहस छिड़ गई है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहियों के आधार पर आरोप प्रथम दृष्टया भी सिद्ध नहीं होते, इसलिए सभी आरोपियों को आरोपमुक्त किया जाता है। इस निर्णय ने आम आदमी पार्टी को राहत दी है, वहीं विपक्षी दलों के लिए यह असहज स्थिति लेकर आया है। यह मामला नवंबर 2021 में लाई गई नई आबकारी नीति से शुरू हुआ था, जिसे बाद में जुलाई 2022 में तत्कालीन उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना द्वारा सीबीआई जांच की सिफारिश के बाद विवादों में घिरना पड़ा। अगस्त 2022 में सीबीआई और ईडी ने अलग-अलग केस दर्ज किए। सितंबर 2022 में दिल्ली सरकार ने नीति वापस ले ली, लेकिन जांच और गिरफ्तारी का सिलसिला जारी रहा। मार्च 2024 में केजरीवाल की गिरफ्तारी ने इस प्रकरण को राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ला खड़ा किया। अदालत का फैसला कानून के दायरे में साक्ष्यों के मूल्यांकन पर आधारित होता है। न्यायपालिका का दायित्व आरोपों या जनभावनाओं के आधार पर नहीं, बल्कि प्रस्तुत प्रमाणों के आधार पर निर्णय देना है। राउज एवेन्यू कोर्ट ने चार्जशीट में खामियों की ओर संकेत करते हुए कहा कि हजारों पन्नों के दस्तावेजों के बावजूद आरोपों को पुष्ट करने योग्य ठोस सामग्री नहीं है। यह टिप्पणी जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्नचिह्न लगाती है। फैसले के बाद केजरीवाल ने अदालत परिसर के बाहर भावुक होते हुए कहा कि उन्होंने जीवनभर ईमानदारी कमाई है और यह केस राजनीतिक षड्यंत्र था। उनके सहयोगी मनीष सिसोदिया ने भी संविधान और न्यायपालिका में विश्वास जताया। आप के नेताओं ने इसे सत्य की जीत बताया और केंद्र सरकार पर राजनीतिक बदले की कार्रवाई का आरोप लगाया।
-कांतिलाल मांडोत,
सूरत, गुजरात।