मध्य प्रदेश सरकार का निर्णय, 87 बंदियों की समय पूर्व रिहाई; 7 को सजा में मिली छूट
प्रकाशित: 08-04-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
मध्य प्रदेश सरकार ने डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती के अवसर पर एक बड़ा और मानवीय फैसला लिया है। राज्य के गृह विभाग ने 14 अप्रैल को 87 आजीवन कारावास की सजा काट रहे बंदियों की समय पूर्व रिहाई को मंजूरी दे दी है। इसके अलावा गैर-आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे 7 बंदियों को भी विशेष परिहार के तहत सजा में छूट देने का भी निर्णय लिया गया है।
गृह विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, राज्य की जेलों में अच्छे आचरण वाले बंदियों को साल में पांच विशेष अवसरों पर राहत दी जाती है। इनमें 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस), 14 अप्रैल (अंबेडकर जयंती), 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस), 2 अक्टूबर (महात्मा गांधी जयंती) और 15 नवंबर (जनजातीय गौरव दिवस) शामिल हैं। इन अवसरों पर पात्र बंदियों को समय पूर्व रिहाई या सजा में छूट दी जाती है।
सरकार का मानना है कि इस तरह के निर्णय से बंदियों को सुधार का अवसर मिलता है और वे जेल में अच्छा व्यवहार बनाए रखते हैं। इससे जेलों में अनुशासन और प्रशासनिक व्यवस्था बेहतर रहती है। साथ ही, रिहाई के बाद बंदियों के पुनर्वास में भी मदद मिलती है, जिससे वे समाज की मुख्यधारा में आसानी से लौट सकें।
गौरतलब है कि इससे पहले 26 जनवरी 2026 को भी 94 बंदियों को समय पूर्व रिहाई और सजा में छूट दी गई थी। ऐसे फैसलों से जेलों में बढ़ती भीड़ को नियंत्रित करने में भी मदद मिलती है। राज्य सरकार का यह फैसला उसकी सुधारात्मक और संवेदनशील नीति का हिस्सा है। जिसका उद्देश्य सिर्फ सजा देना नहीं, बल्कि अपराधियों को सुधारकर समाज के लिए उपयोगी नागरिक बनाना भी है।
गृह विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, राज्य की जेलों में अच्छे आचरण वाले बंदियों को साल में पांच विशेष अवसरों पर राहत दी जाती है। इनमें 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस), 14 अप्रैल (अंबेडकर जयंती), 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस), 2 अक्टूबर (महात्मा गांधी जयंती) और 15 नवंबर (जनजातीय गौरव दिवस) शामिल हैं। इन अवसरों पर पात्र बंदियों को समय पूर्व रिहाई या सजा में छूट दी जाती है।
सरकार का मानना है कि इस तरह के निर्णय से बंदियों को सुधार का अवसर मिलता है और वे जेल में अच्छा व्यवहार बनाए रखते हैं। इससे जेलों में अनुशासन और प्रशासनिक व्यवस्था बेहतर रहती है। साथ ही, रिहाई के बाद बंदियों के पुनर्वास में भी मदद मिलती है, जिससे वे समाज की मुख्यधारा में आसानी से लौट सकें।
गौरतलब है कि इससे पहले 26 जनवरी 2026 को भी 94 बंदियों को समय पूर्व रिहाई और सजा में छूट दी गई थी। ऐसे फैसलों से जेलों में बढ़ती भीड़ को नियंत्रित करने में भी मदद मिलती है। राज्य सरकार का यह फैसला उसकी सुधारात्मक और संवेदनशील नीति का हिस्सा है। जिसका उद्देश्य सिर्फ सजा देना नहीं, बल्कि अपराधियों को सुधारकर समाज के लिए उपयोगी नागरिक बनाना भी है।