रजनीगंधा ः आसानी से घर में लगाएं और कमाई करें, इसकी खुशबू स्वर्ग सा फील देगी
प्रकाशित: 18-07-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
गोपालदास बन्सल
शहडोल । दिन प्रतिदिन बदलते वक्त के साथ किसानों की खेती करने का तरीका भी बदल रहा है। ऐसे में किसान अब नई-नई फसलों को भी आजमा रहे हैं। ऐसी ही एक खेती होती है रजीनगंधा की, जो अपनी खुशबू की तरह किसानों के जीवन को भी खुशियों से महका रही है।. दरअसल, रजनीगंधा के हाई डिमांडिग फूल की वजह से अब मध्य प्रदेश के किसान भी इसकी जमकर खेती कर रहे हैं.
कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर मृगेंद्र सिंह बताते हैं, रजनीगंधा फूल भारत का नहीं है बल्कि ये मेक्सिको से यहां आया है, और आज के दौर में भारत के डिमांडिंग फूलों में से एक माना जाता है. रजनीगंधा एक सुगंधित फूल वाला पौधा है, भारत ही नहीं विदेशों में भी इस फूल को अपने सफेद रंग और मनमोहक खुशबू के लिए खूब पसंद किया जाता है. जैसा की नाम है 'रजनी गंधा', वैसा ही इसका काम है. ये रात के वक्त ज्यादा तेज सुगंध देता है. रजनीगंधा का वैज्ञानिक नाम पॉलिएंथिस ट्यूबरोसा है. इंग्लिश में इसे ट्यूबरोज और भारत में कुछ जगह पर गुलछड़ी के नाम से भी जाना जाता है. हालांकि, भारत में अधिकतर जगह पर रजनीगंधा के नाम से ही जानते हैं. कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर मृगेंद्र सिंह कहते हैं, '' रजनीगंधा की खेती के लिए बलुई दोमट मिट्टी बेहतर होती है. इसके साथ ही जहां अच्छी जल निकासी की व्यवस्था हो, तेज धूप मिलती हो, माइल्ड क्लाइमेट हो वहां रजनीगंधा का पौधा और फूल आसानी से लग जाते हैं. यानी न बहुत ज्यादा गर्मी पड़ती हो, न बहुत ज़्यादा ठंडी पड़ती हो और पर्याप्त मात्रा में पानी हो तो इसकी खेती सहज तरीके से की जा सकती है।. इस फूल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि ये एक कन्द वाली फसल है, इसकी खेती इसके कंद बल्ब्स के माध्यम से की जाती है. रजनीगंधा के कंद को लगाने के बाद इसे सिंचाई की जरूरत होती है, और बाद में नियमित तौर पर नमी बनाए रखना पड़ता है.' कृषि वैज्ञानिक बताते हैं, '' रजनीगंधा फूल की खासियत की बात करें तो सिंगल जो आते हैं इनमें पंखुड़ियों की केवल एक परत होती है, इसमें महक बहुत अच्छी होती है, परफ्यूम इंडस्ट्री में इसका काफी उपयोग होता है और इसकी शेल्फ लाइफ भी बहुत अच्छी होती है।
इसे लंबी दूरी तक आसानी से ट्रांसपोर्ट किया जा सकता है बिना किसी नुकसान. इसलिए कमर्शियली भी ये काफी बेहतर फूल माना जाता है.'' कृषि वैज्ञानिक आगे कहते हैं, '' दूसरी सबसे खास बात ये होती है कि इसमें डबल पंखुड़ियों की कई परतें होती हैं, जिससे फूल भरा हुआ दिखता है. इनका उपयोग ज्यादातर गुलदस्ते और सजावट के लिए किया जाता है.''
कृषि वैज्ञानिक बताते हैं, '' हमारे शहडोल जिले की क्लाइमेट इसके लिए बहुत उपयुक्त है. इसके पौधे थोड़े महंगे जरूर होते हैं लेकिन थोड़े से एरिया में भी इसकी खेती करके इससे दोहरा उत्पादन मिल सकता है, और फिर जब फूल मिलेगा तो आगे और पौधे उगाने के लिए इसके बल्ब भी मिल जाते हैं, जिसे अपने खेतों पर ही और फैला सकते हैं या बेच सकते हैं.''
फूलों का व्यापार करने वाले भालू माली बताते हैं, '' रजनीगंधा गुलाब से भी महंगा बिकता है, इसकी खास बात ये होती है कि इसकी हर समय डिमांड बनी रहती है. इसके फूल शादी ब्याह में, धार्मिक कार्यों के लिए, पूजा पाठ के लिए, घर को सजाने और डेकोशन में रखने के लिए अक्सर डिमांड में रहते हैं.''
कृषि वैज्ञानिक के मुताबिक , ' इस फूल की खास बात ये भी है कि गर्मियों में इसकी फ्लावरिंग बहुत आती है. उस समय फूल सबसे ज्यादा महंगे होते हैं. अपने क्षेत्र में शादी विवाह का सीजन भी वही होता है, अधिकतर उत्सव जो होते हैं वह गर्मियों में ही होते हैं, ऐसे में हमारे क्षेत्र के किसान अगर रजनीगंधा की खेती करें तो ये बहुत फायदेमंद साबित होता है।
रजनीगंधा फूल के धार्मिक महत्व को लेकर ज्योतिष आचार्य पंडित सुशील शुक्ला शास्त्राr बताते हैं, ' देवी देवताओं की पूजा में इसका उपयोग किया जाता है. भगवान भोलेनाथ और विष्णु जी की पूजा में इसके सफेद फूल चढ़ाए जाते हैं. फूल की सुंदरता और उसके खुशबू के कारण माता लक्ष्मी का भी ये प्रिय फूल माना जाता है. शुभ कार्यों और उत्सव से लेक मंदिरों की सजावट में भी रजनीगंधा के फूलों की मालाओं का भारी मात्रा में उपयोग किया जाता है. इसके फूल आसपास की नकारात्मक ऊर्जा को दूर करते हैं.''
शहडोल । दिन प्रतिदिन बदलते वक्त के साथ किसानों की खेती करने का तरीका भी बदल रहा है। ऐसे में किसान अब नई-नई फसलों को भी आजमा रहे हैं। ऐसी ही एक खेती होती है रजीनगंधा की, जो अपनी खुशबू की तरह किसानों के जीवन को भी खुशियों से महका रही है।. दरअसल, रजनीगंधा के हाई डिमांडिग फूल की वजह से अब मध्य प्रदेश के किसान भी इसकी जमकर खेती कर रहे हैं.
कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर मृगेंद्र सिंह बताते हैं, रजनीगंधा फूल भारत का नहीं है बल्कि ये मेक्सिको से यहां आया है, और आज के दौर में भारत के डिमांडिंग फूलों में से एक माना जाता है. रजनीगंधा एक सुगंधित फूल वाला पौधा है, भारत ही नहीं विदेशों में भी इस फूल को अपने सफेद रंग और मनमोहक खुशबू के लिए खूब पसंद किया जाता है. जैसा की नाम है 'रजनी गंधा', वैसा ही इसका काम है. ये रात के वक्त ज्यादा तेज सुगंध देता है. रजनीगंधा का वैज्ञानिक नाम पॉलिएंथिस ट्यूबरोसा है. इंग्लिश में इसे ट्यूबरोज और भारत में कुछ जगह पर गुलछड़ी के नाम से भी जाना जाता है. हालांकि, भारत में अधिकतर जगह पर रजनीगंधा के नाम से ही जानते हैं. कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर मृगेंद्र सिंह कहते हैं, '' रजनीगंधा की खेती के लिए बलुई दोमट मिट्टी बेहतर होती है. इसके साथ ही जहां अच्छी जल निकासी की व्यवस्था हो, तेज धूप मिलती हो, माइल्ड क्लाइमेट हो वहां रजनीगंधा का पौधा और फूल आसानी से लग जाते हैं. यानी न बहुत ज्यादा गर्मी पड़ती हो, न बहुत ज़्यादा ठंडी पड़ती हो और पर्याप्त मात्रा में पानी हो तो इसकी खेती सहज तरीके से की जा सकती है।. इस फूल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि ये एक कन्द वाली फसल है, इसकी खेती इसके कंद बल्ब्स के माध्यम से की जाती है. रजनीगंधा के कंद को लगाने के बाद इसे सिंचाई की जरूरत होती है, और बाद में नियमित तौर पर नमी बनाए रखना पड़ता है.' कृषि वैज्ञानिक बताते हैं, '' रजनीगंधा फूल की खासियत की बात करें तो सिंगल जो आते हैं इनमें पंखुड़ियों की केवल एक परत होती है, इसमें महक बहुत अच्छी होती है, परफ्यूम इंडस्ट्री में इसका काफी उपयोग होता है और इसकी शेल्फ लाइफ भी बहुत अच्छी होती है।
इसे लंबी दूरी तक आसानी से ट्रांसपोर्ट किया जा सकता है बिना किसी नुकसान. इसलिए कमर्शियली भी ये काफी बेहतर फूल माना जाता है.'' कृषि वैज्ञानिक आगे कहते हैं, '' दूसरी सबसे खास बात ये होती है कि इसमें डबल पंखुड़ियों की कई परतें होती हैं, जिससे फूल भरा हुआ दिखता है. इनका उपयोग ज्यादातर गुलदस्ते और सजावट के लिए किया जाता है.''
कृषि वैज्ञानिक बताते हैं, '' हमारे शहडोल जिले की क्लाइमेट इसके लिए बहुत उपयुक्त है. इसके पौधे थोड़े महंगे जरूर होते हैं लेकिन थोड़े से एरिया में भी इसकी खेती करके इससे दोहरा उत्पादन मिल सकता है, और फिर जब फूल मिलेगा तो आगे और पौधे उगाने के लिए इसके बल्ब भी मिल जाते हैं, जिसे अपने खेतों पर ही और फैला सकते हैं या बेच सकते हैं.''
फूलों का व्यापार करने वाले भालू माली बताते हैं, '' रजनीगंधा गुलाब से भी महंगा बिकता है, इसकी खास बात ये होती है कि इसकी हर समय डिमांड बनी रहती है. इसके फूल शादी ब्याह में, धार्मिक कार्यों के लिए, पूजा पाठ के लिए, घर को सजाने और डेकोशन में रखने के लिए अक्सर डिमांड में रहते हैं.''
कृषि वैज्ञानिक के मुताबिक , ' इस फूल की खास बात ये भी है कि गर्मियों में इसकी फ्लावरिंग बहुत आती है. उस समय फूल सबसे ज्यादा महंगे होते हैं. अपने क्षेत्र में शादी विवाह का सीजन भी वही होता है, अधिकतर उत्सव जो होते हैं वह गर्मियों में ही होते हैं, ऐसे में हमारे क्षेत्र के किसान अगर रजनीगंधा की खेती करें तो ये बहुत फायदेमंद साबित होता है।
रजनीगंधा फूल के धार्मिक महत्व को लेकर ज्योतिष आचार्य पंडित सुशील शुक्ला शास्त्राr बताते हैं, ' देवी देवताओं की पूजा में इसका उपयोग किया जाता है. भगवान भोलेनाथ और विष्णु जी की पूजा में इसके सफेद फूल चढ़ाए जाते हैं. फूल की सुंदरता और उसके खुशबू के कारण माता लक्ष्मी का भी ये प्रिय फूल माना जाता है. शुभ कार्यों और उत्सव से लेक मंदिरों की सजावट में भी रजनीगंधा के फूलों की मालाओं का भारी मात्रा में उपयोग किया जाता है. इसके फूल आसपास की नकारात्मक ऊर्जा को दूर करते हैं.''