ग्रामीण क्षेत्र बस सेवाओं से वंचित
प्रकाशित: 19-07-2026 | लेखक: संपादकीय टीम
भारत के महानगरों में तेजी से बढ़ती जनसंख्या, निजी वाहनों की संख्या और अनियोजित शहरीकरण के कारण सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था अनेक चुनौतियों का सामना कर रही है। इस संदर्भ में मेरा मानना है कि दिल्ली की परिवहन व्यवस्था पर व्यापक अनुसंधान किया जाना चाहिए और इसे देश के अन्य महानगरों के लिए एक मॉडल के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। सार्वजनिक परिवहन केवल एक यात्रा का साधन नहीं है, बल्कि यह सामाजिक न्याय, आर्थिक विकास, पर्यावरण संरक्षण और नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता से जुड़ा हुआ विषय है। यदि परिवहन व्यवस्था नागरिकों की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित की जाए तो इसका लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग, विशेषकर गरीब और निम्न आय वर्ग के लोगों को मिलेगा। दिल्ली में मेट्रो और बस नेटवर्क ने सार्वजनिक परिवहन को नई दिशा दी है, लेकिन आज भी अनेक मलिन बस्तियां, पुनर्वास कॉलोनियां और बाहरी ग्रामीण क्षेत्र पर्याप्त बस सेवाओं से वंचित हैं। इन क्षेत्रों में रहने वाले लाखों लोगों को रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। नियमित और सुलभ बस सेवा उपलब्ध न होने के कारण लोग निजी वाहनों, साझा ऑटो या अन्य महंगे साधनों पर निर्भर रहते हैं, जिससे उनकी आय का एक बड़ा हिस्सा केवल यात्रा पर खर्च हो जाता है। विश्व के अनेक शहरों जैसे सिंगापुर, लंदन, टोक्यो, सियोल, बोगोटा और कुरितिबा ने यह सिद्ध किया है कि यदि बस सेवाओं की योजना वैज्ञानिक ढंग से बनाई जाए, समयबद्ध संचालन हो और यात्रियों की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए, तो बड़ी संख्या में लोग निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने लगते हैं। इन शहरों में बस और मेट्रो एक-दूसरे के पूरक हैं तथा डिजिटल तकनीक, एकीकृत टिकट प्रणाली, जीपीएस आधारित सूचना, महिला सुरक्षा और दिव्यांगजन के अनुकूल सुविधाओं ने सार्वजनिक परिवहन को अधिक प्रभावी बनाया है। दिल्ली में भी बस मार्गों का निर्धारण वर्तमान जनसंख्या, नई कॉलोनियों, मलिन बस्तियों, ग्रामीण क्षेत्रों, औद्योगिक क्षेत्रों, विद्यालयों और अस्पतालों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। जहां सड़कें संकरी हैं वहां छोटी इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जाए और जहां यात्रियों की संख्या अधिक है वहां बड़ी वातानुकूलित बसें चलाई जाएं। प्रत्येक बस में एयर कंडीशनिंग, सीसीटीवी कैमरे, जीपीएस, पैनिक बटन, डिजिटल सूचना प्रणाली तथा वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए। दिल्ली सरकार द्वारा शुरू की गई छोटी इलेक्ट्रिक बसें एक सराहनीय पहल हैं, लेकिन इनके मार्ग अभी सीमित हैं। इनका विस्तार विशेष रूप से उन क्षेत्रों तक किया जाना चाहिए जहां सार्वजनिक परिवहन की सबसे अधिक आवश्यकता है।
-वीरेंद्र कुमार जाटव,
नई दिल्ली।
-वीरेंद्र कुमार जाटव,
नई दिल्ली।