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शहरों को प्रकृति से जोड़ने का सशक्त ब्लू-प्रिंट है ‘नगर वन योजना': मुख्यमंत्री यादव

प्रकाशित: 04-06-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
भोपाल (ब्यूरो प्रमुख )। डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में हरित एवं सतत शहरी विकास को नई दिशा मिली है। वन विभाग द्वारा संचालित ‘नगर वन योजना' जन-भागीदारी आधारित मॉडल के रूप में विकसित होकर पर्यावरण संरक्षण और शहरी विकास के बीच संतुलन स्थापित करने की प्रभावी पहल बन गई है। वन विभाग ‘नगर वन योजना' को जन-आंदोलन का स्वरूप देते हुए इसे जन-भागीदारी आधारित मॉडल के रूप में विकसित कर रहा है। शहरी विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में ‘नगर वन योजना' एक दूरदर्शी और प्रभावशाली पहल के रूप में उभरकर सामने आई है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण, घटते हरित आवरण और बढ़ते पर्यावरणीय दबावों के बीच यह योजना शहरों को प्राकृतिक हरियाली से जोड़ने का एक सशक्त ब्लू-प्रिंट है।
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा वर्ष 2020 में प्रारंभ की गई इस योजना के अंतर्गत नगर वनों और नगर वाटिकाओं का विकास कर शहरी क्षेत्रों में स्वच्छ, स्वस्थ और पर्यावरण-अनुकूल वातावरण निर्मित किया जा रहा है। प्रदेश के प्रमुख शहरों और जिला मुख्यालयों के समीप विकसित किए जा रहे नगर वन, नागरिकों को प्राकृतिक वातावरण का अनुभव कराने के साथ पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रेरित भी कर रहे हैं। योजना का प्रमुख उद्देश्य शहरों में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ाने के साथ शहरवासियों को प्रकृति के करीब लाकर पर्यावरण जागरूकता और इको-टूरिज्म को भी बढ़ावा देना है। यह योजना केवल पौध-रोपण तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य नागरिकों, विद्यार्थियों और स्थानीय समुदायों को प्रकृति से जोड़ते हुए पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता विकसित करना भी है। ‘नगर वन योजना' से शहरों में हरित क्षेत्रों का विस्तार, वायु प्रदूषण में कमी, शहरी तापमान के दुष्प्रभावों पर नियंत्रण तथा जैव-विविधता संरक्षण को बढ़ावा दिया जा रहा है। यह पहल नागरिकों को मनोरंजन, शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रकृति के साथ आत्मीय जुड़ाव के लिए हरित सार्वजनिक स्थल उपलब्ध करा रही है। ‘नगर वन योजना' में प्रदेश में अब तक 94 नगर वन एवं नगर वाटिकाओं के विकास को स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है। इनका कुल क्षेत्रफल लगभग 3141 हेक्टेयर है। योजना का विस्तार प्रदेश के विभिन्न वन वृत्तों और जिलों में किया गया है, जिससे शहरी क्षेत्रों में हरित अवसंरचना का व्यापक नेटवर्क विकसित हो रहा है। योजना में विकसित किए जा रहे नगर वनों में पौध-रोपण, फेंसिंग, मिट्टी और नमी संरक्षण कार्य, जन-उपयोगी संरचनाएं, मनोरंजन सुविधाएं तथा पर्यावरण शिक्षा से जुड़ी गतिविधियों को समाहित किया गया है। प्रत्येक नगर वन को स्थानीय भौगोलिक, पारिस्थितिकीय और सामाजिक आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित किया जा रहा है। नगर वनों को नागरिकों की सुविधा, सहभागिता और पर्यावरण शिक्षा को ध्यान में रखते हुए बहुआयामी सुविधाओं से विकसित किया जा रहा है। इनमें एंट्री गेट, वॉकिंग ट्रैक, आर.सी.सी. सड़कें, ब्रिज, स व्यू-पॉइंट्स, वॉच टॉवर, साइन बोर्ड, तालाब, जल संरचनाएं, गेबियन संरचनाएं, पानी की टंकियां, प्रकृति पथ, खुले में बैठने की व्यवस्था, गज़ेबो, टॉइलेट्स और पेयजल सुविधाएं शामिल हैं। कई नगर वनों में बटरफ्लाई गार्डन, नक्षत्र वाटिका, औषधीय पौधों के क्षेत्र, मियावाकी तकनीक से पौधरोपण, प्रकृति व्याख्या केंद्र और जैव विविधता प्रदर्शन क्षेत्र भी विकसित किए गए हैं। बच्चों और युवाओं के लिए किड्स जोन, जिप लाइन, नेचर ट्रेल और अन्य मनोरंजक गतिविधियों की व्यवस्था की गई है, जिससे ये स्थल पर्यावरण शिक्षा और इको-टूरिज्म के महत्वपूर्ण केंद्र बन रहे हैं।
भोपाल के जैतपुर और लहारपुर नगर वन, उज्जैन का नीलगंगा नगर वन, इंदौर के देवगुराड़िया और आई.आई.टी. क्षेत्र के नगर वन, जबलपुर का शंकरगढ़ हिल्स नगर वन, देवास का कैलाशनगर-बागली और दीवतपुर नगर वन, नरसिंहपुर का नर्मदा खेल पार्क नगर वन, मंडला का मंडलेश्वर नगर वन तथा उमरिया, नीमच, श्योपुर, सागर, खंडवा, खरगोन, आलीराजपुर, बैतूल, छिंदवाड़ा और अन्य जिलों में विकसित हो रहे नगर वन इस योजना की सफलता की मिसाल बन रहे हैं। इन नगर वनों में स्थानीय जैव विविधता के संरक्षण के साथ जल संरक्षण, भूमि उपचार, हरित पर्यटन और सामुदायिक सहभागिता को विशेष महत्व दिया गया है। नगर वन अब स्थानीय नागरिकों, विद्यार्थियों और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन चुके हैं।
‘नगर वन योजना' की सफलता में जन-सहभागिता की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वन विभाग द्वारा समय-समय पर वृक्षारोपण अभियान, पर्यावरण जागरूकता कार्पाम, प्रकृति भ्रमण, छात्र गतिविधियां और सामुदायिक कार्पाम आयोजित किए जाते हैं। ‘हरित सेवा का श्रम अभियान' के माध्यम से जन-प्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों को पौध-रोपण और संरक्षण गतिविधियों से जोड़ा गया है।
प्रदेश में ‘एक पेड़ माँ के नाम' अभियान 2.0 के तहत भी नगर वनों में व्यापक पौध-रोपण किया गया। इस अभियान से पर्यावरण संरक्षण के साथ प्रकृति के प्रति भावनात्मक जुड़ाव का संदेश दिया गया। बड़ी संख्या में जन-प्रतिनिधियों, सामाजिक संस्थाओं, युवाओं और महिलाओं ने इसमें सहभागिता की।
नगर वन अब केवल हरित क्षेत्र नहीं रह गए हैं, बल्कि स्वास्थ्य और जीवन शैली सुधार के केंद्र के रूप में भी विकसित हो रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर प्रदेश के अनेक नगर वनों में ‘हरित योग' कार्पाम आयोजित किए गए, जिनमें बड़ी संख्या में नागरिकों ने भाग लिया। प्राकृतिक वातावरण में आयोजित योग एवं ध्यान गतिविधियों ने स्वास्थ्य, प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता को और अधिक सशक्त बनाया है।
‘नगर वन योजना' शहरी क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन, जल संरक्षण, जनस्वास्थ्य और नागरिक सहभागिता का एक सशक्त मॉडल बनकर उभरी है। यह योजना न केवल शहरों में हरित आवरण बढ़ा रही है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रकृति के संरक्षण का मजबूत आधार भी तैयार कर रही है।
प्रदेश सरकार और वन विभाग के सतत प्रयासों से ‘नगर वन योजना' आज शहरी विकास और पर्यावरणीय संतुलन का सफल उदाहरण बन चुकी है। प्रदेश सरकार द्वारा योजना के निरंतर विस्तार की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इससे प्रदेश हरित, पर्यावरण-अनुकूल और सतत शहरी विकास के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में अपनी पहचान और मजबूत कर रहा है।