नरेन्द्र मोदी सरकार के 12 वर्ष, भाजपा उपलब्धियां गिनाएगी
प्रकाशित: 04-06-2026 | लेखक: संपादकीय टीम
अशोक उपाध्याय
भारतीय जनता पार्टी ने नरेन्द्र मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने पर 5 से 21 जून तक देशव्यापी जनसंपर्क अभियान चलाने का फैसला किया है। पार्टी नेता गांवों में जाकर सरकार की उपलब्धियां बताएंगे और लोगों से संवाद करेंगे। इस दौरान संगठन विस्तार, बूथ स्तर को मजबूत करने तथा युवाओं, महिलाओं और कई वर्गों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।
भाजपा ने संगठन के स्तर पर कई बड़े कार्पामों की रूपरेखा तय कर दी है। सोमवार को दिल्ली में भाजपा मुख्यालय में सभी राज्य के प्रदेश अध्यक्षों के साथ एक बैठक में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों और जनसंपर्क अभियानों की विस्तृत रूपरेखा पर चर्चा की।
जनसंपर्क अभियान के तहत पार्टी नेताओं को प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में 100 प्रभावशाली मतदाताओं से संपर्क कर उनकी राय और सुझाव लेने की जिम्मेदारी भी दी गई है। यह कार्यक्रम 23 जून से पहले समाप्त होगा, जिसे भाजपा पूरे देश में ‘बलिदान दिवस' के रूप में मनाएगी।
इस बैठक में संगठनात्मक कार्यों की समीक्षा और राज्यों में पार्टी की गतिविधियों पर भी मंथन हुआ। आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों को लेकर पार्टी ने नई रणनीतियों पर चर्चा की। साथ ही संगठन के विस्तार और बूथ स्तर तक पार्टी को और मजबूत बनाने की दिशा में कदम उठाने पर जोर दिया गया।
भाजपा की इस बड़ी बैठक में सोशल मीडिया पर निर्भरता कम करने और पार्टी की पारंपरिक ताकत घर-घर संपर्क अभियान को फिर से मजबूती से लागू करने पर जोर दिया गया। बैठक में पार्टी ने फैसला लिया कि सभी संपर्क अभियानों में पार्टी, राज्य सरकारों और केंद्र सरकार के विकास कार्यों को प्रमुखता दी जाए। साथ ही कार्यकर्ताओं से प्राप्त सूचनाओं और फीडबैक पर ही भरोसा रखा जाए।
राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने सभी प्रदेश अध्यक्षों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि वे अपने-अपने राज्यों में कार्यकर्ताओं की समस्याओं और चिंताओं का ध्यान रखें तथा उनमें किसी भी तरह की निराशा या हताशा का भाव नहीं आने देना चाहिए।यह बैठक पार्टी को आगामी चुनावी वर्ष में पूर्ण रूप से तैयार करने और संगठन को जमीनी स्तर तक मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
भाजपा ने अगले वर्ष होने वाले सात राज्यों के विधानसभा चुनावों की तैयारियां शुरू कर दी हैं। वर्ष 2027 में गोवा, गुजरात, मणिपुर, पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं। इनमें पंजाब और हिमाचल प्रदेश को छोड़कर बाकी पांच राज्यों में भाजपा सत्ता में है।
उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल में विस्तार के बाद अब पार्टी का पूरा ध्यान संगठन में बदलाव को लेकर है। विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा अपने राजनीतिक मंतव्यों को दुरुस्त करने के लिए प्रदेश इकाई में बड़े स्तर पर सांगठनिक बदलाव करने पर मंथन कर रही हैं।उम्मीद है कि जल्द ही नई प्रदेश ईकाई की घोषणा की जा सकती है। भाजपाइस बार उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में और आाढामक तेवर के साथ उतरने की तैयारी में हैं। ऐसे में संगठन में कई बड़े बदलावों को लेकर कयास लग रहे हैं। पार्टी में संगठन के स्तर पर पुराने दिग्गज नेताओं के साथ कई नए चेहरों को आगे लाना आदि चार-पांच म्द्दे अहम है। इनमें अधिक से अधिकतर युवाओं को पार्टी के साथ कैसे जोड़ा जाए, महिलाओं का सशक्तिकरण कैसे हो, अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति और अधिक शक्ति के साथ कैसे आगे बढ़ें और पेशेवर लोग कैसे आगे बढ़ें जैसे मुद्दे शामिल हैं के नाम पर भी मंथन कर रही है ताकि ऐसी टीम तैयार हो सके जिसमें अनुभव के साथ नए नेताओं के जोश को भी शामिल किया जा सके।
भाजपा की नई प्रदेश इकाई में पार्टी की ओर से पिछड़े, गैर यादव ओबीसी, दलितों और युवा मतदाताओं को ध्यान में रखते हुए ख़ासतौर पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है ताकि प्रदेश के सियासी और जातीय समीकरणों को भी साधा जा सके। हर क्षेत्र में ऐसे चेहरों को आगे लाने की कोशिश की जा रही है जो अपने क्षेत्र में पार्टी के संगठन को नई ऊंचाई हासिल करा सकें।
जनसंपर्क अभियान के लिए भाजपा नित नए प्रयोग करती रही है। अटल आडवाणी के युग भाजपा ने रथ यात्राएं निकाली। राष्ट्रीय स्तर पर निकाली गई रथ यात्राओं को नेतृत्व स्वयं लालकृष्ण आडवाणी ने किया। फिर प्रदेश स्तर पर मुख्यमंत्री रहते हुए मोदी ने भी गुजरात गौरव को लेकर रथ यात्राएं निकाली जो काफी लोकप्रिय रही। अन्य भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी इसका अनुसरण किया और रथयात्रा जनसंपर्क के लिए ही सशक्त माध्यम नहीं बना बल्कि भाजपा को केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टी बनाने में अहम साबित हुआ।
नरेन्द्र मोदी के केंद्र में सत्तारूढ़ होने के बाद भाजपा को संगठनात्मक स्तर पर मजबूत बनाने के सुनियोजित तरीके से शहर से लेकर गांव मोहल्ले को साथ लेकर चलने के लिए बूथ स्तर पर ऐसा तंत्र स्थापित किया गया जिससे सीधे संपर्क साधना आसान हो गया है।
नरेन्द्र मोदी भाजपा के सर्वोच्च नेता हैं और उनकी लोकप्रियता ने पार्टी को यत्र तत्र सर्वत्र विराजमान करने में मदद की है। बंगाल का किला फतह करने में नरेन्द्र मोदी की लोकप्रियता भरोसे की कसौटी पर खरी उतरी और उसने वैचारिक और सैद्धांतिक तौर पर भाजपा को स्थापित किया है। भाजपा ने इस मुकाम को हासिल करने के लिए पहले वामदलों और फिर तृणमूल कांग्रेस के साथ लंबी लड़ाई लडी है। उसके कार्यकर्ताओं और समर्थकों की शहादतों की लंबी फेहरिस्त है।
नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और अमित शाह की चाणक्य नीति ने भाजपा के तेजी से विस्तार की नई गाथा लिखी है। मोदी-शाह की जोड़ी ने भाजपा के संगठन को जिस तरह से व्यवस्थित किया है और विपक्षी दलों को जैसे एक-एक करके साधा है उसने राजनीति के दिग्गजों को अचरज में डाल दिया है।
(लेखक पूर्व संपादक, यूनीवार्ता हैं।)
भारतीय जनता पार्टी ने नरेन्द्र मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने पर 5 से 21 जून तक देशव्यापी जनसंपर्क अभियान चलाने का फैसला किया है। पार्टी नेता गांवों में जाकर सरकार की उपलब्धियां बताएंगे और लोगों से संवाद करेंगे। इस दौरान संगठन विस्तार, बूथ स्तर को मजबूत करने तथा युवाओं, महिलाओं और कई वर्गों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।
भाजपा ने संगठन के स्तर पर कई बड़े कार्पामों की रूपरेखा तय कर दी है। सोमवार को दिल्ली में भाजपा मुख्यालय में सभी राज्य के प्रदेश अध्यक्षों के साथ एक बैठक में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों और जनसंपर्क अभियानों की विस्तृत रूपरेखा पर चर्चा की।
जनसंपर्क अभियान के तहत पार्टी नेताओं को प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में 100 प्रभावशाली मतदाताओं से संपर्क कर उनकी राय और सुझाव लेने की जिम्मेदारी भी दी गई है। यह कार्यक्रम 23 जून से पहले समाप्त होगा, जिसे भाजपा पूरे देश में ‘बलिदान दिवस' के रूप में मनाएगी।
इस बैठक में संगठनात्मक कार्यों की समीक्षा और राज्यों में पार्टी की गतिविधियों पर भी मंथन हुआ। आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों को लेकर पार्टी ने नई रणनीतियों पर चर्चा की। साथ ही संगठन के विस्तार और बूथ स्तर तक पार्टी को और मजबूत बनाने की दिशा में कदम उठाने पर जोर दिया गया।
भाजपा की इस बड़ी बैठक में सोशल मीडिया पर निर्भरता कम करने और पार्टी की पारंपरिक ताकत घर-घर संपर्क अभियान को फिर से मजबूती से लागू करने पर जोर दिया गया। बैठक में पार्टी ने फैसला लिया कि सभी संपर्क अभियानों में पार्टी, राज्य सरकारों और केंद्र सरकार के विकास कार्यों को प्रमुखता दी जाए। साथ ही कार्यकर्ताओं से प्राप्त सूचनाओं और फीडबैक पर ही भरोसा रखा जाए।
राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने सभी प्रदेश अध्यक्षों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि वे अपने-अपने राज्यों में कार्यकर्ताओं की समस्याओं और चिंताओं का ध्यान रखें तथा उनमें किसी भी तरह की निराशा या हताशा का भाव नहीं आने देना चाहिए।यह बैठक पार्टी को आगामी चुनावी वर्ष में पूर्ण रूप से तैयार करने और संगठन को जमीनी स्तर तक मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
भाजपा ने अगले वर्ष होने वाले सात राज्यों के विधानसभा चुनावों की तैयारियां शुरू कर दी हैं। वर्ष 2027 में गोवा, गुजरात, मणिपुर, पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं। इनमें पंजाब और हिमाचल प्रदेश को छोड़कर बाकी पांच राज्यों में भाजपा सत्ता में है।
उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल में विस्तार के बाद अब पार्टी का पूरा ध्यान संगठन में बदलाव को लेकर है। विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा अपने राजनीतिक मंतव्यों को दुरुस्त करने के लिए प्रदेश इकाई में बड़े स्तर पर सांगठनिक बदलाव करने पर मंथन कर रही हैं।उम्मीद है कि जल्द ही नई प्रदेश ईकाई की घोषणा की जा सकती है। भाजपाइस बार उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में और आाढामक तेवर के साथ उतरने की तैयारी में हैं। ऐसे में संगठन में कई बड़े बदलावों को लेकर कयास लग रहे हैं। पार्टी में संगठन के स्तर पर पुराने दिग्गज नेताओं के साथ कई नए चेहरों को आगे लाना आदि चार-पांच म्द्दे अहम है। इनमें अधिक से अधिकतर युवाओं को पार्टी के साथ कैसे जोड़ा जाए, महिलाओं का सशक्तिकरण कैसे हो, अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति और अधिक शक्ति के साथ कैसे आगे बढ़ें और पेशेवर लोग कैसे आगे बढ़ें जैसे मुद्दे शामिल हैं के नाम पर भी मंथन कर रही है ताकि ऐसी टीम तैयार हो सके जिसमें अनुभव के साथ नए नेताओं के जोश को भी शामिल किया जा सके।
भाजपा की नई प्रदेश इकाई में पार्टी की ओर से पिछड़े, गैर यादव ओबीसी, दलितों और युवा मतदाताओं को ध्यान में रखते हुए ख़ासतौर पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है ताकि प्रदेश के सियासी और जातीय समीकरणों को भी साधा जा सके। हर क्षेत्र में ऐसे चेहरों को आगे लाने की कोशिश की जा रही है जो अपने क्षेत्र में पार्टी के संगठन को नई ऊंचाई हासिल करा सकें।
जनसंपर्क अभियान के लिए भाजपा नित नए प्रयोग करती रही है। अटल आडवाणी के युग भाजपा ने रथ यात्राएं निकाली। राष्ट्रीय स्तर पर निकाली गई रथ यात्राओं को नेतृत्व स्वयं लालकृष्ण आडवाणी ने किया। फिर प्रदेश स्तर पर मुख्यमंत्री रहते हुए मोदी ने भी गुजरात गौरव को लेकर रथ यात्राएं निकाली जो काफी लोकप्रिय रही। अन्य भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी इसका अनुसरण किया और रथयात्रा जनसंपर्क के लिए ही सशक्त माध्यम नहीं बना बल्कि भाजपा को केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टी बनाने में अहम साबित हुआ।
नरेन्द्र मोदी के केंद्र में सत्तारूढ़ होने के बाद भाजपा को संगठनात्मक स्तर पर मजबूत बनाने के सुनियोजित तरीके से शहर से लेकर गांव मोहल्ले को साथ लेकर चलने के लिए बूथ स्तर पर ऐसा तंत्र स्थापित किया गया जिससे सीधे संपर्क साधना आसान हो गया है।
नरेन्द्र मोदी भाजपा के सर्वोच्च नेता हैं और उनकी लोकप्रियता ने पार्टी को यत्र तत्र सर्वत्र विराजमान करने में मदद की है। बंगाल का किला फतह करने में नरेन्द्र मोदी की लोकप्रियता भरोसे की कसौटी पर खरी उतरी और उसने वैचारिक और सैद्धांतिक तौर पर भाजपा को स्थापित किया है। भाजपा ने इस मुकाम को हासिल करने के लिए पहले वामदलों और फिर तृणमूल कांग्रेस के साथ लंबी लड़ाई लडी है। उसके कार्यकर्ताओं और समर्थकों की शहादतों की लंबी फेहरिस्त है।
नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और अमित शाह की चाणक्य नीति ने भाजपा के तेजी से विस्तार की नई गाथा लिखी है। मोदी-शाह की जोड़ी ने भाजपा के संगठन को जिस तरह से व्यवस्थित किया है और विपक्षी दलों को जैसे एक-एक करके साधा है उसने राजनीति के दिग्गजों को अचरज में डाल दिया है।
(लेखक पूर्व संपादक, यूनीवार्ता हैं।)