दिल्ली के 76 प्रतिशत क्षेत्रों में छह या उससे अधिक वर्षों तक देखी गई भीषण गर्मी
प्रकाशित: 04-06-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
नई दिल्ली, (भाषा)। दिल्ली के लगभग 76 प्रतिशत क्षेत्रों में 2015 से 2024 के बीच छह या उससे अधिक वर्षों तक भीषण गर्मी देखी गई। इनमें से अधिकांश इलाके निर्माण स्थल, बाजार और स्कूल वाले हैं जहां बार-बार अत्यधिक गर्मी दर्ज की गई। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) की एक रिपोर्ट से यह जानकारी सामने आई है।
मेकिंग डेल्ही हीट-रेजिलिएंट: ए रोडमैप विद द फोकस ऑन वल्नरेबल ग्रुप्स शीर्षक रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले एक दशक के दौरान दिल्ली के कुल क्षेत्रफल का 98.72 प्रतिशत हिस्सा कम से कम एक बार अत्यधिक गर्मी की निर्धारित सीमा को पार कर चुका है।अध्ययन के अनुसार, 2015 से 2024 के बीच दिल्ली में 92 प्रतिशत निर्माण परियोजनाएं ऐसे क्षेत्रों में थीं जहां भूमि सतह का तापमान कम से कम एक बार 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंचा। वहीं, 77 प्रतिशत परियोजनाएं उन इलाकों में हैं जो बार-बार अत्यधिक गर्मी की चपेट में रहे।रिपोर्ट में कहा गया है कि अध्ययन में शामिल प्रमुख मंडियों सहित 643 बाजारों में से लगभग 84 प्रतिशत ऐसे क्षेत्रों में स्थित हैं जो बार बार भीषण गर्मी से प्रभावित हुए। इसी तरह, करीब 13.2 लाख लोगों की आबादी वाली 76 प्रतिशत अनधिकृत बस्तियां भी अत्यधिक गर्मी की चपेट वाले इलाकों में हैं।अध्ययन में यह भी पाया गया कि सर्वेक्षण में शामिल।,066 स्कूल में से 80 प्रतिशत भीषण गर्मी से प्रभावित क्षेत्रों में हैं। रिपोर्ट में मटियाला, ककरौला, नरेला और चांदनी चौक समेत 35 वार्ड को बहुत अधिक या उच्च समेकित संवेदनशीलता वाले क्षेत्रों के रूप में चिह्नित किया गया है।रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली के 272 वार्ड (परिसीमन से पहले की संख्या) में से 153 वार्ड ऐसे हैं जहां 75 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र बार-बार अत्यधिक गर्मी की चपेट में रहे। इनमें से 82 वार्ड में 90 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र प्रभावित हैं, जबकि 17 वार्ड ऐसे हैं जिनका पूरा क्षेत्र भीषण गर्मी से प्रभावित रहा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि बढ़ते तापमान के कारण दिल्ली एक गहराते संकट का सामना कर रही है। वर्ष 2025 में महसूस होने वाला तापमान (फील्स-लाइक टेम्परेचर) 52 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने वर्ष 2024 में दिल्ली में भीषण गर्मी से संबंधित 25 मौतों की सूचना दी थी, जबकि स्वतंत्र रिपोर्ट में यह संख्या 55 से अधिक बताई गई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली अब एक अगल तरह की और अधिक गर्म सामान्य स्थिति की ओर बढ़ रही है। पिछले चार दशकों के दौरान वार्षिक औसत अधिकतम और न्यूनतम तापमान, दोनों में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है।अध्ययन के अनुसार, रात के समय "ंडा होने की दिल्ली की क्षमता में नौ प्रतिशत की कमी आई है।
राष्ट्रीय राजधानी का मुख्य शहरी क्षेत्र बाहरी शहरी क्षेत्रों की तुलना में 3.8 डिग्री सेल्सियस कम "ंडा हो पाता है, जिसके कारण घनी आबादी और कंक्रीट वाले इलाकों में चौबीस घंटे गर्मी बनी रहती है।
रिपोर्ट में पुरानी दिल्ली और उससे जुड़े क्षेत्र, करोल बाग, कश्मीरी गेट अंतरराज्यीय बस अड्डा और आसपास का इलाका, कनॉट प्लेस का इनर सर्कल, उत्तम नगर, पालम, डाबरी, नजफगढ़, कंझावला, बुद्ध विहार, बवाना और नरेला को लगातार भीषण गर्मी से प्रभावित क्षेत्रों में शामिल किया गया है।
इसके अलावा समयपुर बादली, भलस्वा, जहांगीरपुरी, बुराड़ी, शाहदरा, भजनपुरा, करावल नगर, गाजीपुर औद्योगिक क्षेत्र, बदरपुर, मदनपुर खादर, ओखला औद्योगिक क्षेत्र, तुगलकाबाद, संगम विहार, महिपालपुर, आया नगर, भीकाजी कामा प्लेस, एम्स, आर.के. पुरम, कोटला मुबारकपुर, सराय काले खां तथा ग्रीन पार्क, ग्रेटर कैलाश, ईस्ट ऑफ कैलाश और लाजपत नगर के कुछ हिस्सों को भी अत्यधिक गर्मी से प्रभावित क्षेत्रों के रूप में चिह्नित किया गया है।
अध्ययन में पाया गया कि बवाना, मायापुरी, मुंडका, आनंद पर्वत और मंगोलपुरी जैसे औद्योगिक क्षेत्र अत्यधिक गर्मी से प्रभावित केंद्र बनकर उभरे हैं। कई रिहायशी इलाकों में भी भूमि सतह का तापमान 44 से 50 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया।
रिपोर्ट में भारत मंडपम, ईस्ट किदवई नगर आवासीय परिसर, सफदरजंग स्थित वर्ल्ड ट्रेड सेंटर और नेताजी नगर जैसी नई या पुनर्विकसित परियोजनाओं को भी भीषण गर्मी से प्रभावित बताया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, गर्मियों के दौरान इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और खाली खेत तथा बंजर क्षेत्रों में भूमि सतह का तापमान 60.77 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।
अध्ययन में कहा गया है कि दिल्ली का हरित क्षेत्र वर्ष 2014 में 25.36 प्रतिशत था, जो 2024 में घटकर 14.14 प्रतिशत रह गया। इसी अवधि में जलाशयो का क्षेत्रफल भी 1.25 प्रतिशत से घटकर 0.99 प्रतिशत हो गया।
रिपोर्ट में कहा गया है कि शहर के लगभग 35 प्रतिशत मौजूदा हरित और जल क्षेत्रों पर भी अत्यधिक गर्मी का असर है। इससे संकेत मिलता है कि केवल हरित क्षेत्र बढ़ाना ही नहीं, बल्कि उनकी गुणवत्ता सुधारना भी जरूरी है।
मेकिंग डेल्ही हीट-रेजिलिएंट: ए रोडमैप विद द फोकस ऑन वल्नरेबल ग्रुप्स शीर्षक रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले एक दशक के दौरान दिल्ली के कुल क्षेत्रफल का 98.72 प्रतिशत हिस्सा कम से कम एक बार अत्यधिक गर्मी की निर्धारित सीमा को पार कर चुका है।अध्ययन के अनुसार, 2015 से 2024 के बीच दिल्ली में 92 प्रतिशत निर्माण परियोजनाएं ऐसे क्षेत्रों में थीं जहां भूमि सतह का तापमान कम से कम एक बार 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंचा। वहीं, 77 प्रतिशत परियोजनाएं उन इलाकों में हैं जो बार-बार अत्यधिक गर्मी की चपेट में रहे।रिपोर्ट में कहा गया है कि अध्ययन में शामिल प्रमुख मंडियों सहित 643 बाजारों में से लगभग 84 प्रतिशत ऐसे क्षेत्रों में स्थित हैं जो बार बार भीषण गर्मी से प्रभावित हुए। इसी तरह, करीब 13.2 लाख लोगों की आबादी वाली 76 प्रतिशत अनधिकृत बस्तियां भी अत्यधिक गर्मी की चपेट वाले इलाकों में हैं।अध्ययन में यह भी पाया गया कि सर्वेक्षण में शामिल।,066 स्कूल में से 80 प्रतिशत भीषण गर्मी से प्रभावित क्षेत्रों में हैं। रिपोर्ट में मटियाला, ककरौला, नरेला और चांदनी चौक समेत 35 वार्ड को बहुत अधिक या उच्च समेकित संवेदनशीलता वाले क्षेत्रों के रूप में चिह्नित किया गया है।रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली के 272 वार्ड (परिसीमन से पहले की संख्या) में से 153 वार्ड ऐसे हैं जहां 75 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र बार-बार अत्यधिक गर्मी की चपेट में रहे। इनमें से 82 वार्ड में 90 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र प्रभावित हैं, जबकि 17 वार्ड ऐसे हैं जिनका पूरा क्षेत्र भीषण गर्मी से प्रभावित रहा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि बढ़ते तापमान के कारण दिल्ली एक गहराते संकट का सामना कर रही है। वर्ष 2025 में महसूस होने वाला तापमान (फील्स-लाइक टेम्परेचर) 52 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने वर्ष 2024 में दिल्ली में भीषण गर्मी से संबंधित 25 मौतों की सूचना दी थी, जबकि स्वतंत्र रिपोर्ट में यह संख्या 55 से अधिक बताई गई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली अब एक अगल तरह की और अधिक गर्म सामान्य स्थिति की ओर बढ़ रही है। पिछले चार दशकों के दौरान वार्षिक औसत अधिकतम और न्यूनतम तापमान, दोनों में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है।अध्ययन के अनुसार, रात के समय "ंडा होने की दिल्ली की क्षमता में नौ प्रतिशत की कमी आई है।
राष्ट्रीय राजधानी का मुख्य शहरी क्षेत्र बाहरी शहरी क्षेत्रों की तुलना में 3.8 डिग्री सेल्सियस कम "ंडा हो पाता है, जिसके कारण घनी आबादी और कंक्रीट वाले इलाकों में चौबीस घंटे गर्मी बनी रहती है।
रिपोर्ट में पुरानी दिल्ली और उससे जुड़े क्षेत्र, करोल बाग, कश्मीरी गेट अंतरराज्यीय बस अड्डा और आसपास का इलाका, कनॉट प्लेस का इनर सर्कल, उत्तम नगर, पालम, डाबरी, नजफगढ़, कंझावला, बुद्ध विहार, बवाना और नरेला को लगातार भीषण गर्मी से प्रभावित क्षेत्रों में शामिल किया गया है।
इसके अलावा समयपुर बादली, भलस्वा, जहांगीरपुरी, बुराड़ी, शाहदरा, भजनपुरा, करावल नगर, गाजीपुर औद्योगिक क्षेत्र, बदरपुर, मदनपुर खादर, ओखला औद्योगिक क्षेत्र, तुगलकाबाद, संगम विहार, महिपालपुर, आया नगर, भीकाजी कामा प्लेस, एम्स, आर.के. पुरम, कोटला मुबारकपुर, सराय काले खां तथा ग्रीन पार्क, ग्रेटर कैलाश, ईस्ट ऑफ कैलाश और लाजपत नगर के कुछ हिस्सों को भी अत्यधिक गर्मी से प्रभावित क्षेत्रों के रूप में चिह्नित किया गया है।
अध्ययन में पाया गया कि बवाना, मायापुरी, मुंडका, आनंद पर्वत और मंगोलपुरी जैसे औद्योगिक क्षेत्र अत्यधिक गर्मी से प्रभावित केंद्र बनकर उभरे हैं। कई रिहायशी इलाकों में भी भूमि सतह का तापमान 44 से 50 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया।
रिपोर्ट में भारत मंडपम, ईस्ट किदवई नगर आवासीय परिसर, सफदरजंग स्थित वर्ल्ड ट्रेड सेंटर और नेताजी नगर जैसी नई या पुनर्विकसित परियोजनाओं को भी भीषण गर्मी से प्रभावित बताया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, गर्मियों के दौरान इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और खाली खेत तथा बंजर क्षेत्रों में भूमि सतह का तापमान 60.77 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।
अध्ययन में कहा गया है कि दिल्ली का हरित क्षेत्र वर्ष 2014 में 25.36 प्रतिशत था, जो 2024 में घटकर 14.14 प्रतिशत रह गया। इसी अवधि में जलाशयो का क्षेत्रफल भी 1.25 प्रतिशत से घटकर 0.99 प्रतिशत हो गया।
रिपोर्ट में कहा गया है कि शहर के लगभग 35 प्रतिशत मौजूदा हरित और जल क्षेत्रों पर भी अत्यधिक गर्मी का असर है। इससे संकेत मिलता है कि केवल हरित क्षेत्र बढ़ाना ही नहीं, बल्कि उनकी गुणवत्ता सुधारना भी जरूरी है।