हर्षा रिछारिया संन्यास: पहले ‘दुल्हन’, फिर बनीं साध्वी हर्षानंद गिरि, जन्म से पिंडदान तक की पूरी कहानी
प्रकाशित: 20-04-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
महाकुंभ 2025 से वायरल हुईं सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर हर्षा रिछारिया एक बार फिर सुर्खियों में हैं. उन्होंने सांसारिक जीवन को त्यागकर संन्यास धारण कर लिया है. मध्य प्रदेश के उज्जैन में मंगलनाथ स्थित गंगाघाट पर मौनी तीर्थ आश्रम में पंचायती निरंजनी अखाड़ा के पीठाधीश्वर सुमनानंद गिरि महाराज से विधि-विधान के साथ दीक्षा लेकर 19 अप्रैल 2026 को वे साध्वी बन गईं. हर्षा ने सोशल मीडिया पर इसे नए जन्म की शुरुआत बताया है. संन्यास परंपरा के अनुसार दीक्षा के बाद हर्षा रिछारिया को नया नाम ‘हर्षानंद गिरि' दिया गया है. इस दौरान उन्होंने शिखा और दंड का त्याग किया. साथ ही पितरों के पिंडदान-तर्पण के साथ स्वयं का भी पिंडदान किया, जो संन्यास की परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है. हर्षा रिछारिया का जन्म कहां हुआ?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार हर्षा रिछारिया का जन्म 26 मार्च 1994 को उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के झांसी जिले के मऊरानीपुर में हुआ था. बाद में उनका परिवार मध्य प्रदेश के भोपाल में बस गया. वर्तमान में हर्षा उत्तराखंड में रहती थीं.
संन्यास से पहले दुल्हन लुक ने खींचा ध्यान
संन्यास लेने से ठीक पहले हर्षा रिछारिया की सोशल मीडिया पर एक पोस्ट काफी वायरल हुई. चार दिन पुरानी इस पोस्ट में वे दुल्हन के लुक में नजर आईं. उन्होंने इस वीडियो के कैप्शन में कुछ नहीं लिखा, केवल #harsharichhariya #wedding #trending #trendingreels #indianbride जैसे हैशटैग इस्तेमाल किए. इसके अलावा 7 अप्रैल की एक पोस्ट में वे हल्दी सेरेमनी वाले लुक में भी दिखाई दी थीं, जिसने फैंस के बीच और ज्यादा उत्सुकता बढ़ा दी थी.
महाकुंभ 2025 से मिली पहचान
हर्षा रिछारिया ने ग्लैमर वर्ल्ड छोड़कर आध्यात्म का रास्ता चुना. महाकुंभ 2025 में उन्होंने निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज की शिष्या के रूप में भाग लिया था. प्रयागराज महाकुंभ में 4 जनवरी 2025 को वे पीले वस्त्र, रुद्राक्ष माला और माथे पर तिलक लगाए निरंजनी अखाड़े की पेशवाई में संतों के साथ रथ पर बैठी नजर आई थीं. इस दौरान वे सोशल मीडिया पर वायरल हुईं और काफी चर्चा के साथ ट्रोलिंग का भी सामना करना पड़ा.
सोशल मीडिया पर जबरदस्त फॉलोइंग
महाकुंभ में “सबसे खूबसूरत साध्वी” के रूप में वायरल हुईं हर्षा रिछारिया सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं. वे धर्म, समाज और अध्यात्म से जुड़े पोस्ट शेयर करती रहती थीं. इंस्टाग्राम बायो में वे खुद को हिंदू शेरनी, सनातनी प्रचारक, भारत की बेटी और महादेव-मां पार्वती की उपासक बताती हैं. उनके इंस्टाग्राम पर करीब 1.7 मिलियन और फेसबुक पर 1.57 लाख फॉलोअर्स हैं.
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार हर्षा रिछारिया का जन्म 26 मार्च 1994 को उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के झांसी जिले के मऊरानीपुर में हुआ था. बाद में उनका परिवार मध्य प्रदेश के भोपाल में बस गया. वर्तमान में हर्षा उत्तराखंड में रहती थीं.
संन्यास से पहले दुल्हन लुक ने खींचा ध्यान
संन्यास लेने से ठीक पहले हर्षा रिछारिया की सोशल मीडिया पर एक पोस्ट काफी वायरल हुई. चार दिन पुरानी इस पोस्ट में वे दुल्हन के लुक में नजर आईं. उन्होंने इस वीडियो के कैप्शन में कुछ नहीं लिखा, केवल #harsharichhariya #wedding #trending #trendingreels #indianbride जैसे हैशटैग इस्तेमाल किए. इसके अलावा 7 अप्रैल की एक पोस्ट में वे हल्दी सेरेमनी वाले लुक में भी दिखाई दी थीं, जिसने फैंस के बीच और ज्यादा उत्सुकता बढ़ा दी थी.
महाकुंभ 2025 से मिली पहचान
हर्षा रिछारिया ने ग्लैमर वर्ल्ड छोड़कर आध्यात्म का रास्ता चुना. महाकुंभ 2025 में उन्होंने निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज की शिष्या के रूप में भाग लिया था. प्रयागराज महाकुंभ में 4 जनवरी 2025 को वे पीले वस्त्र, रुद्राक्ष माला और माथे पर तिलक लगाए निरंजनी अखाड़े की पेशवाई में संतों के साथ रथ पर बैठी नजर आई थीं. इस दौरान वे सोशल मीडिया पर वायरल हुईं और काफी चर्चा के साथ ट्रोलिंग का भी सामना करना पड़ा.
सोशल मीडिया पर जबरदस्त फॉलोइंग
महाकुंभ में “सबसे खूबसूरत साध्वी” के रूप में वायरल हुईं हर्षा रिछारिया सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं. वे धर्म, समाज और अध्यात्म से जुड़े पोस्ट शेयर करती रहती थीं. इंस्टाग्राम बायो में वे खुद को हिंदू शेरनी, सनातनी प्रचारक, भारत की बेटी और महादेव-मां पार्वती की उपासक बताती हैं. उनके इंस्टाग्राम पर करीब 1.7 मिलियन और फेसबुक पर 1.57 लाख फॉलोअर्स हैं.