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फिर बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम

प्रकाशित: 26-05-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
फिर बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम
विशेष प्रतिनिधि
नई दिल्ली। देश में सोमवार को पेट्रोल के दाम में 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत में 2.71 रुपये लीटर की बढ़ोतरी की गई। यह पिछले दो हफ्तों से भी कम समय में चौथी वृद्धि है।
सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के साथ उसके खुदरा दाम बढ़ा रही हैं। इस ताजा बढ़ोतरी के साथ, 15 मई से लेकर पेट्रोल और डीजल के दामों में कुल मिलाकर करीब 7.5 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हो चुकी है। इससे अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति के दबाव और परिवहन लागत बढ़ने की आशंकाएं तेज हो गई हैं। उद्योग सूत्रों के अनुसार, कीमतों में हुए इस ताजा संशोधन में पेट्रोल 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल 2.71 रुपये प्रति लीटर महंगा हुआ है। इससे दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 99.51 रुपये से बढ़कर 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल 92.49 रुपये से बढ़कर 95.20 रुपये प्रति लीटर हो गई है।इस ताजा बढ़ोतरी के बाद मुंबई में पेट्रोल 111.21 रुपये और डीजल 97.83 रुपये प्रति लीटर, कोलकाता में 113.51 रुपये और 99.82 रुपये प्रति लीटर, जबकि चेन्नई में 107.77 रुपये और 99.55 रुपये प्रति लीटर हो गया है। इससे पहले, 15 मई को पेट्रोल और डीजल में तीन-तीन रुपये प्रति लीटर, 19 मई को 90 पैसे प्रति लीटर तथा 23 मई को पेट्रोल में 87 पैसे और डीजल में 91 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी। विभिन्न राज्यों में स्थानीय करों के कारण ईंधन की कीमतों में अंतर होता है।सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) का कुल मिलकर देश के लगभग 90 प्रतिशत ईंधन बाजार पर नियंत्रण है।विशेषज्ञों के अनुसार, फरवरी के अंत से अब तक वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में 50 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। इसका कारण पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से आपूर्ति बाधित होने की आशंका है।संघर्ष के शुरुआती ढाई महीनों में तेल कंपनियों ने लागत बढ़ने के बावजूद खुदरा कीमतों को स्थिर रखा था। सरकार ने इसे उपभोक्ताओं को महंगाई से बचाने का कदम बताया था, जबकि विपक्षी दलों ने सरकार पर पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों के कारण कीमतों में बढ़ोतरी टालने का आरोप लगाया था। यह मूल्य वृद्धि 15 मई को तब शुरू हुई, जब सत्तारूढ़ भाजपा ने पश्चिम बंगाल सहित पांच राज्यांकेंद्र शासित प्रदेश के चुनावों में से तीन में जीत दर्ज की।
सार्वजनिक कंपनियों द्वारा कीमतें बढ़ाए जाने के तुरंत बाद नायरा एनर्जी जैसी निजी तेल कंपनियों ने भी इसी अनुपात में दाम बढ़ा दिए। इससे पहले मार्च में नायरा एनर्जी ने पेट्रोल पर पांच रुपये और डीजल पर तीन रुपये तथा शेल ने एक अप्रैल से पेट्रोल पर 7.41 रुपये और डीजल पर 25 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की थी। हालांकि, रिलायंस इंडस्ट्रीज और बीपी पीएलसी के संयुक्त उद्यम जियो-बीपी ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के समान ही अपनी दरें बढ़ाई हैं।
देश में पेट्रोल और डीजल के दाम अब मई 2022 के बाद अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गए हैं।
उद्योग जगत के अधिकारियों का कहना है कि हालिया मूल्य संशोधन इस तरह से किए गए हैं कि तेल कंपनियों पर दबाव कुछ हद तक कम हो, लेकिन इससे महंगाई में तेज झटका न लगे, हालांकि इन बढ़ोतरी से कीमतों पर दबाव बढ़ना तय है।
रेटिंग एजेंसी इक्रा लि. के वरिष्" उपाध्यक्ष और सह-समूह प्रमुख (कॉरपोरेट रेटिंग्स) प्रशांत वशिष्" ने कहा, wखुदरा ईंधन की कीमतों में हाल की बढ़ोतरी के बावजूद तेल विपणन कंपनियों का घाटा लगातार ऊंचा बना हुआ है, क्योंकि घरेलू एलपीजी बिक्री में नुकसान बढ़ रहा है और कच्चे तेल के दाम भी अधिक है।w
इक्रा ने अनुमान जताया कि अगर कच्चे तेल की कीमत 120 से 125 डॉलर प्रति बैरल के बीच बनी रहती है और पिछले 10 वर्षों के औसत शोधन मार्जिन को ध्यान में रखा जाए, तो तेल विपणन कंपनियों को पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी की बिक्री पर प्रतिदिन लगभग 700 से 800 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है, भले ही हाल की कीमत बढ़ोतरी को शामिल कर लिया जाए। एजेंसी ने कहा, यह उच्च स्तर का घाटा लंबे समय तक टिकाऊ नहीं है।