शीर्ष अदालत ने ट्विशा शर्मा मामले में कहा- इस विमर्श से व्यथित हैं कि न्यायपालिका बचा रही है आरोपियों को ः सुप्रीम कोर्ट
प्रकाशित: 26-05-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
विधि संवाददाता
नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने मॉडल से अभिनेत्री बनीं ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में सुनवाई करते हुए सोमवार को कहा कि वह इस विमर्श से व्यथित है कि न्यायपालिका आरोपियों को बचा रही है।
न्यायालय ने साथ ही कहा कि वह इस मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की निष्पक्ष, स्वतंत्र और पूर्वाग्रह रहित जांच सुनिश्चित करेगा। ट्विशा शर्मा (33) का शव भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में अपने ससुराल में 12 मई को फंदे से लटका मिला था। उनके परिवार ने उनके ससुराल वालों पर दहेज उत्पीड़न और आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया है जबकि ट्विशा के ससुराल वालों ने दावा किया कि वह मादक पदार्थों की लत से पीड़ित थीं।पुलिस ने महिला के पति एवं पेशे से वकील समर्थ सिंह और उनकी सास एवं पूर्व जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह के खिलाफ दहेज उत्पीड़न के आरोपों में प्राथमिकी दर्ज की है। भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पी" ने मीडिया से मामले से जुड़े घटनाक्रम की रिपोर्टिंग करते समय संयम बरतने को कहा। पी" ने कहा, कुछ कार्वाइयों से हम व्यथित हैं। हम मीडिया में अपने मित्रों से अनुरोध करेंगे कि वे पीड़िता के परिवार या दूसरे पक्ष के परिवार के बयान लेने से बचें। चीजों को कानून और प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ने दिया जाए। उसने कहा, हम मीडिया से अनुरोध करते हैं कि वह पीड़िता के परिवार के बयान रिकॉर्ड न करे और उनके दर्द को महज साउंड बाइट बनाकर पेश न करे। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने शीर्ष अदालत को बताया कि सीबीआई जांच अपने हाथ में लेगी और इस संबंध में प्रशासनिक कदम आज ही उ"ाए जाएंगे।उच्चतम न्यायालय ने ट्विशा शर्मा मामले में एक मीडिया रिपोर्ट के बाद स्वत: संज्ञान लिया था। इस रिपोर्ट में जांच में संस्थागत पक्षपात से जुड़े सवाल उ"ाए गए थे जिनमें यह आरोप भी शामिल था कि आरोपी के वकील होने और उसकी मां के पूर्व जिला न्यायाधीश होने के कारण निष्पक्ष जांच नहीं की जा रही। इस रिपोर्ट का शीर्षक है- ससुराल में युवती की अप्राकृतिक मौत के मामले में कथित संस्थागत पक्षपात और प्रक्रियागत विसंगतियों के संबंध में। मध्य प्रदेश सरकार की ओर से पेश मेहता ने न्यायालय से कहा कि ट्विशा की सास ने टीवी चैनलों पर आकर पीड़िता को बदनाम करने वाले बयान देने शुरू किए जिसके बाद मीडिया कवरेज शुरू हुआ।उन्होंने कहा कि मीडिया के हस्तक्षेप के कारण मामले में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। मेहता ने कहा कि यह मामला सभी माता-पिता के लिए एक संदेश है कि इस तरह की दुर्भाग्यपूर्ण घटना का सामना करने से बेहतर है कि बेटी का तलाक हो जाए।सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद एम्स-भोपाल की एक टीम ने ट्विशा के शव का रविवार को दूसरा पोस्टमार्टम किया।आरोपियों की ओर से पेश वरिष्" अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने मीडिया कवरेज को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि सीआरपीसी की धारा 164 के तहत मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज पूरा बयान अखबारों में प्रकाशित कर दिया गया।
शीर्ष अदालत ने सॉलिसिटर जनरल के इस अभ्यावेदन पर गौर किया कि वह यह सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों के समक्ष यह मामला उ"ाएंगे कि सीबीआई जांच तत्काल अपने हाथ में ले।
पी" ने कहा, हम पीड़िता के परिवार के सदस्यों के साथ-साथ आरोपियों के परिवार के सदस्यों से भी कहना चाहेंगे कि वे सार्वजनिक रूप से या मीडिया मंचों पर बयान देने के बजाय जांच एजेंसी के समक्ष अपनी बात दर्ज कराएं ताकि जारी जांच पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े या कोई पूर्वाग्रह नहीं हो।
पी" ने कहा, हम मीडिया से भी अनुरोध करते हैं कि वह ऐसे लोगों के बयान रिकॉर्ड करने से बचे जो संभावित गवाह हैं, क्योंकि इससे उन मुद्दों के निष्कर्षों पर अनावश्यक प्रभाव पड़ सकता है जिनकी जांच की जानी है।
न्यायालय ने स्वत: संज्ञान लेते हुए दायर किए गए मामले का निपटारा कर दिया। उसने कहा, हम लोगों से भी अनुरोध करते हैं कि वे अटकलों से बचें और देश की प्रमुख जांच एजेंसियों में से एक पर भरोसा रखें। हमें विश्वास है कि एजेंसी समय आने पर जांच को निष्कर्ष तक पहुंचाएगी।
नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने मॉडल से अभिनेत्री बनीं ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में सुनवाई करते हुए सोमवार को कहा कि वह इस विमर्श से व्यथित है कि न्यायपालिका आरोपियों को बचा रही है।
न्यायालय ने साथ ही कहा कि वह इस मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की निष्पक्ष, स्वतंत्र और पूर्वाग्रह रहित जांच सुनिश्चित करेगा। ट्विशा शर्मा (33) का शव भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में अपने ससुराल में 12 मई को फंदे से लटका मिला था। उनके परिवार ने उनके ससुराल वालों पर दहेज उत्पीड़न और आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया है जबकि ट्विशा के ससुराल वालों ने दावा किया कि वह मादक पदार्थों की लत से पीड़ित थीं।पुलिस ने महिला के पति एवं पेशे से वकील समर्थ सिंह और उनकी सास एवं पूर्व जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह के खिलाफ दहेज उत्पीड़न के आरोपों में प्राथमिकी दर्ज की है। भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पी" ने मीडिया से मामले से जुड़े घटनाक्रम की रिपोर्टिंग करते समय संयम बरतने को कहा। पी" ने कहा, कुछ कार्वाइयों से हम व्यथित हैं। हम मीडिया में अपने मित्रों से अनुरोध करेंगे कि वे पीड़िता के परिवार या दूसरे पक्ष के परिवार के बयान लेने से बचें। चीजों को कानून और प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ने दिया जाए। उसने कहा, हम मीडिया से अनुरोध करते हैं कि वह पीड़िता के परिवार के बयान रिकॉर्ड न करे और उनके दर्द को महज साउंड बाइट बनाकर पेश न करे। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने शीर्ष अदालत को बताया कि सीबीआई जांच अपने हाथ में लेगी और इस संबंध में प्रशासनिक कदम आज ही उ"ाए जाएंगे।उच्चतम न्यायालय ने ट्विशा शर्मा मामले में एक मीडिया रिपोर्ट के बाद स्वत: संज्ञान लिया था। इस रिपोर्ट में जांच में संस्थागत पक्षपात से जुड़े सवाल उ"ाए गए थे जिनमें यह आरोप भी शामिल था कि आरोपी के वकील होने और उसकी मां के पूर्व जिला न्यायाधीश होने के कारण निष्पक्ष जांच नहीं की जा रही। इस रिपोर्ट का शीर्षक है- ससुराल में युवती की अप्राकृतिक मौत के मामले में कथित संस्थागत पक्षपात और प्रक्रियागत विसंगतियों के संबंध में। मध्य प्रदेश सरकार की ओर से पेश मेहता ने न्यायालय से कहा कि ट्विशा की सास ने टीवी चैनलों पर आकर पीड़िता को बदनाम करने वाले बयान देने शुरू किए जिसके बाद मीडिया कवरेज शुरू हुआ।उन्होंने कहा कि मीडिया के हस्तक्षेप के कारण मामले में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। मेहता ने कहा कि यह मामला सभी माता-पिता के लिए एक संदेश है कि इस तरह की दुर्भाग्यपूर्ण घटना का सामना करने से बेहतर है कि बेटी का तलाक हो जाए।सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद एम्स-भोपाल की एक टीम ने ट्विशा के शव का रविवार को दूसरा पोस्टमार्टम किया।आरोपियों की ओर से पेश वरिष्" अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने मीडिया कवरेज को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि सीआरपीसी की धारा 164 के तहत मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज पूरा बयान अखबारों में प्रकाशित कर दिया गया।
शीर्ष अदालत ने सॉलिसिटर जनरल के इस अभ्यावेदन पर गौर किया कि वह यह सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों के समक्ष यह मामला उ"ाएंगे कि सीबीआई जांच तत्काल अपने हाथ में ले।
पी" ने कहा, हम पीड़िता के परिवार के सदस्यों के साथ-साथ आरोपियों के परिवार के सदस्यों से भी कहना चाहेंगे कि वे सार्वजनिक रूप से या मीडिया मंचों पर बयान देने के बजाय जांच एजेंसी के समक्ष अपनी बात दर्ज कराएं ताकि जारी जांच पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े या कोई पूर्वाग्रह नहीं हो।
पी" ने कहा, हम मीडिया से भी अनुरोध करते हैं कि वह ऐसे लोगों के बयान रिकॉर्ड करने से बचे जो संभावित गवाह हैं, क्योंकि इससे उन मुद्दों के निष्कर्षों पर अनावश्यक प्रभाव पड़ सकता है जिनकी जांच की जानी है।
न्यायालय ने स्वत: संज्ञान लेते हुए दायर किए गए मामले का निपटारा कर दिया। उसने कहा, हम लोगों से भी अनुरोध करते हैं कि वे अटकलों से बचें और देश की प्रमुख जांच एजेंसियों में से एक पर भरोसा रखें। हमें विश्वास है कि एजेंसी समय आने पर जांच को निष्कर्ष तक पहुंचाएगी।