सिंगापुर में 13 भारतीयों को अवैध रूप से शरण देने के मामले में भारतीय नागरिक पर आरोप तय
प्रकाशित: 26-05-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
सिंगापुर, (भाषा)। सिंगापुर में आव्रजन कानूनों का उल्लंघन करने वाले 13 लोगों को रोजगार देने और उन्हें शरण देने के मामले में 26 वर्षीय एक भारतीय नागरिक के खिलाफ आरोप तय किए गए हैं। प्राधिकारियों ने यह
जानकारी दी।
इन लोगों के यात्रा पास की अवधि समाप्त हो चुकी है। आव्रजन एवं जांच चौकी प्राधिकरण (आईसीए) ने बृहस्पतिवार को एक बयान में बताया कि कनोजिया रिकेन और दो सिंगापुरी नागरिकों पर आव्रजन अपराधों के लिए 21 मई को आरोप तय किए गए। बयान में बताया गया कि रिकेन पर आव्रजन कानूनों का उल्लंघन करने वाले 19 से 44 वर्ष की आयु के 13 लोगों को शरण देने का आरोप है। उसने यह सुनिश्चित करने के लिए जरूरी जांच नहीं की थी कि उनके पास सिंगापुर में रहने के लिए वैध पास हैं या नहीं। आईसीए ने कहा कि इन लोगों के यात्रा पास की अवधि समाप्त हो चुकी थी और वे सिंगापुर में अवैध रूप से रह रहे थे। आईसीए अधिकारियों ने सिंगापुर में तीन मार्च को एक फ्लैट पर छापा मारा। वहां उन्हें 13 भारतीय नागरिक मिले, जो यात्रा पास की अवधि समाप्त होने के बाद भी सिंगापुर में रुके हुए थे। इनमें 19 से 44 वर्ष की आयु के 11 पुरुष और दो महिलाएं शामिल थीं। जांच के अनुसार, रिकेन ने दिसंबर 2025 से मार्च 2026 के बीच अलग-अलग अवधि के लिए उन्हें फ्लैट में रहने की अनुमति दी थी। रिकेन को तीन मार्च को गिरफ्तार किया गया था और आव्रजन कानून का उल्लंघन करने वालों को "हराने के आरोप में उसके खिलाफ 21 मई को आरोप तय किए गए। आईसीए ने 21 मई को चीनी मूल के 37 वर्षीय सिंगापुरी सोंग यी दा पर भी एक भारतीय व्यक्ति राजप्पा राजू (39) को काम पर रखने का आरोप तय किया। सोंग को पता था कि राजप्पा के पास वैध कार्य परमिट नहीं है। आईसीए ने कहा कि भारतीय मूल की एक अन्य सिंगापुरी नागरिक सुबा प्रियदर्शिनी पर भी एक भारतीय व्यक्ति को काम पर रखने का आरोप तय किया गया है। सुबा को पता था कि उस व्यक्ति के पास सिंगापुर में काम करने और रहने के लिए वैध कार्य परमिट नहीं है। आईसीए ने बताया कि यात्रा पास की अवधि समाप्त होने के बाद भी रुके लोगों औराया अवैध प्रवासियों को जानबूझकर या लापरवाहीपूर्वक "हराने का दोषी पाए जाने पर भी कम से कम छह महीने और अधिकतम दो साल तक की कैद हो सकती है तथा 6,000 सिंगापुरी डॉलर तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
जानकारी दी।
इन लोगों के यात्रा पास की अवधि समाप्त हो चुकी है। आव्रजन एवं जांच चौकी प्राधिकरण (आईसीए) ने बृहस्पतिवार को एक बयान में बताया कि कनोजिया रिकेन और दो सिंगापुरी नागरिकों पर आव्रजन अपराधों के लिए 21 मई को आरोप तय किए गए। बयान में बताया गया कि रिकेन पर आव्रजन कानूनों का उल्लंघन करने वाले 19 से 44 वर्ष की आयु के 13 लोगों को शरण देने का आरोप है। उसने यह सुनिश्चित करने के लिए जरूरी जांच नहीं की थी कि उनके पास सिंगापुर में रहने के लिए वैध पास हैं या नहीं। आईसीए ने कहा कि इन लोगों के यात्रा पास की अवधि समाप्त हो चुकी थी और वे सिंगापुर में अवैध रूप से रह रहे थे। आईसीए अधिकारियों ने सिंगापुर में तीन मार्च को एक फ्लैट पर छापा मारा। वहां उन्हें 13 भारतीय नागरिक मिले, जो यात्रा पास की अवधि समाप्त होने के बाद भी सिंगापुर में रुके हुए थे। इनमें 19 से 44 वर्ष की आयु के 11 पुरुष और दो महिलाएं शामिल थीं। जांच के अनुसार, रिकेन ने दिसंबर 2025 से मार्च 2026 के बीच अलग-अलग अवधि के लिए उन्हें फ्लैट में रहने की अनुमति दी थी। रिकेन को तीन मार्च को गिरफ्तार किया गया था और आव्रजन कानून का उल्लंघन करने वालों को "हराने के आरोप में उसके खिलाफ 21 मई को आरोप तय किए गए। आईसीए ने 21 मई को चीनी मूल के 37 वर्षीय सिंगापुरी सोंग यी दा पर भी एक भारतीय व्यक्ति राजप्पा राजू (39) को काम पर रखने का आरोप तय किया। सोंग को पता था कि राजप्पा के पास वैध कार्य परमिट नहीं है। आईसीए ने कहा कि भारतीय मूल की एक अन्य सिंगापुरी नागरिक सुबा प्रियदर्शिनी पर भी एक भारतीय व्यक्ति को काम पर रखने का आरोप तय किया गया है। सुबा को पता था कि उस व्यक्ति के पास सिंगापुर में काम करने और रहने के लिए वैध कार्य परमिट नहीं है। आईसीए ने बताया कि यात्रा पास की अवधि समाप्त होने के बाद भी रुके लोगों औराया अवैध प्रवासियों को जानबूझकर या लापरवाहीपूर्वक "हराने का दोषी पाए जाने पर भी कम से कम छह महीने और अधिकतम दो साल तक की कैद हो सकती है तथा 6,000 सिंगापुरी डॉलर तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।