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क्यों हर साल तीन दिनों के लिए लाल हो जाती है ब्रह्मपुत्र नदी? जानें असम के अनोखे मंदिर की कहानी

प्रकाशित: 11-04-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
क्यों हर साल तीन दिनों के लिए लाल हो जाती है ब्रह्मपुत्र नदी? जानें असम के अनोखे मंदिर की कहानी
असम….एक दिन पहले ही असम में विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग हुई, जिसका परिणाम 4 मई को आएगा. चुनाव के इतर जब भी हम असम के बारे में सोचते हैं तो दो चीज हमारे ध्यान में आती है, पहला- मां कामाख्या का मंदिर और दूसरा- कांजीरंगा नेशनल पार्क. पार्क यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल की सूची में शामिल है. खास बात है कि ये दुनिया के दो-तिहाई एक सींग वाले गैंडों (One-horned Rhinos) का घर भी है.
हम आज बात करेंगे मां कामाख्या के मंदिर की. ये मंदिर मां दुर्गा को समर्पित 51 शक्तिपीठों में से एक है. मंदिर ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे स्थित है. खास बात है कि साल में तीन दिन मंदिर के आसपास के नदी का पानी एकदम लाल हो जाता है. लोग इसे माता का चमत्कार मानते हैं. हालांकि, साइंस का कुछ और ही कहना है. आखिर नदी का पानी लाल कैसे हो जाता है. आइये जानते हैं….
कहानी को समझने के लिए हमें कई युग पहले जाना पड़ेगा, जब भगवान शिव और माता सती के विवाह को कुछ समय बीत गया था. इस दौरान, माता सती के पिता प्रजापति दक्ष ने बृहस्पतिसव यज्ञ करवाया. उन्होंने इस यज्ञ में सभी देवी-देवताओं को निमंत्रण भेजा था सिर्फ अपने दामाद भोलेनाथ को छोड़कर. माता सती को अपने पिता द्वारा करवाए जा रहे इस यज्ञ में शामिल होने का मन था, जिस वजह से वे भगवान शंकर से भी साथ चलने का आग्रह करने लगी. निमंत्रण न होने की वजह से भोलेनाथ ने ससुराल जाने से मना कर दिया, जिस वजह से लाड में माता सती अकेले ही अपने पिता के घर चली गईं.
माता सती जब अपने पिता के यज्ञ में पहुंची तो प्रजापति दक्ष ने माता सती के सामने भगवान शिव को लेकर अपशब्दों का प्रयोग किया. अपशब्दों से आहत होकर माता सती ने यज्ञ की अग्नि में कूदकर आत्मदाह कर लिया. शिव जी इससे आहत हो गए और वे माता सती को बाहों में भरकर तीनों लोकों में कई दिनों तक घूमत रहे. वियोग और शोक में भगवान शंकर अधजले शव के साथ हाहाकार करते हुए घूम रहे थे, जिस वजह से पूरी सृष्टि को विनाश का खतरा हो गया था. सृष्टि का संतुलन बिगड़ने की वजह से भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर के 51 टुकड़े कर दिए, ये टुकड़े पृथ्वी पर जहां-जहां गिरे, वे स्थान शक्तिपीठ कहलाए.
साल में तीन दिन रजस्वला होती है माता कामाख्या
ऐसा ही एक शक्तिपीठ है असम में स्थित मां कामाख्या मंदिर. गुवाहाटी में नीलांचल पर्वत पर माता सती की योनि गिरी, जिस स्थान पर माता की योनि गिरी, उस स्थान को आज कामाख्या मंदिर के नाम से जाना जाता है. कामाख्या मंदिर में मूर्ति की जगह एक योनि के आकार की शिला है. शिला में से प्राकृतिक रूप से जल निकलता रहता है. मान्यता है कि माता हर साल जून में तीन दिनों के लिए रजस्वला (पीरियड्स) होतीं है. 3 दिनों तक मंदिर के कपाट बंद रहते हैं. इन तीन दिन मंदिर के पास से बहने वाली ब्रह्मपुत्र नदी का पानी भी लाल हो जाता है. चौथे दिन विशेष अनुष्ठान के साथ मंदिर खोला जाता है. माता की प्रतिमा को स्नान करवाया जाता है और विशेष अनुष्ठान के बाद भक्तों के लिए कपाट खोले जाते हैं. रजस्वला के दौरान, माता को सफेद कपड़ों से ढंका जाता है, जो चौथे दिन एकदम लाल मिलता है. यही कपड़ा भक्तों को प्रसाद के रूप में दिया जाता है.
साइंस ने नदी के लाल होने की वजह ये बताई
हालांकि, नदी के लाल होने की वजह साइंस के अनुसार कुछ और ही है. साइंस का कहना है कि ब्रह्मपुत्र नदी के क्षेत्र की मिट्टी में लौह यानी Iron बहुत ज्यादा है. मॉनसून के दौरान, तेज बारिश की वजह से लाल मिट्टी नदी में मिल जाती है, जिससे पानी का रंग लाल हो जाता है. वैज्ञानिकों का एक और तर्क है- मंदिर के पास की पहाड़ियों में सिनाबार जैसे खनिज मिलते हैं, जो लाल रंग के होते हैं, जिस वजह से पानी लाल हो जाता है. वैज्ञानिकों का एक और तर्क है कि मंदिर में विशेष प्रकार के लाल रंग के शैवाल की वृद्धि हो जाती है, जिस वजह से रंग का परिवर्तन हो जाता है.
हालांकि, ये भी तथ्य है कि दुनिया में ब्रह्मपुत्र ही एक ऐसी इकलौती नदी है, जिसका पानी हर साल में तीन दिनों के लिए लाल हो जाता है. जिस वजह से लोगों का मानना है कि इसमें साइंस नहीं है बल्कि ये माता का चमत्कार ही है.