यहां होती है उल्टे हनुमान जी की पूजा, जानें कहां है ये शक्तिशाली धाम
प्रकाशित: 02-04-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
हनुमान जयंती के पावन अवसर पर भक्तों में बजरंगबली के दर्शन के लिए भारी उत्साह है. भारत में पवनपुत्र के कई अद्भुत मंदिर हैं, लेकिन मध्य प्रदेश के इंदौर से करीब 30 किमी दूर स्थित सांवेर का हनुमान मंदिर अपनी अनूठी विशेषता के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है. यहां हनुमान जी की मूर्ति सीधी नहीं, बल्कि उल्टी है, जिसमें उनका सिर नीचे और पैर ऊपर की ओर हैं. आइए जानें पाताल विजय से जुड़ी इस धाम की अद्भुत महिमा के बारे में.
कहां स्थित है यह मंदिर?
उल्टे हनुमान जी का यह प्राचीन मंदिर मध्य प्रदेश के इंदौर के पास सांवेर नामक स्थान पर स्थित है. इसे उल्टे हनुमान धाम के नाम से जाना जाता है. यहां स्थापित प्रतिमा में हनुमान जी का सिर आकाश की ओर न होकर धरती की ओर है.
क्यों हैं हनुमान जी उल्टे?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, यह स्वरूप हनुमान जी के उस समय को दर्शाता है जब वे अहिरावण के पाताल लोक से भगवान राम और लक्ष्मण को बचाने के लिए पहुंचे थे. कहा जाता है कि अहिरावण का वध करने के लिए हनुमान जी ने उल्टा रूप धारण किया था और उसी स्थिति में उन्होंने पाताल में प्रवेश किया था. पाताल में अहिरावण का वध कर प्रभु श्री राम और लक्ष्मण को सुरक्षित वापस लाने की खुशी में यहां उनके इसी उल्टे स्वरूप की पूजा की जाती है. इसलिए यही वजह है कि इसी घटना की स्मृति में यहां उनकी उल्टी प्रतिमा स्थापित की गई है.
मंदिर की मान्यताएं और चमत्कार
भक्तों का विश्वास है कि इस मंदिर के दर्शन मात्र से बड़े से बड़े संकट टल जाते हैं. यहां से जुड़ी कुछ मान्यताएं भी हैं.
तीन मंगलवार के दर्शन: ऐसी मान्यता है कि यदि कोई भक्त लगातार तीन मंगलवार तक यहाँ दर्शन करता है और हनुमान जी की सेवा करता है, तो उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
ग्रह दोषों से मुक्ति: इस मंदिर को बहुत जागृत माना जाता है. यहाँ दर्शन करने से शनि दोष और मंगल दोषों से भी राहत मिलने की मान्यता है.
सिंदूरी चोला: यहां हनुमान जी को विशेष रूप से सिंदूरी चोला चढ़ाया जाता है, जिसे भक्त अपने साथ सौभाग्य के प्रतीक के रूप में ले जाते हैं.
कहां स्थित है यह मंदिर?
उल्टे हनुमान जी का यह प्राचीन मंदिर मध्य प्रदेश के इंदौर के पास सांवेर नामक स्थान पर स्थित है. इसे उल्टे हनुमान धाम के नाम से जाना जाता है. यहां स्थापित प्रतिमा में हनुमान जी का सिर आकाश की ओर न होकर धरती की ओर है.
क्यों हैं हनुमान जी उल्टे?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, यह स्वरूप हनुमान जी के उस समय को दर्शाता है जब वे अहिरावण के पाताल लोक से भगवान राम और लक्ष्मण को बचाने के लिए पहुंचे थे. कहा जाता है कि अहिरावण का वध करने के लिए हनुमान जी ने उल्टा रूप धारण किया था और उसी स्थिति में उन्होंने पाताल में प्रवेश किया था. पाताल में अहिरावण का वध कर प्रभु श्री राम और लक्ष्मण को सुरक्षित वापस लाने की खुशी में यहां उनके इसी उल्टे स्वरूप की पूजा की जाती है. इसलिए यही वजह है कि इसी घटना की स्मृति में यहां उनकी उल्टी प्रतिमा स्थापित की गई है.
मंदिर की मान्यताएं और चमत्कार
भक्तों का विश्वास है कि इस मंदिर के दर्शन मात्र से बड़े से बड़े संकट टल जाते हैं. यहां से जुड़ी कुछ मान्यताएं भी हैं.
तीन मंगलवार के दर्शन: ऐसी मान्यता है कि यदि कोई भक्त लगातार तीन मंगलवार तक यहाँ दर्शन करता है और हनुमान जी की सेवा करता है, तो उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
ग्रह दोषों से मुक्ति: इस मंदिर को बहुत जागृत माना जाता है. यहाँ दर्शन करने से शनि दोष और मंगल दोषों से भी राहत मिलने की मान्यता है.
सिंदूरी चोला: यहां हनुमान जी को विशेष रूप से सिंदूरी चोला चढ़ाया जाता है, जिसे भक्त अपने साथ सौभाग्य के प्रतीक के रूप में ले जाते हैं.