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देश के लिए रोल मॉडल बना यूपी का पंचायती राज विभाग, 3 अभिनव पहलें राष्ट्रीय संकलन में शामिल

प्रकाशित: 05-06-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
लखनऊ,(वीअ)। उत्तर प्रदेश के गौरवशाली इतिहास में आज एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के मार्गदर्शन और माननीय पंचायती राज मंत्री श्री ओमप्रकाश राजभर जी के कुशल नेतृत्व में उत्तर प्रदेश का पंचायती राज विभाग ग्रामीण सुशासन और डिजिटल ाढांति की नई परिभाषा लिख रहा है। भारत सरकार के पंचायती राज मंत्रालय द्वारा देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सर्वश्रेष्ठ पहलों पर जारी प्रतिष्ठित राष्ट्रीय संकलन ‘नेशनल कंपेंडियम' में उत्तर प्रदेश की तीन अत्यंत महत्वपूर्ण और अभिनव पहलों को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। केंद्र सरकार द्वारा इन पहलों को राष्ट्रीय स्तर पर सराहा जाना इस बात का जीवंत प्रमाण है कि उत्तर प्रदेश जमीनी स्तर पर तकनीकी बदलाव, ग्रामीण सुरक्षा और राजकोषीय हस्तांतरण में पूरे देश का नेतृत्व कर रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों को उत्तर प्रदेश सरकार ने अत्याधुनिक तकनीक के दम पर देश का रोल मॉडल बना दिया है। पंचायती राज विभाग ने ग्रामीण सचिवालयों को सीधे शासन की मुख्यधारा से जोड़कर न केवल बिचौलियों की भूमिका को समाप्त किया है, बल्कि अंतिम पायदान पर बैठे ग्रामीण के लिए सरकारी सेवाओं को उनके दरवाजे पर सुलभ कर दिया है।
राष्ट्रीय संकलन में शामिल उत्तर प्रदेश की 3 महा-योजनाएं:
1. एआई-आधारित पंचायत गेटवे पोर्टल- ग्राम सचिवालयों को पूरी तरह ािढयाशील और जवाबदेह बनाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने इस अनूठे डिजिटल सिस्टम को लागू किया है। इसके तहत वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ग्राम सचिवालयों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित फेशियल रिकग्निशन और जियो-फेंसिंग तकनीक लागू की गई है। ग्राम पंचायतों के किसी भी विकास कार्य का डिजिटल भुगतान तब तक नहीं हो सकता, जब तक कि संबंधित सचिव, ग्राम प्रधान या पंचायत सहायक की डिजिटल उपस्थिति सीधे ग्राम सचिवालय परिसर से दर्ज न हो। इससे वित्तीय गबन की संभावनाएं समाप्त हुई हैं और पारदर्शिता को नया आयाम मिला है।
2. ग्राम सचिवालयों में आधार केंद्रों की स्थापना-ग्रामीण नागरिकों, विशेषकर बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांगों की सहूलियत के लिए उत्तर प्रदेश के ग्राम सचिवालयों को ही आधार नामांकन और अपडेट केंद्रों के रूप में विकसित किया गया है। ग्रामीणों को अब अपने आधार कार्ड में सुधार या नए नामांकन के लिए तहसील या शहरों के चक्कर काटने से मुक्ति मिल गई है। पंचायती राज निदेशालय ने इसके लिए यूआईडीएआई से आधिकारिक रजिस्ट्रार के रूप में मान्यता प्राप्त की है। इससे ग्रामीणों का समय और पैसा तो बच ही रहा है, साथ ही पंचायत सहायकों को अतिरिक्त आय के अवसर भी मिल रहे हैं।
3. डिजिटल गवर्नेंस के माध्यम से वित्तीय-पंचायतों को आर्थिक रूप से स्वावलम्बी बनाने के लिए राज्य में डिजिटल राजस्व संग्रह प्रणाली को कड़ाई से लागू किया गया है।