नोएडा हिंसा को लेकर बड़ा खुलासा, श्रमिक आंदोलन के पीछे पाकिस्तान की साजिश
प्रकाशित: 17-04-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
नोएडा में हाल में हुई हिंसा को लेकर पुलिस कमिश्नर ने बड़ा खुलासा किया है, इसे एक सुनियोजित और दुर्भावनापूर्ण (मेलाफाइड इंटेंशन) गतिविधि बताया है. उनके अनुसार, यह कोई सामान्य श्रमिक आंदोलन के रूप में नहीं देखा जा रहा है. इसे योजनाबद्ध तरह से भड़काया गया है.
पुलिस जांच में कई नाम सामने आए हैं. यह नाम मनीषा चौहान, रूपेश राय और आदित्य आनंद के सामने आए हैं. मजदूरों को उकसाने के लिए माहौल खराब बनाने का आरोप है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, रूपेश राय वर्ष 2018 से और आदित्य आनंद 2020 से देशभर में विभिन्न आंदोलनों में सक्रिय रहे हैं. जहां पर क्राइसेस देखी गई, वहां पर इनकी मौजूदगी पाई गई है. रूपेश खुद को ऑटो चालक बताता है. वहीं आदित्य बेरोजगार है.
11 अप्रैल को रोड जाम करने को लेकर उकसाया गया
घटनाक्रम को देख जाए तो यह 31 मार्च और 1 अप्रैल को आंदोलन रूप ले रहा था. बाद में 9 और 10 अप्रैल को QR कोड के जरिए व्हाट्सएप ग्रुप तैयार किए गए. इसके माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों को जोड़ने का प्रयास किया गया. इसके बाद 10 अप्रैल को श्रमिकों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया. वहीं 11 अप्रैल को उन्हें रोड जाम करने को लेकर उकसाया गया.
भ्रामक जानकारी को फैलाने का प्रयास किया गया
हालांकि, दस अप्रैल के ही दिन प्रशासन और श्रमिकों के बीच एक शांतिपूर्ण समझौता हो गया. मगर इसके बाद भी भड़काऊ भाषण देकर माहौल को खराब कर दिया गया. पुलिस के मुताबिक, 11 अप्रैल को रूपेश राय और मनीषा चौहान को पकड़ लिया गया. वहीं आदित्य आनंद अभी भी फरार बताया जा रहा है. इसके बाद 13 अप्रैल को मदरसन कंपनी के करीब भीड़ को भड़काने का प्रयास किया गया. इस बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर फर्जी और भ्रामक जानकारी को फैलाने का प्रयास किया गया. इससे मजदूरों के बीच शेयर किया गया.
दोनों X हैंडल पाकिस्तान से कंट्रोल किए जा रहे थे
पड़ताल में सामने आया है कि दोनों X हैंडल पाकिस्तान से कंट्रोल किए जा रहे थे. बीते माह तीन महीनों से VPN के माध्यम से इन्हें ऑपरेट किया गया था. पुलिस के अनुसार, कुछ बाहरी तत्व औद्योगिक क्षेत्रों को अस्थिर करने का प्रयास कर रहे हैं. इसके जरिए सोशल मीडिया तथा डाटाबेस का उपयोग करके श्रमिको को भड़काया गया.
अब तक 13 केस दायर किए गए
इस केस में थाना सेक्टर-20 में FIR को दर्ज किया गया. अब तक 13 केस दायर किए गए. इनमें मीडिया अकाउंट्स को भी रखे गए हैं. पुलिस ने अब तक 62 लोगों को पकड़ा है. इनमें से 9 आगजनी के आरोपी बताए गए हैं. बताया जा रहा कि अधिकतर गिरफ्तार लोग श्रमिक नहीं बताए गए हैं. यह बाहरी हैं. पुलिस ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस पूरे केस में कड़ाई से कार्रवाई की जाएगी. दोषियों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत भी कार्रवाई की तैयारी हो रही है.
पुलिस जांच में कई नाम सामने आए हैं. यह नाम मनीषा चौहान, रूपेश राय और आदित्य आनंद के सामने आए हैं. मजदूरों को उकसाने के लिए माहौल खराब बनाने का आरोप है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, रूपेश राय वर्ष 2018 से और आदित्य आनंद 2020 से देशभर में विभिन्न आंदोलनों में सक्रिय रहे हैं. जहां पर क्राइसेस देखी गई, वहां पर इनकी मौजूदगी पाई गई है. रूपेश खुद को ऑटो चालक बताता है. वहीं आदित्य बेरोजगार है.
11 अप्रैल को रोड जाम करने को लेकर उकसाया गया
घटनाक्रम को देख जाए तो यह 31 मार्च और 1 अप्रैल को आंदोलन रूप ले रहा था. बाद में 9 और 10 अप्रैल को QR कोड के जरिए व्हाट्सएप ग्रुप तैयार किए गए. इसके माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों को जोड़ने का प्रयास किया गया. इसके बाद 10 अप्रैल को श्रमिकों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया. वहीं 11 अप्रैल को उन्हें रोड जाम करने को लेकर उकसाया गया.
भ्रामक जानकारी को फैलाने का प्रयास किया गया
हालांकि, दस अप्रैल के ही दिन प्रशासन और श्रमिकों के बीच एक शांतिपूर्ण समझौता हो गया. मगर इसके बाद भी भड़काऊ भाषण देकर माहौल को खराब कर दिया गया. पुलिस के मुताबिक, 11 अप्रैल को रूपेश राय और मनीषा चौहान को पकड़ लिया गया. वहीं आदित्य आनंद अभी भी फरार बताया जा रहा है. इसके बाद 13 अप्रैल को मदरसन कंपनी के करीब भीड़ को भड़काने का प्रयास किया गया. इस बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर फर्जी और भ्रामक जानकारी को फैलाने का प्रयास किया गया. इससे मजदूरों के बीच शेयर किया गया.
दोनों X हैंडल पाकिस्तान से कंट्रोल किए जा रहे थे
पड़ताल में सामने आया है कि दोनों X हैंडल पाकिस्तान से कंट्रोल किए जा रहे थे. बीते माह तीन महीनों से VPN के माध्यम से इन्हें ऑपरेट किया गया था. पुलिस के अनुसार, कुछ बाहरी तत्व औद्योगिक क्षेत्रों को अस्थिर करने का प्रयास कर रहे हैं. इसके जरिए सोशल मीडिया तथा डाटाबेस का उपयोग करके श्रमिको को भड़काया गया.
अब तक 13 केस दायर किए गए
इस केस में थाना सेक्टर-20 में FIR को दर्ज किया गया. अब तक 13 केस दायर किए गए. इनमें मीडिया अकाउंट्स को भी रखे गए हैं. पुलिस ने अब तक 62 लोगों को पकड़ा है. इनमें से 9 आगजनी के आरोपी बताए गए हैं. बताया जा रहा कि अधिकतर गिरफ्तार लोग श्रमिक नहीं बताए गए हैं. यह बाहरी हैं. पुलिस ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस पूरे केस में कड़ाई से कार्रवाई की जाएगी. दोषियों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत भी कार्रवाई की तैयारी हो रही है.