बंगलादेश की फजीहत कराकर यूटर्न लिया पाकिस्तान ने
प्रकाशित: 15-02-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
आदित्य नरेन्द्र
कहते हैं कि जो देश अपने इतिहास से कुछ सबक नहीं सीखता नुकसान उसकी किस्मत बन जाता है। कुछ ऐसा ही पिछले दिनों बंगलादेश के मामले में भी हुआ। पाकिस्तान ने खुद को बंगलादेश का हमदर्द साबित करने की कोशिश की और इस कोशिश में उसकी फजीहत कराकर खुद यूटर्न ले लिया। मामला आईसीसी टी-20 विश्व कप चैम्पियनशिप में नहीं खेलने का है। दरअसल बंगलादेश इस बात को लेकर सवाल उठा रहा था कि आईपीएल टीम केकेआर में उसके खिलाड़ी को चुनने के बाद क्यों हटाया गया। बंगलादेश की यह आपत्ति पूरी तरह से राजनीतिक थी क्योंकि 12 फरवरी को वहां आम चुनाव होने वाले थे। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने भारत में शरण ली हुई है। इसी वजह से बंगलादेश इस मामलों को तूल देकर राजनीतिक लाभ प्राप्त करने की कोशिश में था। पाकिस्तान ने इसे बीसीसीआई और भारत को नीचा दिखाने का मौका समझा और बंगलादेश को उकसाने में लग गया। इस बीच आईसीसी ने बंगलादेश को कई विकल्प दिए लेकिन बात नहीं बनी। इसके बाद आईसीसी ने बंगलादेश की जगह स्कॉटलैंड को विश्व कप में खेलने का न्यौता दे दिया। इसका परिणाम यह हुआ कि बंगलादेश विश्व कप से बाहर हो गया। यही वह बिंदु था जहां पाकिस्तान को लगा कि विश्व ािढकेट जगत में भारत और बीसीसीआई के अधिपत्य को चुनौती दी जा सकती है। उसने भारत के खिलाफ मैच खेलने से यह कहते हुए इंकार कर दिया कि विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट से बंगलादेश जैसी टीम को बाहर करना गलत है। आईसीसी के लिए यह बेहद मुश्किल समय था। भारत-पाक का ािढकेट मैच दुनिया का सबसे महंगा ािढकेट मैच माना जाता है कुछ रिपोर्टों के अनुसार इसकी लागत चार हजार करोड़ रुपए के आसपास बताई जाती है। आईसीसी इस आमदनी को छोड़ना गंवारा नहीं कर सकता क्योंकि उसे छोटे और आर्थिक रूप से कमजोर ािढकेट बोर्डों की मदद के लिए ज्यादा धन की जरूरत होती है। जहां तक बंगलादेश का सवाल है तो बंगलादेश दुनिया के सबसे बड़े ािढकेट बाजारों में से एक है। यहां 20 करोड़ से ज्यादा ािढकेट प्रेमी रहते हैं। आईसीसी इस बाजार को नाराज करने का जोखिम नहीं उठा सकता था। टी-20 विश्व कप से बाहर होने पर बंगलादेश ािढकेट बोर्ड को करीब 27 मिलियन डालर का नुकसान होने की आशंका थी। यह देखते हुए आईसीसी ने चौतरफा रणनीति अपनाने का फैसला किया। आमतौर पर आईसीसी टूर्नामेंट का बहिष्कार करने वाले देश को प्रतिबंध और जुर्माना झेलना पड़ता है। इसके विपरीत इस मामले में आईसीसी ने दरियादिली दिखाते हुए संकेत दिए कि 2028 से 2031 के बीच बंगलादेश को किसी बड़े टूर्नामेंट के आयोजन का मौका मिल सकता है। इस तरह बंगलादेश को समझाया गया कि भविष्य में उसके आर्थिक नुकसान की भरपाई कर दी जाएगी। अब आईसीसी को पाकिस्तान से निपटना था। उससे निपटने के लिए आईसीसी ने यूएई और श्रीलंका का सहारा लिया। इन दोनों बोर्डों ने पूर्व में पाकिस्तान की भरपूर मदद की थी। आईसीसी ने श्रीलंका बोर्ड से पाकिस्तन को एक पत्र लिखवाया जिसमें 2009 की घटना का पा करवाया। श्रीलंका ने पाकिस्तान को याद दिलाया कि कैसे 2009 में आतंकी हमले के बाद भी श्रीलंका ने पाकिस्तान जाकर सीरिज खेलने का फैसला किया था। इसके बाद आईसीसी ने यूएई को पाकिस्तान के सामने खड़ा कर दिया। यूएई ने पाक ािढकेट बोर्ड को ईमेल कर श्रीलंका का एहसान चुकाने की बात कही। इसके बाद आईसीसी ने अपना सबसे बड़ा और आखिरी दांव चलाने का फैसला किया। मीडिया में खबरें चलने लगी कि यदि यह मैच नहीं हुआ तो प्रसारण अधिकार लेने वाली कंपनी को भारी घाटा होगा। वह कंपनी इसे आईसीसी से वसूलेगी जबकि आईसीसी इसे पाकिस्तान से वसूलेगा। सैकड़ों करोड़ की चपत लगती देखकर आखिरकार पाकिस्तान ने फैसला बदल लिया और मैच खेलने को राजी हो गया। खेल में राजनीति घुसाकर पाकिस्तान ने बंगलादेश का जो नुकसान किया है उसे देखकर बंगलादेश हैरान है। उसके हाथ से विश्व कप में होने वाली कमाई भी चली गई। देखना होगा कि बंगलादेश इस फजीहत को कब तक याद रखता है।
कहते हैं कि जो देश अपने इतिहास से कुछ सबक नहीं सीखता नुकसान उसकी किस्मत बन जाता है। कुछ ऐसा ही पिछले दिनों बंगलादेश के मामले में भी हुआ। पाकिस्तान ने खुद को बंगलादेश का हमदर्द साबित करने की कोशिश की और इस कोशिश में उसकी फजीहत कराकर खुद यूटर्न ले लिया। मामला आईसीसी टी-20 विश्व कप चैम्पियनशिप में नहीं खेलने का है। दरअसल बंगलादेश इस बात को लेकर सवाल उठा रहा था कि आईपीएल टीम केकेआर में उसके खिलाड़ी को चुनने के बाद क्यों हटाया गया। बंगलादेश की यह आपत्ति पूरी तरह से राजनीतिक थी क्योंकि 12 फरवरी को वहां आम चुनाव होने वाले थे। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने भारत में शरण ली हुई है। इसी वजह से बंगलादेश इस मामलों को तूल देकर राजनीतिक लाभ प्राप्त करने की कोशिश में था। पाकिस्तान ने इसे बीसीसीआई और भारत को नीचा दिखाने का मौका समझा और बंगलादेश को उकसाने में लग गया। इस बीच आईसीसी ने बंगलादेश को कई विकल्प दिए लेकिन बात नहीं बनी। इसके बाद आईसीसी ने बंगलादेश की जगह स्कॉटलैंड को विश्व कप में खेलने का न्यौता दे दिया। इसका परिणाम यह हुआ कि बंगलादेश विश्व कप से बाहर हो गया। यही वह बिंदु था जहां पाकिस्तान को लगा कि विश्व ािढकेट जगत में भारत और बीसीसीआई के अधिपत्य को चुनौती दी जा सकती है। उसने भारत के खिलाफ मैच खेलने से यह कहते हुए इंकार कर दिया कि विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट से बंगलादेश जैसी टीम को बाहर करना गलत है। आईसीसी के लिए यह बेहद मुश्किल समय था। भारत-पाक का ािढकेट मैच दुनिया का सबसे महंगा ािढकेट मैच माना जाता है कुछ रिपोर्टों के अनुसार इसकी लागत चार हजार करोड़ रुपए के आसपास बताई जाती है। आईसीसी इस आमदनी को छोड़ना गंवारा नहीं कर सकता क्योंकि उसे छोटे और आर्थिक रूप से कमजोर ािढकेट बोर्डों की मदद के लिए ज्यादा धन की जरूरत होती है। जहां तक बंगलादेश का सवाल है तो बंगलादेश दुनिया के सबसे बड़े ािढकेट बाजारों में से एक है। यहां 20 करोड़ से ज्यादा ािढकेट प्रेमी रहते हैं। आईसीसी इस बाजार को नाराज करने का जोखिम नहीं उठा सकता था। टी-20 विश्व कप से बाहर होने पर बंगलादेश ािढकेट बोर्ड को करीब 27 मिलियन डालर का नुकसान होने की आशंका थी। यह देखते हुए आईसीसी ने चौतरफा रणनीति अपनाने का फैसला किया। आमतौर पर आईसीसी टूर्नामेंट का बहिष्कार करने वाले देश को प्रतिबंध और जुर्माना झेलना पड़ता है। इसके विपरीत इस मामले में आईसीसी ने दरियादिली दिखाते हुए संकेत दिए कि 2028 से 2031 के बीच बंगलादेश को किसी बड़े टूर्नामेंट के आयोजन का मौका मिल सकता है। इस तरह बंगलादेश को समझाया गया कि भविष्य में उसके आर्थिक नुकसान की भरपाई कर दी जाएगी। अब आईसीसी को पाकिस्तान से निपटना था। उससे निपटने के लिए आईसीसी ने यूएई और श्रीलंका का सहारा लिया। इन दोनों बोर्डों ने पूर्व में पाकिस्तान की भरपूर मदद की थी। आईसीसी ने श्रीलंका बोर्ड से पाकिस्तन को एक पत्र लिखवाया जिसमें 2009 की घटना का पा करवाया। श्रीलंका ने पाकिस्तान को याद दिलाया कि कैसे 2009 में आतंकी हमले के बाद भी श्रीलंका ने पाकिस्तान जाकर सीरिज खेलने का फैसला किया था। इसके बाद आईसीसी ने यूएई को पाकिस्तान के सामने खड़ा कर दिया। यूएई ने पाक ािढकेट बोर्ड को ईमेल कर श्रीलंका का एहसान चुकाने की बात कही। इसके बाद आईसीसी ने अपना सबसे बड़ा और आखिरी दांव चलाने का फैसला किया। मीडिया में खबरें चलने लगी कि यदि यह मैच नहीं हुआ तो प्रसारण अधिकार लेने वाली कंपनी को भारी घाटा होगा। वह कंपनी इसे आईसीसी से वसूलेगी जबकि आईसीसी इसे पाकिस्तान से वसूलेगा। सैकड़ों करोड़ की चपत लगती देखकर आखिरकार पाकिस्तान ने फैसला बदल लिया और मैच खेलने को राजी हो गया। खेल में राजनीति घुसाकर पाकिस्तान ने बंगलादेश का जो नुकसान किया है उसे देखकर बंगलादेश हैरान है। उसके हाथ से विश्व कप में होने वाली कमाई भी चली गई। देखना होगा कि बंगलादेश इस फजीहत को कब तक याद रखता है।