वर्षों से राष्ट्र की सेवा में समर्पित Virarjun अर्जुनस्य प्रतिज्ञे द्वे, न दैन्यं, न पलायनम् ।

शाहिद अफरीदी इमरान के मामले में चुप क्यों?

प्रकाशित: 22-02-2026 | लेखक: आदित्य नरेंद्र
शाहिद अफरीदी इमरान के मामले में चुप क्यों?
आदित्य नरेन्द्र
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और उसकी विश्व कप जीतने वाली टीम के कप्तान रहे इमरान खान एक बार फिर अंतर्राष्ट्रीय जगत में चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। यह तब हुआ जब पाकिस्तान की अड़ियाला जेल में बंद इमरान खान की बीमारी से चिंतित सुनील गावस्कर और कपिल देव सहित 14 पूर्व ािढकेट टीम कप्तानों ने पाकिस्तान सरकार को एक खुला पत्र लिखकर इमरान खान के स्वास्थ्य के प्रति चिंता जताई और उनके इलाज के लिए समुचित चिकित्सा व्यवस्था करने की मांग की। इन 14 पूर्व ािढकेट कप्तानों में 2 भारत के, 6 आस्ट्रेलिया, 4 इंग्लैंड एक वेस्टइंडीज और एक न्यूजीलैंड से हैं। हैरानी की बात यह है कि इस लिस्ट में पाकिस्तान का कोई भी पूर्व ािढकेटर शामिल नहीं है। पूछा जा रहा है कि पाक ािढकेट टीम का पूर्व कप्तान शाहिद अफरीदी जैसा बड़ा नाम भी इस मामले में चुप क्यों है। वकार और अकरम जैसे ािढकेट खिलाड़ियों ने भी चुप्पी साध रखी है। मीडिया में पाकिस्तान से आई रिपोर्टों में बताया गया है कि उनकी एक आंख की 85 फीसदी रोशनी खत्म हो चुकी है और उनका स्वास्थ्य भी बेहद खराब है। इमरान खान की बहनों ने शहबाज शरीफ सरकार और आर्मी चीफ आसिम मुनीर पर जेल में बंद इमरान खान को मारने की साजिश रचने का आरोप लगाया है। इमरान की बहन उजमा ने कहा कि जब अडियाला जेल में उनकी इमरान से मुलाकात हुई थी तब उन्होंने कहा था कि यदि जेल में मेरे साथ कुछ होता है तो उसके जिम्मेदार आसिम मुनीर होंगे। पिछली मुलाकात में मेरे भाई ने जोर देकर कहा था कि मैं बाहर जाकर यह बात कहूं लेकिन मैंने मना कर दिया था कि मैं ऐसा नहीं कहूंगी। उन्होंने मुझे कहा था कि वे मुझे धीरे-धीरे मारेंगे और इसके लिए आसिम मुनीर जिम्मेदार होंगे। अब जिस तरह से प्रशासन उनके साथ व्यवहार कर रहा है और गृहमंत्री नकवी जैसे लोग जिस तरह के बयान दे रहे हैं उससे मुझे लग रहा है कि इमरान सही थे। उजमा ने कहा कि मोहसिन नकवी हमें धमका रहे हैं। उन्होंने खून का स्वाद चख लिया है। उज्मा ने चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि उनके भाई या परिवार को कोई नुकसान हुआ तो वे बदला लेंगी। उन्होंने कहा कि यदि इमरान खान या हमें कुछ हुआ तो याद रखिए हम किसी की आने वाली पीढ़ियों को भी नहीं छोड़ेंगे। अब सवाल उठता है कि मामला यहां तक कैसे पहुंचा। दरअसल जब सेना के कंधों पर चढ़कर प्रधानमंत्री बनने वाले इमरान खान ने भारत की तरह ही रूस और अमेरिका के बीच संतुलन साधकर चलने का प्रयास किया तो अमेरिका का नाराज होना स्वभाविक था। अमेरिका को यह अच्छा नहीं लगा कि पाकिस्तान सस्ते ाtढड आयल और गेंहू के लिए रूस के पास जाए। उधर इमरान ने अप्रत्यक्ष रूप से देश का शासन चलाने वाली सेना को भी भ्रष्टाचार में लिप्त बताकर अपने खिलाफ कर लिया था। पाकिस्तान में सेना अरबों रुपए का बिजनेस भी चलाती है। अमेरिका और सेना की नाराजगी इमरान पर भारी पड़ी जिसका परिणाम यह हुआ कि उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर उन्हें प्रधानमंत्री के पद से हटा दिया गया और उन पर कई मुकदमें लाद दिए गए। इन्हीं में से कुछ मुकदमों में उन्हें जेल की सजा हो गई। परिणामस्वरूप आज इमरान खान जेल में हैं। उनकी पहली पत्नी जेमिमा खान से उन्हें दो बेटे हैं जो यूके के नागरिक हैं। उनके यह दोनों बेटे पिछले कापी समय से इमरान से मिलने का प्रयास कर रहे हैं। लेकिन पाकिस्तान की सरकार उन्हें वीजा नहीं दे रही। इमरान के साथ दिक्कत यह है कि तीन दशक पुरानी उनकी पार्टी में कोई ऐसा बड़ा और मजबूत चेहरा नहीं है जो उनके समर्थन में चल रहे आंदोलन को सही दिशा दे सके। पिछले साल भी इमरान के मरने की खबर फैलने से पूरे पाकिस्तान में हंगामा मच गया था। जिसका इमरान को कोई फायदा नहीं हुआ। पाक सेना और अमेरिका का गठजोड़ इमरान पर भारी पड़ा है। दुनियाभर में मानवाधिकार का ढिंढोरा पीटने वाला अमेरिका भारत को तो छोटी-छोटी घटनाओं के लिए कठघरे में खड़ा करता रहता है लेकिन उसे पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री के मानवाधिकार दिखाई नहीं दे रहे। है न यह आश्चर्य की बात।