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अगर ईरान के अंदर घुसेगी सेना, तो वो ना इजरायल की फौज होगी, ना US की! तेहरान में जमीनी जंग के लिए तीसरा गुट तैयार, क्या ट्रंप होंगे राजी?

प्रकाशित: 07-03-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
अगर ईरान के अंदर घुसेगी सेना, तो वो ना इजरायल की फौज होगी, ना US की! तेहरान में जमीनी जंग के लिए तीसरा गुट तैयार, क्या ट्रंप होंगे राजी?
इजरायल-अमेरिका-ईरान का युद्ध अब अपने चरम पर पहुंच गया है। इस दौरान कई बार ईरान में ग्राउंड ऑपरेशन की चर्चा उठी। हालांकि, हर बार इस सवाल को एक कन्फ्यूजन जैसा बनाकर टाल दिया गया। पत्रकारों ने ट्रंप से ग्राउंड ऑपरेशन के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि ये समय की बर्बादी होगी। दूसरी तरफ, उन्होंने ये भी कहा कि इसकी संभावना से इनकार भी नहीं किया जा सकता।
अब एक नई जानकारी सामने आ रही है। ब्रिटिश मीडिया की एक रिपोर्ट की मानें तो इजरायल और अमेरिका के अलावा एक तीसरा गुट भी है, जो ईरान में घुसने के लिए तैयार बैठा है। इसकी भनक ईरान को भी लग गई, जिसके बाद उसने उसे धमकाया और कहा कि अगर ऐसा होता है तो बख्शे नहीं जाओगे।
कौन है ये तीसरा गुट?
उत्तरी इराक में देश निकाला झेल रहे ईरानी कुर्दिश विपक्षी ग्रुप्स ने ब्रिटिश मीडिया को बताया है कि उनका बॉर्डर पार करने का प्लान है, और दशकों से है। कुर्दिस्तान फ्रीडम पार्टी (PAK) की हाना यजदानपना ने कहा, "हम पिछले 47 सालों से, इस्लामिक रिपब्लिक के समय से ही इसकी तैयारी कर रहे हैं," जो सबसे बड़ी आर्म्ड फोर्स होने का दावा करती है।
क्या ट्रंप पर भरोसा कर सकती है ये आर्मी?
जानकारों का मानना है कि ईरान के खिलाफ लड़ाई में शामिल होना एक बहुत बड़ा रिस्क होगा। अगर ट्रंप इसके बदले में कुछ ऑफर भी करते हैं, तो ये भी देखना होगा कि ये मिशन कहीं कुर्दों के लिए 'आत्महत्या' जैसा ना बन जाए। आपको बता दें कि कुर्द ईरान, इराक, सीरिया और तुर्की में बिखरे हुए हैं। उन्हें सताने और धोखा देने का एक लंबा इतिहास रहा है।
सवाल ये है कि क्या अमेरिका पर भरोसा किया जा सकता है कि वह अपने किए हुए किसी भी वादे को पूरा करेगा? सीरिया में कई कुर्द, जो IS के खिलाफ लड़ाई में अमेरिका के पक्के साथी हैं, हाल ही में तब नाराज हुए जब ट्रंप ने उनके खिलाफ दमिश्क में ट्रांजिशनल सरकार का साथ दिया।
हालांकि, कुछ ईरानी कुर्दों का कहना है कि अब कार्रवाई करने का समय आ गया है, चाहे अमेरिकी साथ दें या ना दें। वहीं, कुछ कुर्दों का कहना है कि अगर हमारे ऊपर की हवा साफ नहीं हुई तो हम हिल नहीं सकते। इसका मतलब है कि अमेरिका को उस इलाके को नो-फ्लाई जोन घोषित करना होगा और पहले ईरान के हथियारों के डिपो को खत्म करने की जरूरत है। अगर ऐसा नहीं होता है तो ईरान में घुसना आत्मघाती होगा।
आपको बता दें कि व्हाइट हाउस ने उस रिपोर्ट को गलत बताया है जिसमें कहा गया था कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कुर्दों को हथियार देने पर विचार कर रहे हैं।
ईरान ने धमकाया
ईरान ने इराक के कुर्दिस्तान इलाके को चेतावनी दी है कि अगर कोई भी ईरानी कुर्द ग्रुप उनके इलाके से ईरान में घुसता है, तो कुर्दिस्तान इलाके की सभी जगहों को टारगेट किया जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की डिफेंस काउंसिल ने कहा कि “अभी तक, इस इलाके में सिर्फ अमेरिका, इजरायल और अलगाववादी ग्रुप के बेस को टारगेट किया गया है।” इसने यह भी चेतावनी दी कि “ISIS हमले जैसे मुश्किल दिनों में, ईरान इराकी कुर्दिस्तान को जो भी मदद देता है, उसे रोक दिया जाएगा।”