रूस में तैनात होंगे 3000 भारतीय सैनिक और 10 विमान, चीन-अमेरिका की बढ़ी धड़कनें
प्रकाशित: 20-04-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
भारत और रूस की अटूट दोस्ती अब कागजों से निकलकर जमीन पर एक शक्तिशाली हकीकत बन गई है. दोनों देशों के बीच हुए ‘पारस्परिक सैन्य रसद समझौते’ (RELOS) के लागू होने के साथ ही रक्षा सहयोग के एक नए युग की शुरुआत हो गई है. रूस के आधिकारिक कानूनी पोर्टल के अनुसार, यह समझौता 12 जनवरी 2026 से प्रभावी हो गया है, जिसने रक्षा जगत में हलचल मचा दी है. इस समझौते की नींव फरवरी 2025 में रखी गई थी, जिसके बाद दिसंबर 2025 में रूस ने इसे कानूनी रूप से पारित कर मंजूरी दी. अब 12 जनवरी से इसके लागू होने का मतलब है कि भारतीय नौसेना को आर्कटिक क्षेत्र और रूसी बंदरगाहों तक सीधी रसद पहुंच मिल जाएगी, वहीं रूसी सेना को हिंद महासागर में भारतीय ठिकानों का समर्थन प्राप्त होगा.
3000 सैनिक और 5 युद्धपोत: क्या है डील?
इस ऐतिहासिक समझौते के तहत अब भारत और रूस एक-दूसरे की सैन्य सुविधाओं का खुलकर उपयोग कर सकेंगे. रिपोर्ट के मुताबिक, इस डील के तहत एक समय में अधिकतम 3,000 सैनिक एक-दूसरे की जमीन पर तैनात रह सकते हैं.
यह समझौता शुरुआत में 5 साल के लिए किया गया है, जिसे दोनों देशों की आपसी सहमति से अगले 5 साल के लिए और बढ़ाया जा सकेगा.
क्यों अहम है यह समझौता?
चीन के साथ बढ़ते सीमा विवाद और वैश्विक स्तर पर बदलते समीकरणों के बीच, रूस का भारत को अपने सैन्य अड्डों तक पहुंच देना एक बहुत बड़ा रणनीतिक संदेश है. यह न केवल भारतीय सेना की ऑपरेशनल रेंज को बढ़ाएगा, बल्कि भविष्य में होने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यासों और मानवीय सहायता अभियानों को भी नई धार देगा.
3000 सैनिक और 5 युद्धपोत: क्या है डील?
इस ऐतिहासिक समझौते के तहत अब भारत और रूस एक-दूसरे की सैन्य सुविधाओं का खुलकर उपयोग कर सकेंगे. रिपोर्ट के मुताबिक, इस डील के तहत एक समय में अधिकतम 3,000 सैनिक एक-दूसरे की जमीन पर तैनात रह सकते हैं.
यह समझौता शुरुआत में 5 साल के लिए किया गया है, जिसे दोनों देशों की आपसी सहमति से अगले 5 साल के लिए और बढ़ाया जा सकेगा.
क्यों अहम है यह समझौता?
चीन के साथ बढ़ते सीमा विवाद और वैश्विक स्तर पर बदलते समीकरणों के बीच, रूस का भारत को अपने सैन्य अड्डों तक पहुंच देना एक बहुत बड़ा रणनीतिक संदेश है. यह न केवल भारतीय सेना की ऑपरेशनल रेंज को बढ़ाएगा, बल्कि भविष्य में होने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यासों और मानवीय सहायता अभियानों को भी नई धार देगा.