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आरोग्य उत्सव 2026: आयुष का वैश्विक शंखनाद

प्रकाशित: 02-03-2026 | लेखक: संपादकीय टीम
आरोग्य उत्सव 2026: आयुष का वैश्विक शंखनाद
डॉ. विपिन कुमार
देश की राजधानी दिल्ली स्थित भव्य भारत मण्डपम में आयोजित तीन दिवसीय आरोग्य उत्सव एवं प्रदर्शनी 2026' ने भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के गौरव को पुनर्जीवित कर दिया है। यह आयोजन केवल एक प्रदर्शन मात्र नहीं था, बल्कि यह भारत की प्राचीन विधाओं-आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी-को वैश्विक पटल पर एक नई पहचान देने का महायज्ञ था। स्वास्थ्य से समृद्धि के संकल्प के साथ शुरू हुए इस उत्सव ने सिद्ध कर दिया कि भारत का पारंपरिक ज्ञान आज के आधुनिक युग की जटिल स्वास्थ्य समस्याओं का स्थायी समाधान देने में सक्षम है।
इस समारोह के समापन सत्र में पतंजलि आयुर्वेद के प्रबंध निदेशक, आचार्य बालकृष्ण ने मुख्य अतिथि के रूप में अपनी उपस्थिति से आयोजन को नई ऊँचाई प्रदान की। उनके ओजस्वी संबोधन ने उपस्थित जनसमूह और युवा उद्यमियों में नया उत्साह भर दिया। आचार्य जी ने स्पष्ट किया कि आयुर्वेद केवल एक उपचार पद्धति नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक पूर्ण और वैज्ञानिक कला है।
उन्होंने अपने वक्तव्य में शोध और प्रमाणिकता पर विशेष बल दिया। उनका मानना है कि जब तक हम अपने प्राचीन ग्रंथों के ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक मापदंडों पर नहीं परखेंगे, तब तक विश्व इसे स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने पतंजलि के माध्यम से किए गए वैश्विक प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय जड़ी-बूटियों की शक्ति को अब दुनिया के कोने-कोने तक पहुँचाने का समय आ गया है। उनकी उपस्थिति ने यह संदेश दिया कि नेतृत्व यदि दृढ़ हो, तो स्वदेशी ज्ञान पूरी दुनिया का मार्गदर्शन कर सकता है।
उत्सव की एक बड़ी विशेषता दिल्ली सरकार के कला, संस्कृति और भाषा विभाग की सािढय भागीदारी रही। विभाग के कलाकारों ने अपनी प्रतिभा से यह प्रमाणित किया कि आरोग्य का संबंध केवल शरीर से नहीं, बल्कि मन और आत्मा की प्रसन्नता से भी है।
साहित्य कला परिषद के माध्यम से प्रस्तुत किए गए भारतीय शास्त्राrय नृत्यों-कथक और भरतनाट्यम-ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इन नृत्यों में शारीरिक मुद्राओं और श्वसन ािढया का जो तालमेल दिखा, वह प्रत्यक्ष रूप से योग और स्वास्थ्य के सिद्धांतों से जुड़ा था। संगीत और लोक कलाओं की इन प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को सकारात्मक ऊर्जा से भर दिया, जिससे यह संदेश गया कि मानसिक शांति और सांस्कृतिक जड़ें स्वस्थ जीवन के अनिवार्य अंग हैं।
आरोग्य उत्सव की सफलता में देश की अग्रणी संस्थाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा, जिन्होंने इस आयोजन को तकनीकी और व्यापारिक सुदृढ़ता प्रदान की:भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफ़एसएआई): सुरक्षा और गुणवत्ता के मानक तय करने में इस संस्था की भूमिका अद्वितीय रही। 'आयुर्वेद आहार' के विशेष दिशा-निर्देशों के माध्यम से प्राधिकरण ने उपभोक्ताओं को शुद्ध और मिलावट रहित उत्पादों के प्रति आश्वस्त किया।कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (अपीड़ा ): भारतीय कृषि उत्पादों और औषधीय पौधों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुँचाने के लिए इस संस्था ने एक सुगम मार्ग तैयार किया। इन्होंने प्रदर्शकों को निर्यात की बारीकियों और वैश्विक गुणवत्ता मानकों से अवगत कराया। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई): इस संस्थान ने एक अभिनव दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए बताया कि मिट्टी की गुणवत्ता और भू-वैज्ञानिक संरचना का औषधीय पौधों की प्रभावशीलता पर क्या प्रभाव पड़ता है। मिट्टी से स्वास्थ्य के इस अनूठे संबंध ने शोधकर्ताओं का विशेष ध्यान खींचा।भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी): स्वास्थ्य सुरक्षा के साथ-साथ वित्तीय सुरक्षा के महत्व को रेखांकित करते हुए एलआईसी ने जन-मानस को भविष्य की अनिश्चितताओं के प्रति जागरूक किया।
इस उत्सव का सबसे आकर्षक हिस्सा आधुनिक तकनीक और युवा प्रतिभा का संगम था। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (श्एश्ं) मंत्रालय के सहयोग से यहाँ नवाचारों की एक पूरी श्रृंखला देखने को मिली:: नए स्टार्टअप्स ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Aघ्) पर आधारित 'नाड़ी परीक्षण मशीनों' और 'स्मार्ट स्वास्थ्य निगरानी उपकरणों' का प्रदर्शन किया। ये उपकरण प्राचीन नाड़ी ज्ञान को डिजिटल तकनीक के माध्यम से सटीक रूप में प्रस्तुत करने की क्षमता रखते हैं।जैविक और पूरक आहार: रसायनों से मुक्त ऑर्गेनिक सप्लीमेंट्स और प्राकृतिक ऊर्जा वर्धकों ने बड़ी संख्या में लोगों को अपनी ओर आकर्षित किया। युवाओं द्वारा तैयार किए गए ये उत्पाद स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती वैश्विक चेतना के अनुरूप थे।उत्सव ने उभरते उद्यमियों को केवल मंच ही नहीं दिया, बल्कि उनके व्यापार विस्तार के लिए ठोस अवसर भी प्रदान किए। निवेशक सम्मेलन' (घ्हनूद शू) के माध्यम से कई स्टार्टअप्स को बड़ी कंपनियों और वित्तीय संस्थानों से सहयोग प्राप्त हुआ। आधिकारिक पोर्टल के जरिए उन्हें अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से सीधे संवाद करने का अवसर मिला, जिससे स्वदेशी उत्पादों की वैश्विक मांग में वृद्धि सुनिश्चित हुई।
सरकार की पीएमएस योजना के अंतर्गत छोटे उद्योगों को जो वित्तीय सहायता और सब्सिडी प्रदान की गई, उसने प्रधानमंत्री के 'आत्मनिर्भर भारत' और 'लोकल टू ग्लोबल' के संकल्प को धरातल पर उतारने का कार्य किया।
आरोग्य उत्सव 2026 ने यह सिद्ध कर दिया है कि भारत अपनी प्राचीन जड़ों की ओर लौट रहा है, लेकिन एक आधुनिक और वैज्ञानिक दृष्टि के साथ। जहाँ आचार्य बालकृष्ण के विचारों ने वैचारिक दिशा दी, वहीं सरकारी संस्थाओं ने इसे धरातल पर मज़बूती प्रदान की। दिल्ली सरकार के सांस्कृतिक प्रयासों ने इसे एक उत्सव का रूप दिया, तो स्टार्टअप्स ने भविष्य की तकनीक से परिचय कराया।
भारत मण्डपम् से उठी यह 'आयुष की गूँज' आने वाले समय में भारत को विश्व की स्वास्थ्य राजधानी (वेलनेस कैपिटल) बनाने की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। यह उत्सव केवल तीन दिनों का आयोजन नहीं, बल्कि एक नए, स्वस्थ और समृद्ध भारत के निर्माण का शंखनाद है।
(लेखक वरिष्ठ स्तंभकार हैं।