संसद गतिरोध, काकरोच जनता पार्टी - विपक्ष की पेपर लीक राजनीति
प्रकाशित: 23-07-2026 | लेखक: संपादकीय टीम
अशोक उपाध्याय
संसद के मानसून सत्र में गतिरोध पैदा हो गया है और काकरोच जनता पार्टी के हिंसक प्रदर्शन ने सुलह सफाई की गुंजाइश को कठिन कर दिया है। अब विपक्षी दलों ने भी केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और राजनीतिक शतरंज की बिसात पर हर कोई एक दूसरे को पटखनी देने की कोशिश कर रहा है।
कॉकरोच जनता पार्टी के संसद मार्च के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का नीट पेपर लीक पर पहली बार बयान सामने आया है। मोदी ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के संसदीय दल की बैठक में कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं होने देंगे। पेपर लीक के दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाएगी। पेपर लीक राजनीति का विषय नहीं है। छात्रों के भविष्य का नुकसान न हो इसलिए दोबारा परीक्षा कराई गईऔर उसे सफलतापूर्वक पूरा किया। पेपर लीक के मामले में सरकार की ओर से तुरंत कार्रवाई की गई। छात्रों को लेकर सरकार संवेदनशील है। यह सिर्फ केन्द्र सरकार का मामला नहीं है। प्रधानमंत्री ने इस पूरे मामले को ‘घोर पाप' बताया और कहा कि सभी राज्य सरकारों को मिलकर काम करना होगा ताकि आगे कभी पेपर लीक जैसी घटना न हो।
मोदी का ये बयान कॉकरोच जनता पार्टी के संसद मार्च के बाद आया है। इस मार्च के दौरान हिंसा की घटनाएं भी हुई और उग्र प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए बल प्रयोग करना पड़ा और आंसू गैस के गोले दागे गए। काकरोच जनता पार्टी की ओर से सौरव दास और आशुतोष ने स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात की। दोनों के बीच दो दौर की बातचीत हुई लेकिन बात नहीं बनी।
तमाम विपक्षी दल केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तब से निशाना बना रहे हैं जबसे उन्होंने इतिहास के पाठ्यक्रम की कमियां उजागर कीं और उसमें सुधार के लिए कदम उठाए हैं। कांग्रेस और वामपंथियों के पास धर्मेंद्र प्रधान के तर्क का जबाब नहीं है फिर भी वे किसी न किसी रूप में उन्हें निशाना साधने में लगे हैं।
खुद धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि सरकार न तो इतिहास बदलेगी और न ही इसे फिर से लिखेगी बल्कि सभी ऐतिहासिक सच्चाईयों को सामने लाएगी और गुमनाम नायकों और भूले-बिसरे नेताओं के बारे में बताएगी। उन्होंने कहा कि देश का समृद्ध और गौरवशाली इतिहास केवल अंग्रेजों के खिलाफ उसके स्वतंत्रता संग्राम तक ही सीमित नहीं है बल्कि यह बुद्ध और चंद्रगुप्त मौर्य के समय से भी आगे जाता है जिससे भारत दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यता बन गया है। महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी, बीरबल, टोडरमल और चाणक्य के बारे में भी पढ़ने की जरूरत है।
दरअसल, विपक्षी नेताओं द्वारा आरोप लगाया जा रहा है कि केंद्र सरकार ने हिंदू मुस्लिम राजनीति करने और अपनी हिंदू विचारधारा को आगे ले जाने के लिए अभी तक किताबों में पढ़ाया गया ‘अकबर द ग्रेट' जैसे अध्याय में बदलाव किया है। इस पर शिक्षा मंत्री ने कहा कि एक परिवार और एक समूह ने अपनी सुविधानुसार चीजों को दिखाने का षडयंत्र रचा। इसकी शुरुआत सबसे पहले लॉर्ड मेकॉले से हुई।
यह ऐतिहासिक तथ्य है कि भारत को लंबे समय तक अपनी गुलामी में रखने के लिए 1835 में ब्रिटिश पार्लियामेंट में कहा गया था कि भारत को अगर लंबे समय तक गुलामी में रखना है तो भारत की शिक्षा प्रणाली को तहस नहस करना पड़ेगा। भारत के इतिहास को भुलाना पड़ेगा। इतिहास दर्पण होता है भविष्य का रास्ता निकालने के लिए।
यह एक और तथ्य है कि काकरोच जनता पार्टी एक व्यंग्यात्मक सोशल मीडिया आंदोलन है जो उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की एक टिप्पणी के बाद उभरा। इसमें मुख्य न्यायाधीश ने कहा था कि ऑनलाइन सक्रियता की आड़ में व्यवस्था पर हमला करने वाले बेरोज़गार युवाओं को ‘कॉकरोच' जैसा माना जा सकता है। बाद में मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि उनका इशारा फर्जी डिग्री रखने वाले व्यक्तियों की ओर था न कि सभी युवाओं के लिए। न्यायमूर्ति सूर्यकांत के इसी बयान के बाद अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी' बनाने की घोषणा की। देखते ही देखते उनके सोशल मीडिया अकाउंट्स पर फॉलोअर्स की बाढ़ आ गई।
संसद मार्च के एक दिन बाद लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी सक्रिय हुये और प्रधानमंत्री आवास के निकट धरने पर बैठ गए। उन्होंने एक्स पोस्ट कर कहा कि छात्र पर हमला हर भारतीय परिवार पर हमला है। प्रधानमंत्री मोदी सोचते हैं कि वे बिना जवाब दिए बिना कोई नतीजा भुगते बच सकते हैं - वे ऐसा नहीं कर पाएंगे, इस बार तो बिल्कुल नहीं।
यहां एक प्रश्न यह उठता है कि राहुल गांधी ने प्रदर्शन के लिए प्रधानमंत्री आवास ही क्यों चुना, वह जंतर-मंतर क्यों नहीं गए। पहले उन्होंने पेपर लीक मामले की संसद में चर्चा कराने की मांग की और जब सरकार ने उसे मान लिया तो उन्होंने एक और मांग जोड़ दी कि जब तक धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं होगा तब तक वह धरना प्रदर्शन जारी रखेंगे। राहुल गांधी के इस व्यवहार को कोई भी समझ सकता है कि वह तो हर हाल में यह चाहते हैं कि संसद नहीं चले।
काकरोच जनता पार्टी का धरना प्रदर्शन जारी है और उसकी आड़ मोदी के धुर विरोधी सोशल मीडिया का सहारा लेकर यह जताने की कोशिश कर रहे हैं कि इस बार मोदी को उग्र प्रदर्शनकारियों के सहारे सत्ता से बाहर कर दिया जायेगा।
पेपर लीक के लिए सिर्फ केंद्र सरकार को दोषी ठहराने की राजनीति हो रही है लेकिन हकीकत यह है कि राज्य सरकारों के अपेक्षित सहयोग के बिना राष्ट्रीय स्तर की किसी भी परीक्षा का आयोजन संभव ही नहीं है। केंद्र सरकार परीक्षा के मानदंड तय करती है और उसका ईमानदारी से पालन हो तो पेपर लीक होने का प्रश्न ही नहीं उठता।
(लेखक पूर्व संपादक, यूनीवार्ता हैं।)
संसद के मानसून सत्र में गतिरोध पैदा हो गया है और काकरोच जनता पार्टी के हिंसक प्रदर्शन ने सुलह सफाई की गुंजाइश को कठिन कर दिया है। अब विपक्षी दलों ने भी केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और राजनीतिक शतरंज की बिसात पर हर कोई एक दूसरे को पटखनी देने की कोशिश कर रहा है।
कॉकरोच जनता पार्टी के संसद मार्च के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का नीट पेपर लीक पर पहली बार बयान सामने आया है। मोदी ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के संसदीय दल की बैठक में कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं होने देंगे। पेपर लीक के दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाएगी। पेपर लीक राजनीति का विषय नहीं है। छात्रों के भविष्य का नुकसान न हो इसलिए दोबारा परीक्षा कराई गईऔर उसे सफलतापूर्वक पूरा किया। पेपर लीक के मामले में सरकार की ओर से तुरंत कार्रवाई की गई। छात्रों को लेकर सरकार संवेदनशील है। यह सिर्फ केन्द्र सरकार का मामला नहीं है। प्रधानमंत्री ने इस पूरे मामले को ‘घोर पाप' बताया और कहा कि सभी राज्य सरकारों को मिलकर काम करना होगा ताकि आगे कभी पेपर लीक जैसी घटना न हो।
मोदी का ये बयान कॉकरोच जनता पार्टी के संसद मार्च के बाद आया है। इस मार्च के दौरान हिंसा की घटनाएं भी हुई और उग्र प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए बल प्रयोग करना पड़ा और आंसू गैस के गोले दागे गए। काकरोच जनता पार्टी की ओर से सौरव दास और आशुतोष ने स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात की। दोनों के बीच दो दौर की बातचीत हुई लेकिन बात नहीं बनी।
तमाम विपक्षी दल केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तब से निशाना बना रहे हैं जबसे उन्होंने इतिहास के पाठ्यक्रम की कमियां उजागर कीं और उसमें सुधार के लिए कदम उठाए हैं। कांग्रेस और वामपंथियों के पास धर्मेंद्र प्रधान के तर्क का जबाब नहीं है फिर भी वे किसी न किसी रूप में उन्हें निशाना साधने में लगे हैं।
खुद धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि सरकार न तो इतिहास बदलेगी और न ही इसे फिर से लिखेगी बल्कि सभी ऐतिहासिक सच्चाईयों को सामने लाएगी और गुमनाम नायकों और भूले-बिसरे नेताओं के बारे में बताएगी। उन्होंने कहा कि देश का समृद्ध और गौरवशाली इतिहास केवल अंग्रेजों के खिलाफ उसके स्वतंत्रता संग्राम तक ही सीमित नहीं है बल्कि यह बुद्ध और चंद्रगुप्त मौर्य के समय से भी आगे जाता है जिससे भारत दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यता बन गया है। महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी, बीरबल, टोडरमल और चाणक्य के बारे में भी पढ़ने की जरूरत है।
दरअसल, विपक्षी नेताओं द्वारा आरोप लगाया जा रहा है कि केंद्र सरकार ने हिंदू मुस्लिम राजनीति करने और अपनी हिंदू विचारधारा को आगे ले जाने के लिए अभी तक किताबों में पढ़ाया गया ‘अकबर द ग्रेट' जैसे अध्याय में बदलाव किया है। इस पर शिक्षा मंत्री ने कहा कि एक परिवार और एक समूह ने अपनी सुविधानुसार चीजों को दिखाने का षडयंत्र रचा। इसकी शुरुआत सबसे पहले लॉर्ड मेकॉले से हुई।
यह ऐतिहासिक तथ्य है कि भारत को लंबे समय तक अपनी गुलामी में रखने के लिए 1835 में ब्रिटिश पार्लियामेंट में कहा गया था कि भारत को अगर लंबे समय तक गुलामी में रखना है तो भारत की शिक्षा प्रणाली को तहस नहस करना पड़ेगा। भारत के इतिहास को भुलाना पड़ेगा। इतिहास दर्पण होता है भविष्य का रास्ता निकालने के लिए।
यह एक और तथ्य है कि काकरोच जनता पार्टी एक व्यंग्यात्मक सोशल मीडिया आंदोलन है जो उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की एक टिप्पणी के बाद उभरा। इसमें मुख्य न्यायाधीश ने कहा था कि ऑनलाइन सक्रियता की आड़ में व्यवस्था पर हमला करने वाले बेरोज़गार युवाओं को ‘कॉकरोच' जैसा माना जा सकता है। बाद में मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि उनका इशारा फर्जी डिग्री रखने वाले व्यक्तियों की ओर था न कि सभी युवाओं के लिए। न्यायमूर्ति सूर्यकांत के इसी बयान के बाद अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी' बनाने की घोषणा की। देखते ही देखते उनके सोशल मीडिया अकाउंट्स पर फॉलोअर्स की बाढ़ आ गई।
संसद मार्च के एक दिन बाद लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी सक्रिय हुये और प्रधानमंत्री आवास के निकट धरने पर बैठ गए। उन्होंने एक्स पोस्ट कर कहा कि छात्र पर हमला हर भारतीय परिवार पर हमला है। प्रधानमंत्री मोदी सोचते हैं कि वे बिना जवाब दिए बिना कोई नतीजा भुगते बच सकते हैं - वे ऐसा नहीं कर पाएंगे, इस बार तो बिल्कुल नहीं।
यहां एक प्रश्न यह उठता है कि राहुल गांधी ने प्रदर्शन के लिए प्रधानमंत्री आवास ही क्यों चुना, वह जंतर-मंतर क्यों नहीं गए। पहले उन्होंने पेपर लीक मामले की संसद में चर्चा कराने की मांग की और जब सरकार ने उसे मान लिया तो उन्होंने एक और मांग जोड़ दी कि जब तक धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं होगा तब तक वह धरना प्रदर्शन जारी रखेंगे। राहुल गांधी के इस व्यवहार को कोई भी समझ सकता है कि वह तो हर हाल में यह चाहते हैं कि संसद नहीं चले।
काकरोच जनता पार्टी का धरना प्रदर्शन जारी है और उसकी आड़ मोदी के धुर विरोधी सोशल मीडिया का सहारा लेकर यह जताने की कोशिश कर रहे हैं कि इस बार मोदी को उग्र प्रदर्शनकारियों के सहारे सत्ता से बाहर कर दिया जायेगा।
पेपर लीक के लिए सिर्फ केंद्र सरकार को दोषी ठहराने की राजनीति हो रही है लेकिन हकीकत यह है कि राज्य सरकारों के अपेक्षित सहयोग के बिना राष्ट्रीय स्तर की किसी भी परीक्षा का आयोजन संभव ही नहीं है। केंद्र सरकार परीक्षा के मानदंड तय करती है और उसका ईमानदारी से पालन हो तो पेपर लीक होने का प्रश्न ही नहीं उठता।
(लेखक पूर्व संपादक, यूनीवार्ता हैं।)