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जयशंकर ने कनाडा की विदेश मंत्री से सहयोग और साझा लक्ष्यों पर की चर्चा

प्रकाशित: 23-07-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
मनीला, (भाषा)। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बुधवार को कनाडा की अपनी समकक्ष अनीता आनंद के साथ द्विपक्षीय संबंधों पर बातचीत की, जिसमें सहयोग बढ़ाने और साझा लक्ष्यों पर विशेष ध्यान दिया गया। जयशंकर ने मनीला में दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के संग"न (आसियान) से संबंधित बै"कों से इतर अमेरिका, चीन, रूस, ऑस्ट्रेलिया, फिलीपीन, सिंगापुर, थाईलैंड और न्यूजीलैंड के अपने समकक्षों के साथ भी बै"कें कीं। इन बै"कों में समुद्री सुरक्षा, रक्षा और व्यापार जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा हुई।
जयशंकर और कनाडा की विदेश मंत्री के बीच यह बै"क ऐसे समय हुई है जब कुछ दिन पहले ही रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (आरसीएमपी) ने कहा था कि वर्ष 2023 में कनाडा में सिख अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या की जांच कर रहे अधिकारियों को इस मामले में भारत सरकार के अधिकारियों की संलिप्तता का कोई सबूत नहीं मिला है।हालांकि, यह तत्काल स्पष्ट नहीं हो सका कि बुधवार को दोनों विदेश मंत्रियों की बातचीत में निज्जर का मामला या खालिस्तान समर्थक गतिविधियों का मुद्दा उ"ा या नहीं।जयशंकर ने बै"क के बाद सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा, wआज दोपहर कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद के साथ हुई चर्चा सराहनीय रही। भारत-कनाडा सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। हमारी बातचीत दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों द्वारा संबंधों के लिए निर्धारित लक्ष्यों को हासिल करने पर केंद्रित रही।wवर्ष 2023 में तत्कालीन कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो द्वारा ब्रिटिश कोलंबिया में एक गुरुद्वारे के बाहर निज्जर की हत्या में भारत सरकार की कथित संलिप्तता के आरोप लगाने के बाद भारत-कनाडा संबंधों में गिरावट आई थी। नयी दिल्ली ने इन आरोपों को wबेतुकौ करार देते हुए खारिज कर दिया था।इसके बाद भारत ने ओटावा पर कनाडाई धरती से खालिस्तान समर्थक तत्वों को सक्रिय रहने देने का आरोप लगाया, जिससे दोनों देशों के संबंध और बिगड़ गए।
अक्टूबर 2024 में भारत ने ओटावा द्वारा भारतीय राजनयिकों को निज्जर हत्या मामले से जोड़ने का प्रयास किये जाने के बाद अपने उच्चायुक्त तथा पांच अन्य राजनयिकों को तब वापस बुला लिया था। इसके साथ ही भारत ने समान संख्या में कनाडाई राजनयिकों को भी निष्कासित कर दिया था।हालांकि, अप्रैल 2025 में हुए संसदीय चुनाव में लिबरल पार्टी के नेता मार्क कार्नी की जीत के बाद दोनों देशों के संबंधों में सुधार शुरू हुआ। इसके बाद दोनों देशों ने एक-दूसरे की राजधानियों में अपने उच्चायुक्त नियुक्त किए। साथ ही, दोनों पक्षों ने विभिन्न क्षेत्रों में संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए कई द्विपक्षीय तंत्रों को फिर से शुरू करने पर भी सहमति जताई।कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की मार्च में भारत यात्रा के बाद से दोनों देशों के संबंधों में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है।