आरबीआई ने सहमति को सेल्फ-रैगुलेटरी संगठन के रूप में मान्यता दी
प्रकाशित: 17-06-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
नई दिल्ली, (वीअ)। रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने सहमति को देश के एकाउंट एग्रीगेटर (एए) ईकोसिस्टम में सेल्फ-रैगुलेटरी ऑर्गेनाइजेशन (एसआरओ) के रूप में आधिकारिक मान्यता प्रदान की है। इसे भारत के डिजिटल वित्तीय ढांचे के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सहमति अब एकाउंट एग्रीगेटर फ्रेमवर्क के लिए उद्योग-आधारित समन्वयक और गवर्नेंस संस्था के रूप में कार्य करेगी। भारत का एकाउंट एग्रीगेटर ईकोसिस्टम दुनिया के सबसे बड़े सहमति-आधारित वित्तीय डेटा साझाकरण नेटवर्क में शामिल है। वर्तमान में इसमें 1120 से अधिक विनियमित वित्तीय संस्थाएं, 176 फाइनेंशियल इन्फॉर्मेशन प्रोवाइडर (एफआईपी), 1020 फाइनेंशियल इन्फॉर्मेशन यूजर (एफआईयू) और 17 परिचालन एकाउंट एग्रीगेटर शामिल हैं। इस फ्रेमवर्क के माध्यम से 450 मिलियन से अधिक सहमति-आधारित अनुरोधों को संसाधित किया जा चुका है तथा 294 मिलियन से अधिक खातों को जोड़ा गया है।
इसके जरिए लेंडिंग, बीमा, वेल्थ मैनेजमेंट और पर्सनल फाइनेंस जैसे क्षेत्रों में हर महीने 290 मिलियन से अधिक डेटा शेयरिंग संभव हो रही है। एकाउंट एग्रीगेटर फ्रेमवर्क भारत के डेटा एम्पावरमेंट एंड प्रोटेक्शन आर्किटेक्चर का प्रमुख हिस्सा है। यह नागरिकों और व्यवसायों को सुरक्षित एवं सहमति-आधारित तरीके से वित्तीय डेटा साझा करने की सुविधा देता है। आरबीआई, सेबी, आईआरडीएआई और पीएफआरडीए जैसे नियामकों के सहयोग से विकसित यह मॉडल वैश्विक स्तर पर भी सराहा जा रहा है।
इसके जरिए लेंडिंग, बीमा, वेल्थ मैनेजमेंट और पर्सनल फाइनेंस जैसे क्षेत्रों में हर महीने 290 मिलियन से अधिक डेटा शेयरिंग संभव हो रही है। एकाउंट एग्रीगेटर फ्रेमवर्क भारत के डेटा एम्पावरमेंट एंड प्रोटेक्शन आर्किटेक्चर का प्रमुख हिस्सा है। यह नागरिकों और व्यवसायों को सुरक्षित एवं सहमति-आधारित तरीके से वित्तीय डेटा साझा करने की सुविधा देता है। आरबीआई, सेबी, आईआरडीएआई और पीएफआरडीए जैसे नियामकों के सहयोग से विकसित यह मॉडल वैश्विक स्तर पर भी सराहा जा रहा है।