उत्तरी अमेरिका, उत्तर-पूर्व एशिया, लातिनी अमेरिका का भारत के निर्यात में हिस्सा बढ़कर 35 प्रतिशत पर
प्रकाशित: 17-05-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
नई दिल्ली, (भाषा)। भारत के माल निर्यात में अब पारंपरिक बाजारों के साथ-साथ नए क्षेत्रों की हिस्सेदारी भी लगातार बढ़ रही है। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, बीते वित्त वर्ष (2025-26) में उत्तरी अमेरिका, उत्तर-पूर्व एशिया और लातिनी अमेरिका का भारत के कुल माल निर्यात में 35 प्रतिशत से अधिक हिस्सा रहा। इस दौरान देश का कुल माल निर्यात 441.78 अरब डॉलर रहा।
आंकड़ों के मुताबिक, पूर्वी अफ्रीका को भारत का निर्यात 13.7 प्रतिशत बढ़कर 12.6 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो कुल निर्यात का 2.9 प्रतिशत है। वहीं उत्तरी अफ्रीका को निर्यात 14.8 प्रतिशत बढ़कर आ" अरब डॉलर हो गया और इसकी हिस्सेदारी 1.8 प्रतिशत रही। वाणिज्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि वैश्विक व्यापार में व्यवधानों के बावजूद भारत के निर्यात में भौगोलिक विविधता बढ़ी है और एशिया, अफ्रीका तथा लातिनी अमेरिका में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है। उत्तरी अमेरिका अब भी भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार बना हुआ है। इस क्षेत्र को भारत का निर्यात 97.7 अरब डॉलर रहा, जो कुल निर्यात का 22.1 प्रतिशत बै"ता है। इसमें सालाना वृद्धि दर 1.3 प्रतिशत रही, जिसे स्थिर और परिपद्र मांग का संकेत माना जा रहा है। सबसे तेज वृद्धि उत्तर-पूर्व एशिया में दर्ज की गई। इस क्षेत्र को भारत का निर्यात 21.6 प्रतिशत बढ़कर 41.6 अरब डॉलर पहुंच गया। इससे कुल निर्यात में इसकी हिस्सेदारी बढ़कर 9.4 प्रतिशत हो गई। इस क्षेत्र में भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजीनियरिंग उत्पाद, रसायन और औद्योगिक सामान की मांग बढ़ी है। उत्तर-पूर्व एशिया में चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, उत्तर कोरिया, मंगोलिया और ताइवान जैसे देश शामिल हैं, जिनकी विनिर्माण क्षमता काफी विकसित मानी जाती है। लातिनी अमेरिका में भी भारत के निर्यात में अच्छी वृद्धि देखने को मिली। इस क्षेत्र को निर्यात 7.8 प्रतिशत बढ़कर 16.4 अरब डॉलर हो गया, जो कुल निर्यात का 3.7 प्रतिशत है। इसके अलावा पश्चिम अफ्रीका और अन्य पश्चिम एशियाई देशों में भारत के निर्यात की हिस्सेदारी क्रमश: लगभग तीन प्रतिशत और दो प्रतिशत के आसपास स्थिर रही। वहीं मध्य अफ्रीका और मध्य एशियाई देशों जैसे छोटे बाजारों में भी दोहरे अंक की वृद्धि दर्ज की गई।
हालांकि, इनका आधार अपाकृत छोटा है। खास बात यह है कि भारत के उत्पादों के निर्यात में विविधता बढ़ी है। भारतीय निर्यातकों ने।,821 नए प्रमुख उत्पादों के साथ नए वैश्विक बाजारों में प्रवेश किया। अधिकारी के अनुसार, भारत अब केवल पारंपरिक वस्तुओं तक सीमित नहीं रहकर उच्च मूल्य वाले विनिर्माण, इंजीनियरिंग, कृषि-प्रसंस्करण और प्रौद्योगिकी आधारित क्षेत्रों में भी अपनी उपस्थिति मजबूत कर रहा है।
आंकड़ों के मुताबिक, पूर्वी अफ्रीका को भारत का निर्यात 13.7 प्रतिशत बढ़कर 12.6 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो कुल निर्यात का 2.9 प्रतिशत है। वहीं उत्तरी अफ्रीका को निर्यात 14.8 प्रतिशत बढ़कर आ" अरब डॉलर हो गया और इसकी हिस्सेदारी 1.8 प्रतिशत रही। वाणिज्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि वैश्विक व्यापार में व्यवधानों के बावजूद भारत के निर्यात में भौगोलिक विविधता बढ़ी है और एशिया, अफ्रीका तथा लातिनी अमेरिका में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है। उत्तरी अमेरिका अब भी भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार बना हुआ है। इस क्षेत्र को भारत का निर्यात 97.7 अरब डॉलर रहा, जो कुल निर्यात का 22.1 प्रतिशत बै"ता है। इसमें सालाना वृद्धि दर 1.3 प्रतिशत रही, जिसे स्थिर और परिपद्र मांग का संकेत माना जा रहा है। सबसे तेज वृद्धि उत्तर-पूर्व एशिया में दर्ज की गई। इस क्षेत्र को भारत का निर्यात 21.6 प्रतिशत बढ़कर 41.6 अरब डॉलर पहुंच गया। इससे कुल निर्यात में इसकी हिस्सेदारी बढ़कर 9.4 प्रतिशत हो गई। इस क्षेत्र में भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजीनियरिंग उत्पाद, रसायन और औद्योगिक सामान की मांग बढ़ी है। उत्तर-पूर्व एशिया में चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, उत्तर कोरिया, मंगोलिया और ताइवान जैसे देश शामिल हैं, जिनकी विनिर्माण क्षमता काफी विकसित मानी जाती है। लातिनी अमेरिका में भी भारत के निर्यात में अच्छी वृद्धि देखने को मिली। इस क्षेत्र को निर्यात 7.8 प्रतिशत बढ़कर 16.4 अरब डॉलर हो गया, जो कुल निर्यात का 3.7 प्रतिशत है। इसके अलावा पश्चिम अफ्रीका और अन्य पश्चिम एशियाई देशों में भारत के निर्यात की हिस्सेदारी क्रमश: लगभग तीन प्रतिशत और दो प्रतिशत के आसपास स्थिर रही। वहीं मध्य अफ्रीका और मध्य एशियाई देशों जैसे छोटे बाजारों में भी दोहरे अंक की वृद्धि दर्ज की गई।
हालांकि, इनका आधार अपाकृत छोटा है। खास बात यह है कि भारत के उत्पादों के निर्यात में विविधता बढ़ी है। भारतीय निर्यातकों ने।,821 नए प्रमुख उत्पादों के साथ नए वैश्विक बाजारों में प्रवेश किया। अधिकारी के अनुसार, भारत अब केवल पारंपरिक वस्तुओं तक सीमित नहीं रहकर उच्च मूल्य वाले विनिर्माण, इंजीनियरिंग, कृषि-प्रसंस्करण और प्रौद्योगिकी आधारित क्षेत्रों में भी अपनी उपस्थिति मजबूत कर रहा है।