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अपने में बेहद सफल रहा दिल्ली विधानसभा का मानसून सत्र विजेंद्र गुप्ता

प्रकाशित: 13-08-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
वीर अर्जुन संवाददाता
नई दिल्ली। मानसून सत्र बेहद सफल और उत्पादक रहा। विधानसभा में विपक्ष की नेता की लगातार अनुपस्थिति के बावजूद सदन में 13 घंटे 19 मिनट की कार्यवाही के दौरान 19 कैग रिपोर्ट पेश की गईं और चार महत्वपूर्ण विधेयक पारित किए गए यह बात दिल्ली विधानसभा के माननीय अध्यक्ष विजेन्द्र गुप्ता ने आज दिल्ली विधानसभा में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही। उन्होंने तीन दिवसीय मानसून सत्र की प्रमुख उपलब्धियों, महत्वपूर्ण कार्यों और विधायी परिणामों की जानकारी मीडिया को दी। नियम 280 के तहत माननीय सदस्यों ने कुल 52 जनहित के मामले उठाए। सामान्यत प्रतिदिन 10 सदस्यों के लिए निर्धारित सीमा के बावजूद इस बार एक ही दिन में 23 सदस्यों को जनहित के मुद्दे उठाने का अवसर दिया गया।
विधानसभा अध्यक्ष श्री विजेन्द्र गुप्ता ने बताया कि 22 विपक्षी सदस्यों वाली विधानसभा में विपक्ष के लगभग 20 सदस्य सदन में उपस्थित थे। वहीं, सत्तापक्ष की भी मजबूत उपस्थिति थी जिनमें 48 में से लगभग 44-45 सदस्य सदन में मौजूद थे। विधानसभा की कार्यक्षमता का उल्लेख करते हुए श्री गुप्ता ने 7वीं दिल्ली विधानसभा की तुलना की, जिसने अपने पूरे पांच वर्ष के कार्यकाल में केवल पांच सत्र आयोजित किए थे। इसके विपरीत, 8वीं दिल्ली विधानसभा ने डेढ़ वर्ष से भी कम समय में छह सत्र आयोजित किए हैं। सदन में उठाए गए विभिन्न मुद्दों का उल्लेख करते हुए श्री विजेन्द्र गुप्ता ने कहा कि सदस्यों ने कूड़ा निस्तारण, जलभराव, आवारा पशु, पीडब्लूडी की सड़कों और बिजली के बिलों सहित कई महत्वपूर्ण नागरिक समस्याओं को उठाया। सदन में उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों में राजनीतिक नेताओं की भूमिका और सजा के मुद्दे पर दो दिवसीय अल्पकालिक चर्चा भी हुई। इसके अलावा, दिल्ली लक्ष्मी योजना के संबंध में सदन ने सर्वसम्मति से बधाई प्रस्ताव पारित किया। श्री गुरु नानक साहिब जी के प्रकाश उत्सव पर शुभकामनाएं दी गईं तथा पूर्व विधायकों और दिल्ली में हुई दुखद आग की घटनाओं के पीड़ितों को श्रद्धांजलि भी दी गई। विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि सत्र के दौरान चार महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए गए और पारित किए गए। इनमें दिल्ली बेड एंड ब्रेकफास्ट प्रतिष्ठान (निरसन) विधेयक, 2026; नागरिकों को समयबद्ध और सुगम सेवाओं की उपलब्धता के अधिकार से संबंधित विधेयक, 2026; दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (संशोधन) विधेयक, 2026; तथा दिल्ली अग्निशमन सेवा (संशोधन) विधेयक, 2026 शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ये कानून जन सेवाओं की बेहतर व्यवस्था, शहरी आश्रय प्रशासन को मजबूत करने और दिल्ली अग्निशमन सेवा के कामकाज में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। सत्र के दौरान तकनीक के क्षेत्र में भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई। दिल्ली विधानसभा में एआई आधारित भाषिणी लाइव ट्रांसािढप्शन और अनुवाद प्रणाली का पायलट आधार पर शुभारंभ किया गया। यह किसी विधायी संस्था में देश का पहला ऐसा पायलट है। इसके माध्यम से विधानसभा ने तकनीक के उपयोग से सदन की कार्यवाही को अधिक सुगम, समावेशी और लोगों के लिए सुलभ बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। संस्थागत जवाबदेही पर जोर देते हुए श्री गुप्ता ने कहा कि 19 कैग रिपोर्टों पर सदन में विस्तृत और समयबद्ध चर्चा हुई। सभी रिपोर्टों को संबंधित सरकारी विभागों को एक्शन टेकन रिपोर्ट के लिए भेज दिया गया है। इस प्रािढया में लोक लेखा समिति (पैक) की सािढय भूमिका रहेगी तथा भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) के प्रतिनिधि भी इसमें शामिल होंगे।
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि इन रिपोर्टों पर कार्रवाई समयबद्ध तरीके से होनी चाहिए, ताकि प्रत्येक मामले का तार्किक निष्कर्ष निकले और उनकी सिफारिशों का जल्द से जल्द प्रभावी ािढयान्वयन सुनिश्चित किया जा सके। सदन और विधानसभा परिसर में कुछ विपक्षी सदस्यों के अमर्यादित आचरण पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए माननीय अध्यक्ष ने इसकी कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि सदन की कार्यवाही में व्यवधान पैदा करने, चावल जैसी वस्तुएं फेंकने, अभद्र भाषा का प्रयोग करने और तीनों दिन मार्शलों के हस्तक्षेप की स्थिति पैदा करने जैसी घटनाएं दुर्भाग्यपूर्ण हैं। श्री गुप्ता ने कहा कि अध्यक्ष के पास कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का पूरा अधिकार था, लेकिन उन्होंने लोकतांत्रिक मर्यादा और संसदीय परंपराओं के सम्मान की उम्मीद में संयम बरता। सदन के पटल से अध्यक्ष द्वारा निंदा प्रस्ताव भी पारित किया गया।
प्रशासनिक स्तर पर विधानसभा अध्यक्ष ने विधानसभा सचिवालय की पूर्ण पारदर्शिता के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि मीडिया के साथ लगातार और सुचारु संवाद, सार्वजनिक दस्तावेजों को समय पर उपलब्ध कराना तथा प्रत्येक सत्र का निर्धारित प्रािढया के अनुसार औपचारिक और व्यवस्थित तरीके से सत्रावसान करना सचिवालय की प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सत्रों का मनमाने तरीके से विभाजन नहीं किया जाएगा और पूरी प्रािढया में पारदर्शिता बनाए रखी जाएगी।