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दिल्ली विधानसभा के मानसून सत्र में तालमेल के अभाव में सरकार की घेराबंदी नहीं कर पाया विपक्ष

प्रकाशित: 12-08-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
कृष्ण देव पाठक
नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा का तीन दिवसीय मानसून सत्र मंगलवार को पक्ष विपक्ष के हंगामे के बीच संपन्न हो गया सत्र में आपसी तालमेल के अभाव में विपक्षी आम आदमी पार्टी के विधायक सरकार को चाह कर कहीं भी कटघरे में नहीं खड़ा कर पाए उल्टा सत्ता पक्ष पूरी तरह आाढामक रहा जिसका फायदा सरकार को कहीं ना कहीं मिला।
विधानसभा सत्र के दौरान सत्ता पक्ष अपना जो एजेंडा लेकर आया था वह पारित करने में सफल रहा और आम आदमी पार्टी पर पूरी तरह अपना निशान भी लगाया भले ही उसमें कैग की रिपोर्ट हो या अन्य मामले उसमें आम आदमी पार्टी निशाने पर रही पार्टी की बड़ी दिक्कत यह रही की नेता विपक्ष आतिश गोवा में थी उनके बाद सदन का काम कौन देखेगा। यह कहीं तय नहीं था पार्टी के वरिष्ठ नेता दिल्ली के संयोजक गोपाल राय भी सदन में औपचारिकता से निभाते आए भले ही गोपाल राय को गुजरात में दायित्व सौंप रखा हो लेकिन दिल्ली में फिलहाल उन्हें पार्टी ने पैदल ही कर रखा है इसलिए वह कहीं ना कहीं खामोशी में नजर आए पार्टी में नए विधायकों की एक ब्रिगेड जरूर हंगामा करती रही लेकिन उससे अन्य काफी विधायक सहमति नहीं रखते थे उनका कहना था यदि सरकार को नीचा दिखाना है मुद्दों पर घेरना होगा लेकिन पार्टी अनुशासन के नाम पर कोई खुलकर बोलने को तैयार नहीं था जिसका पूरा लाभ सत्ता पक्ष और सरकार लेने में सफल रहे।विपक्ष की दिक्कत यह रही की सत्ता पक्ष के पास सरकार में मुख्यमंत्री और उनके मंत्रियों के आाढामक तेवर के अलावा उनके विधायक भी पूरी तैयारी से आए थे जबकि विपक्ष की आम आदमी पार्टी में इस मामले में कोई रणनीति नहीं थी जिन मामलों पर आाढामक हुए भी उसका भी लाभ नहीं मिला दिल्ली लक्ष्मी योजना पर मुख्यमंत्री ने उनके सारे आरोपों को खारिज कर दिया तीन बच्चे वाले मुद्दों पर उन्होंने कहा की महिला कोई बच्चों की मशीन नहीं उसका स्वास्थ्य हमारे लिए प्राथमिकता है और उन्होंने आंकड़े बताएं जो साबित करते हैं किस योजना के प्रति महिलाओं में रुझान है चावल खरीद के मुद्दे पर भी विपक्ष का दाब उल्टा पड़ता नजर आया जब मंत्री मनजिंदर सिरसा ने कहा कि वह इस मामले में मानहानि का मुकदमा अदालत में लेकर जाएंगे और तब पता चल जाएगा क्या आरोप लगाने वाले कहां है जो कि उनके आत्मविश्वास को झलकता है।विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता को भी कई बार कहना पड़ा की लगता है विपक्ष के सदस्य की कार्यवाही में भाग लेने के इच्छुक नहीं है उन्होंने यहां तक पूछा कि भाई आपकी नेता कौन है यह तो बताओ लेकिन उसका भी जवाब नहीं था वहीं भाजपा विधायकों ने अपने मुद्दे जो उठा रहे थे उनको भी समर्थन मिला।