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दिल्ली विश्वविद्यालय में ‘आचारशाला' का आयोजन, ‘युवा, लोकतंत्र और भारत का भविष्य' पर हुआ सार्थक संवाद

प्रकाशित: 03-09-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
वीर अर्जुन संवाददाता
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय के डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर कार्यालय की ओर से बुधवार को कला संकाय स्थित टैगोर ऑडिटोरियम में ‘आचारशाला' का आयोजन किया गया। ‘युवा, लोकतंत्र और भारत का भविष्य' विषय पर आयोजित इस कार्पाम में करीब 140 विद्यार्थियों और 20 शिक्षकों ने भाग लिया। कार्पाम के दौरान लोकतंत्र, राष्ट्र निर्माण और युवाओं की जिम्मेदारियों से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श हुआ।
कार्पाम में भारत सरकार के विदेश मंत्रालय में निदेशक एवं आई.एफ.एस. अधिकारी श्री नितिन प्रमोद मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। दिल्ली विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग के प्रमुख प्रो. भारतेंदु पांडेय ने विशिष्ट अतिथि के रूप में कार्पाम की शोभा बढ़ाई। कार्पाम की अध्यक्षता दिल्ली विश्वविद्यालय के डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर प्रो. रंजन कुमार त्रिपाठी ने की। मुख्य संबोधन में श्री नितिन प्रमोद ने लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वतंत्र प्रेस और जागरूक नागरिकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने विकसित राष्ट्र के रूप में भारत की यात्रा का उल्लेख करते हुए सुशासन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, मजबूत बुनियादी ढांचे और नागरिक सहभागिता को देश की प्रगति के प्रमुख आधार बताया। उन्होंने युवाओं से रोजमर्रा के जीवन में दिखाई देने वाले भ्रष्टाचार के विभिन्न रूपों को पहचानने और उनका विरोध करने का आह्वान किया। साथ ही, उन्होंने युवाओं को भौगोलिक एवं भू-राजनीतिक विषयों की बेहतर समझ विकसित करने के लिए प्रेरित किया। श्री नितिन प्रमोद ने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विश्वगुरु बनाने का लक्ष्य केवल एक संकल्प नहीं, बल्कि आज हमारी सोच और कार्यों से निर्धारित होने वाली जिम्मेदारी है। उन्होंने युवाओं से देश के भविष्य को दिशा देने वाली सकारात्मक सोच विकसित करने और उसे अपने कार्यों में उतारने का आग्रह किया। प्रो. भारतेंदु पांडेय ने भारत की समृद्ध शास्त्राrय बौद्धिक परंपराओं को आधुनिक लोकतांत्रिक नागरिकता की जिम्मेदारियों से जोड़ते हुए विद्यार्थियों को आत्म-विकास, अनुशासन और राष्ट्र निर्माण में सािढय भागीदारी के लिए प्रेरित किया।